विपक्षियों की मीटिंग को 'सामना' ने बताया भारत का 'वैगनर ग्रुप', लिखा-2024 में मोदी को भी जाना होगा
उद्धव ठाकरे की शिवसेना-यूबीटी के मुख्य पत्र 'सामना' में पटना में जुटे विपक्षी नेताओं के समूह की विचित्र तुलना की गई है। सामना ने अपने संपादकीय में लिखा कि पटना में हुई विपक्षी दलों की बैठक में जुटे नेताओं का समूह 'भारत का वैगनर ग्रुप' है।
सामना ने अपने संपादकीय में लिखा- पटना में मोदी की सत्ता को चुनौती देने के लिए भारत का वैगनर ग्रुप एक साथ आया है। यह ग्रुप किराये का नहीं है ये बहुत अहम है।

इसके साथ ही संपादकीय में दावा किया गया कि पटना में जुटे 'वैगनर ग्रुप' ने ये संकेत दिए हैं कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तरह 2024 में मोदी को भी जाना होगा, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से।
सामना ने अपने संपादकीय में आगे लिखा देश के 17 प्रमुख राजनीतिक दलों की पटना में लंबी बैठक हुई। इसमें पांच मौजूदा और लगभग इतने ही पूर्व मुख्यमंत्री मौजूद थे।पटना में हुई इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी को सामने से जाकर हराने का फैसला लिया गया है। ये लोकतंत्र के नजरिए से एक अच्छी खबर है।
उद्धव ठाकरे की पार्टी के मुख पत्र सामना ने आगे लिखा- वर्तमान समय में पुनित के देश का क्या हो रहा है? पुतिन ने जो अपनी सुविधा के लिए वैनगर ग्रुप तैयार किया था उसी ने पुतिन के खिलाफ बगावत कर दिया। पुलिन के लोग चुनाव में गड़बड़ी करके चुनाव जीतते रहे और संसद पर कब्जा जमाए रखा, ऐसा ही हिंदुस्तान में चल रहा है, इस कारण लोगों के मन में कांति की भावना का निर्माण हो रहा है।
इसके साथ ही सामना मेंं लिखा गया पुतिन के कार्यकाल से मोदी सरकार की तुलना करते हुए लिखा भारत में भाजपा ने सत्त्ता में बने रहने के लिए कई बिकाऊ लोगोंं को अपने आस-पास रक्षक बनाकर रखा है, कल ये ही लोग सबसे पहले मोदी-शाह की पीीट में वार करेंगे और उन्हें सड़क पर ला खड़ा करेंगे।
गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे के सामना ने पटना विपक्षी ब्लॉक को 'वैगनर ग्रुप ऑफ इंडिया' कहा है, ये एक विचित्र तुलना इसलिए है क्योंकि वैगनर ग्रुप मूल रूप से किराए के सैनिकों की एक प्राइवेट सेना है, जिसने मॉस्को पर मार्च किया और बाद में पीछे हट गए, इसके नेता येवगेनी प्रिगोझिन ने निर्वासन में जाने के लिए क्रेमलिन समझौते को स्वीकार कर लिया। विपक्षी गठबंधन की यह तुलना शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे और अन्य विपक्षी दलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
वहीं केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने पटना में हुई विपक्षी दलों की मीटिंग पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि विपक्षी फोटो खिंचवाने के लिए साथ आए हैं लेकिन भाजपा 300 से ज्यादा सीटें 2024 में जीत कर आएगी।
शाह के इस बयान पर सामना में पलटवार करते हुए लिखा गया अमित शाह की अपेक्षा के अनुरूप ही प्रतिक्रिया दी है। देश में फोटोप्रेमी कौन है? ये देश की 140 करोड़ जनता प्रतिदिन देख रही है। फोटो की लोकप्रियता के आड़े आने वाले अपने ही नेताओं, मंत्रियों को वैसे ढकेल दूर किया जाता है, ये मोदी ने कई बार दिखा दिया है।
और रहा सवाल 2024 के लोकसभा चुनाव का तो इस बार इसका फैसला ईवीएम नहीं देश की जनता करेगी। इसके साथ ही सामना में लिखा गया विपक्ष के लोग अगर पटना में फोटो खिंचाने के लिए एकत्र हुए तो अगर ये मान लिया जाए तो उनसे इतना डरने की वजह क्या है?












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