राज-उद्धव एकजुटता पर सस्पेंस! संजय राउत बोले- 'बालासाहेब की विरासत को तोड़ने वाले पर भरोसा नहीं'
Raj-Uddhav Thackeray News: दो दशकों पुरानी राजनीतिक दुश्मनी को पीछे छोड़ते हुए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे करीब आते दिखाई दे रहे हैं। दोनों के बीच नजदीकियां लगातार बढ़ रही है।
दोनों नेताओं ने महाराष्ट्र में हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने की नीति का विरोध कर रहे हैं। वहीं दोनों भाईयों के बीच मेल-मिलाप को लेकर चर्चा जारी है।

'मराठी अस्मिता' के नाम पर बढ़ रही है निकटता
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाए जाने के फैसले पर क्षेत्रीय दलों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह मराठी भाषा की प्रतिष्ठा पर सीधा हमला है। यही मुद्दा अब ठाकरे भाइयों को एक मंच पर लाने वाला कारक बन रहा है।
राज ठाकरे ने दिए संकेत
वहीं हाल ही में फिल्म निर्माता महेश मांजरेकर के पॉडकास्ट में राज ठाकरे ने संकेत दिए कि वे महाराष्ट्र और मराठी भाषा की रक्षा के लिए उद्धव ठाकरे के साथ सहयोग करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि, जब बड़े मुद्दे सामने आते हैं, तब आपसी झगड़े छोटे लगते हैं। महाराष्ट्र और मराठी लोगों के लिए हमारे बीच की लड़ाइयां महत्वहीन हैं।'
उद्धव ठाकरे की सशर्त सहमति
वहीं उद्धव ठाकरे ने भी इस पहल का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने कहा है कि, 'पहले यह तय करें कि जो महाराष्ट्र के खिलाफ काम करते हैं, उन्हें घर बुलाकर खाना नहीं खिलाया जाएगा। तभी राज्यहित की बात करें। उद्धव ने याद दिलाया कि जब उन्होंने लोकसभा चुनावों के दौरान महाराष्ट्र से उद्योगों को गुजरात ले जाने के खिलाफ आवाज़ उठाई थी, अगर उस वक्त विरोध होता तो आज भाजपा केंद्र में सत्ता में नहीं होती।'
'कोई औपचारिक गठबंधन नहीं', बोले संजय राउत
शिवसेना (UBT)नेता संजय राउत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उद्धव और राज के बीच भावनात्मक बातचीत चल रही है, कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है। उन्होंने कहा कि, 'वे भाई हैं, वर्षों से साथ हैं। वह रिश्ता कभी पूरी तरह टूटा नहीं। राजनीति में साथ आएंगे या नहीं, यह उन्हीं पर निर्भर करता है।'
भरोसा नहीं किया जा सकता- संजय राउत
उन्होंने यह भी जोड़ा कि, 'उद्धव ठाकरे ने कभी कोई औपचारिक शर्त नहीं रखी है, लेकिन जो भी पार्टी महाराष्ट्र का हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन उन्हीं ताकतों से हाथ मिलाती है जिन्होंने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को तोड़ा और महाराष्ट्र की शान को ठेस पहुंचाई उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।'
फडणवीस ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मेल मिलाप पर बोलते हुए कहा कि, 'अगर दोनों एक साथ आते हैं तो हमें खुशी होगी, क्योंकि जब लोग आपसी मतभेद सुलझाते हैं, तो यह अच्छी बात होती है। मैं और क्या कह सकता हूं।'












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