'हमारी शिवसेना ही असली', उद्धव ने अपने दावे के समर्थन में दिया ये तर्क

मुंबई, 18 सितंबर: किसकी शिवसेना असली है, उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली या फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली ? इसको लेकर उद्धव ने बड़ा दावा करते हुए सीएम शिंदे पर जोरदार हमला किया है। उन्होंने कहा है कि 'असली' शिवसेना वही है, जिसके वो (उद्धव) मुखिया हैं और जो चार पीढ़ियों तक सामाजिक कार्य करके पैदा हुई है। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम ने शनिवार को मुंबई के शिवसेना भवन में अपनी अगुवाई वाली पार्टी के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सेना को 'छीना या खरीदा नहीं जा सकता।'

Former Maharashtra CM Uddhav Thackeray has told the Shiv Sena of his faction as the real one. He said that this is a party born out of the struggle of four generations

हमारी शिवसेना ही असली
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और अपनी गुट की शिवसेना के चीफ उद्धव ठाकरे ने दावा किया है कि 'हमारी ही असली पार्टी है, जो कि चार पीढ़ियों तक दशकों के सामाजिक कार्यों के दम पर पैदा हुई है।' ठाकरे ने भरोसा जताया है कि शिवसेना को कमजोर करने के लिए उसे तोड़ने और दल-बदल की कोशिशें पहले भी की जा चुकी है और वह अब भी सफल नहीं होगी। न्यूज एजेंसी पीटीआई से पार्टी के लोकसभा सांसद और प्रवक्ता विनायक राउत ने कहा कि ठाकरे ने पार्टी पदाधिकारियों से जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और पार्टी संगठन को मजबूत करने पर फोकस करने के लिए कहा है।

दशहरा रैली की 'लड़ाई' की तैयारी शुरू
यही नहीं, शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख ने पार्टी पदाधिकारियों से कहा है कि वार्षिक दशहरा रैली मुंबई के शिवाजी पार्क के परंपरागत स्थान में ही होगी और उनसे इस कार्यक्रम के लिए खुद को तैयार करने को कहा है। इसकी तैयारी के सिलसिले में उद्धव सेना के पदाधिकारियों के साथ 21 सितंबर को एक बैठक भी करेंगे। इस बार शिवाजी पार्क में शिवसेना की इस परंपरागत रैली के लिए ठाकरे गुट और शिंदे गुट दोनों ने बीएमसी में आवेदन दे रखा है, जिसपर मंजूरी मिलनी अभी बाकी है। वैसे यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि बीएमसी पर अभी भी उद्धव गुट का कब्जा है।

शिंदे गुट भी खुद को 'असली' शिवसेना बता रहा है
इस साल जून में एकनाथ शिंदे की अगुवाई में शिवसेना के कुल 41 एमएलए ने उद्धव के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर दिया था, जिसकी वजह से महाविकास अघाड़ी की सरकार गिर गई थी। संख्या बल के हिसाब से शिंदे गुट खुद को पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे का 'असली' शिवसेना बताता है और इसी आधारी पर पार्टी के चुनाव निशान 'धनुष और बाण' पर दावा कर रहा है। लेकिन, उद्धव संख्या बल को चुनौती दे रहे हैं।

शिवसेना के दोनों गुटों की कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुकी है। इसमें बागी विधायकों की अयोग्यता से लेकर पार्टी में कई पदों पर नियुक्तियों का विवाद भी विचाराधीन है।

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