जसपाल राणा के निधन पर भरोसा नहीं कर पा रहीं मनु भाकर, आंखों में आंसू और टूटे दिल के साथ दिया पहला रिएक्शन
Jaspal Rana: भारतीय खेल इतिहास के सबसे सफल और अनुशासित अध्यायों में से एक का अचानक इस तरह अंत हो जाएगा ऐसा किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। देश को निशानेबाजी में पहचान दिलाने वाले पद्मश्री और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने के कारण दिल्ली के अस्पताल में निधन हो गया है।
इस दुखद खबर के सामने आते ही पूरी खेल दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है। सबसे गहरा और दिल को चीर देने वाला झटका उनकी सबसे होनहार शिष्या और पेरिस ओलंपिक की डबल ब्रॉन्ज मेडलिस्ट मनु भाकर को लगा है। गुरु के जाने के बाद मनु अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रही हैं।

मनु भाकर को नहीं हो रहा भरोसा
देहरादून में अपने गुरु के पार्थिव शरीर के पास खड़ी मनु भाकर ने बेहद रुंधे गले से इस अपूरणीय क्षति पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। मनु ने बेहद भावुक होते हुए कहा कि उन्हें अभी भी इस कड़वे सच पर बिल्कुल विश्वास नहीं हो रहा है। वे इस भयानक खबर को समझने और स्वीकार करने में पूरी तरह असमर्थ महसूस कर रही हैं।
जसपाल राणा का बर्ताव दोस्त की तरह होता था
डबल ओलंपिक मेडलिस्ट ने अपने सुनहरे सफर को याद करते हुए ओलंपिक्स डॉट से बातचीत में कहा कि जसपाल सर केवल उनके कोच या मार्गदर्शक नहीं थे। खेल के मैदान से इतर वे एक ऐसे सच्चे दोस्त थे जो उन्हें दुनिया में सबसे बेहतर और करीब से समझते थे। उनके बिना शूटिंग रेंज अब पहले जैसी कभी नहीं दिखाई देगी।
कभी नरम तो कभी सख्त रुख रहता था
मनु भाकर ने अपने और जसपाल राणा के बीच के उस अटूट रिश्ते को भी याद किया जिसमें कई उतार-चढ़ाव आए थे। उन्होंने बताया कि सर कभी उन पर बेहद सख्त होते थे तो कभी सिर्फ एक दोस्त की तरह उनकी उलझनों को शांत मन से सुनते थे। उनका हर एक कड़ा सबक आज मनु को जीवन की सही राह दिखा रहा है।
सफलता का क्रेडिट कोच को हमेशा जाएगा
पेरिस ओलंपिक की ऐतिहासिक सफलता को अपने गुरु के चरणों में समर्पित करते हुए मनु ने कहा कि उनका हर एक मेडल और पोडियम पर बिताया हर पल हमेशा जसपाल सर की याद दिलाएगा। इन जीतों का एक बड़ा हिस्सा हमेशा उनका रहेगा क्योंकि उन्होंने सबसे मुश्किल दौर में भी मनु पर भरोसा करना नहीं छोड़ा था।













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