Atul Limaye: कौन हैं RSS के रणनीतिकार अतुल लिमये? महायुति की बंपर जीत में निभाई सीक्रेट भूमिका
Who is RSS Strategist Atul Limaye: महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव परिणाम (Maharashtra Assembly Election Result) में महायुति गठबंधन ने एक तरफा बंपर जीत दर्ज की है। 288 सीटों में गठबंधन ने 230 सीटों पर कब्जा जमाया है, जिसमें बीजेपी ने 130, शिंदे शिवसेना ने 57 और अजित पवार एनसीपी ने 41 सीटों पर जीत हासिल की। महायुति की शानदार जीत के बाद आरएसएस के 54 वर्षीय संयुक्त महासचिव अतुल लिमये की जमकर चर्चा हो रही है।
महाराष्ट्र में महायुति की ऐतिहासिक जीत के पीछे जो एक नाम जमकर चर्चाओं में हैं, वो अतुल लिमये ही हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संयुक्त महासचिव 54 वर्षीय इंजीनियर अतुल ने अपनी कुशल रणनीति और विचारधारा आधारित नेतृत्व से चुनाव में जीत की आधारशीला रखी है।

नासिक के रहने वाले हैं अतुल लिमये
असंतुष्ट सामाजिक समूहों के नेताओं से संपर्क साधने सहित लिमये की रणनीति और सोची-समझी सोशल इंजीनियरिंग ने कथित तौर पर एनडीए को सत्ता विरोधी लहर से निपटने में अहम भूमिका निभाई। अतुल लिमये ने चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ समन्वय स्थापित किया।
Who is Atul Limaye कौन हैं अतुल लिमये?
नासिक के इंजीनियर लिमये ने करीब तीन दशक पहले एक मल्टीनेशनल कंपनी छोड़कर आरएसएस जॉइन कर लिया था और पूर्णकालिक प्रचारक बन गए थे।
नए संघ रणनीतिकार ने शुरुआत में रायगढ़ और कोंकण जैसे पश्चिमी महाराष्ट्र क्षेत्रों में काम किया, बाद में मराठवाड़ा और उत्तरी महाराष्ट्र क्षेत्रों को शामिल करते हुए देवगिरी प्रांत के सह प्रांत प्रचारक बन गए।
पश्चिमी महाराष्ट्र क्षेत्र के प्रभारी रहे
लिमये महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा सहित पश्चिमी महाराष्ट्र क्षेत्र के प्रभारी थे, जब 2014 में भाजपा ने राज्य में सत्ता हासिल की थी। सह प्रांत प्रचारक के रूप में लिमये के कार्यकाल ने उन्हें राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था और क्षेत्र की सामाजिक-राजनीतिक गतिशीलता का सामना करने वाले मुद्दों को समझने में मदद की।
पश्चिमी क्षेत्र के प्रमुख के रूप में लिमये ने महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य की गहरी समझ हासिल की, जिसमें भाजपा नेताओं और विपक्ष की ताकत और कमजोरियां शामिल थीं। इन भूमिकाओं के बाद लिमये ने कई रिसर्च टीम, स्टडी ग्रुप और थिंक टैंक बनाए, जिन्होंने धार्मिक अल्पसंख्यकों की जनसांख्यिकी से लेकर सरकारी ढांचे के भीतर नीति-निर्माण तक विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। जिसके बाद पूरी रणनीति के साथ महायुति की जीत में अहम भूमिका निभाई।












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