'सुप्रिया जीत गई थीं लोकसभा चुनाव, फिर भी...', परिवारवाद के आरोप पर शरद पवार ने प्रफुल्ल पटेल को दिलाई याद
प्रफुल्ल पटेल ने सुप्रिया सुले को लेकर किसी भी बयान से इनकार किया है। हालांकि उन्होंने अब कहा कि उनके मन में हमेशा पवार परिवार के प्रति सम्मान का भाव रहेगा। वहीं एनसीपी ने दिग्गज ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
NCP Political Crisis: एनसीपी में नेतृत्व संकट के बीच शरद पवार ने बड़ी बात कही है। दिग्गज एनसीपी नेता ने प्रफुल्ल पटेल को पिछले दशक में एनसीपी की ओर से लिए गए एक अहम निर्णय का जिक्र किया। प्रफुल्ल पटेल को लेकर कथित तौर पर कहा गया कि उन्होंने शरद पवार पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया। इस बयान को लेकर शरद पवार ने कहा कि प्रफुल्ल पटेल को 10 साल के लिए केंद्रीय मंत्री का पद दिया गया था और फिर वह लोकसभा चुनाव में हार गए। जबकि सुप्रिया सुले ने लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। प्रफुल्ल पटेल के लोकसभा सीट हारने के बाद भी उन्हें राज्यसभा सीट दी गई।
वहीं प्रफुल्ल पटेल ने शनिवार को सुप्रिया सुले के खिलाफ किसी भी बयान से इनकार किया और कहा कि उनके मन में हमेशा पवार परिवार के प्रति हमेशा सम्मान की भावना रहेगी। इससे पहले प्रफुल्ल पटेल के बयान को लेकर रिपोर्ट में कहा गया कि शरद पवार के खिलाफ अजित पवार के विद्रोह के साथ महाराष्ट्र की राजनीति में पासा पलट गया। वहीं प्रफुल्ल पटेल ने अजित के खेमे में शामिल होने के आरोप गए हैं हालांकि एक साक्षात्कार में प्रफुल्ल पटेल ने ये दावा खरिज कर दिया।

दरअसल, सुप्रिया सुले शरद पवार के सभी कार्यों का आधार बन गई हैं। विभाजन से तीन हफ्ते पहले प्रफुल्ल पटेल और सुप्रिया सुले कोसंयुक्त रूप से पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। एनसीपी में विभाजन से पहले प्रफुल्ल पटेल शरद पवार के दाहिने हाथ हुआ करते थे, जिससे ऐसी अटकलें लगने लगीं कि अजित पवार के विद्रोह को शरद पवार का 'आशीर्वाद' प्राप्त था।
चुनाव हारने के बाद प्रफुल्ल पटेल ने सुप्रिया सुले के खिलाफ कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया। उन्होंने शनिवार को ट्वीट किया, जिसमें लिखा, "मैंने श्री शरद पवार और श्रीमती सुप्रिया सुले के बारे में कभी भी अपमानजनक कुछ नहीं बोला है और न ही कभी बोलूंगा। मेरे मन में हमेशा पवार परिवार के प्रति अत्यंत सम्मान रहेगा।"
राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने शनिवार को कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय जनता पार्टी की राज्य स्तरीय पार्टियों को "नष्ट" करने और विपक्ष को कमजोर करने की योजना है। अपने भतीजे अजीत पवार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कई अन्य विधायकों के उनके खिलाफ विद्रोह करने और महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल होने के कुछ दिनों बाद वरिष्ठ पवार पार्टी कार्यकर्ताओं को अपने पीछे लाने के प्रयास में सड़क पर उतरे। शहर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और पीवी नरसिम्हा राव की राजनीति देखी है, ये सभी विपक्षी दलों के बारे में (आलोचनापूर्वक) बोलते थे लेकिन कभी भी उन्हें चुप कराने की कोशिश नहीं की।












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