'मोदी ने अगर संविधान पढ़ा होता तो अलग नीतियां अपनाते', राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में साधा निशाना
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार (19 नवंबर) को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगर भारत का संविधान पढ़ा होता तो वे अलग नीतियां अपनाते। 20 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव और नांदेड़ लोकसभा उपचुनाव से पहले एक रैली में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि संविधान हमें अमीर और गरीब के बीच भेदभाव करना नहीं सिखाता।
उन्होंने दावा किया, "मोदी ने 25 अमीर लोगों के 16 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए हैं, लेकिन गरीबों और किसानों के कर्ज नहीं माफ किए हैं।" उन्होंने कहा कि संविधान आपको यह नहीं सिखाता।

राहुल गांधी ने मणिपुर में चल रहे संघर्ष का भी जिक्र किया और कहा कि देश के इतिहास में हमने कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी है, जहां "एक राज्य एक साल से अधिक समय से जल रहा हो, लेकिन प्रधानमंत्री ने वहां का दौरा नहीं किया हो।"
लाल कवर वाला संविधान दिखाते हुए उन्होंने कहा, "मोदी जी कहते हैं कि यह किताब खाली है। क्या यह खाली है? उन्होंने भारत के संविधान को नहीं समझा है। यह देश की आवाज है और इसमें भारत का इतिहास और आत्मा समाहित है। आपने (मोदी) इसे अपने जीवन में नहीं पढ़ा है। अन्यथा आप वह नहीं करते जो आप कर रहे हैं।''
भाजपा संविधान को खत्म करने के लिए ''गुप्त रूप से'' काम कर रही है: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा संविधान को खत्म करने के लिए ''गुप्त रूप से'' काम कर रही है, लेकिन वह ऐसा खुलकर नहीं कहेगी क्योंकि तब पूरा देश इसके खिलाफ उठ खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि संविधान गरीब लोगों के अधिकारों की रक्षा करता है और कांग्रेस इसकी रक्षा के लिए लड़ रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि देश एक तरफ ''घृणा, क्रोध और अहंकार'' और दूसरी तरफ ''प्रेम और भाईचारे'' के बीच लड़ाई देख रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जहां लोग महंगाई और बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं, वहीं देश में हवाईअड्डे, बंदरगाह और सड़कें दो बड़े उद्योगपतियों को दी जा रही हैं। जाति जनगणना की अपनी मांग के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आबादी में दलितों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत, आदिवासियों की आठ प्रतिशत और अल्पसंख्यकों की 15 प्रतिशत है, जबकि पिछड़े वर्गों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है।
राहुल गांधी ने कहा, ''लेकिन केंद्र सरकार चलाने वाले 90 नौकरशाहों में एक आदिवासी, तीन दलित, तीन पिछड़े वर्ग के अधिकारी शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि जब 100 रुपये (वितरण के संबंध में निर्णय) की बात आती है तो दलितों की भागीदारी एक रुपये, आदिवासियों की 10 पैसे और पिछड़े वर्ग की पांच रुपये होती है।''
उन्होंने यह भी पूछा कि वेदांता फॉक्सकॉन, टाटा एयरबस, बल्क ड्रग्स पार्क और पेट्रोलियम परियोजनाओं को 'गुजरात क्यों स्थानांतरित किया गया', साथ ही उन्होंने धारावी पुनर्विकास परियोजना को अडानी समूह की इकाई को दिए जाने पर भी हमला किया।












Click it and Unblock the Notifications