Maharashtra Politics: कांग्रेस-NCP में PAC पर भारी मनमुटाव, खुश क्यों हो रहे होंगे उद्धव ठाकरे? जानिए
महाराष्ट्र में इस समय पीएसी के गठन में देरी हो रही है, क्योंकि इसके अध्यक्ष पद पर कांग्रेस-एनसीपी दोनों ने दावा ठोक रखा है। लेकिन, इसका फायदा परोक्ष तौर पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना को मिल रहा है।

महाराष्ट्र की राजनीति में विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (एमवीए) में लोक लेखा समिति (पीएसी) के गठन को लेकर भारी मनमुटाव उजागर हुआ है। लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था के तहत पीएसी विधायिका की एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन, एमवीए के घटक दलों की आपसी लड़ाई में इसका गठन लटका हुआ है।

पीएसी अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस-एनसीपी में मतभेद
लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत यह परंपरा बन चुकी है कि पीएसी के अध्यक्ष का पद विपक्ष के पास होता है। लेकिन,कांग्रेस और एनसीपी में इस मुद्दे पर बुरी तरह ठनी हुई है। कांग्रेस ने पूर्व सीएम और वरिष्ठ एमएलए अशोक चव्हाण का नाम प्रस्तावित किया है, तो एनसीपी ने एमएलए रोहित पवार का नाम आगे बढ़ा रखा है।

एमवीए में आम सहमति के इंतजार में स्पीकर
विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर इंतजार कर रहे हैं कि पहले एमवीए में अध्यक्ष पद पर आम सहमति बने तो वह लोक लेखा समिति का गठन करें। पीएसी विधायिका की बहुत शक्तिशाली समिति होती है, जिसमें विधानसभा और विधान परिषद दोनों के सदस्य होते हैं और यह नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट की जांच करती है।

कांग्रेस पीएसी अध्यक्ष पद पर क्यों कर रही है दावा?
टीओआई की एक रिपोर्ट में एमवीए के एक वरिष्ठ सूत्र के हवाले से बताया गया है कि कांग्रेस पीएसी के अध्यक्ष पद पर इसलिए दावा ठोक रही है, क्योंकि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद एनसीपी के अजित पवार के पास है और विधान परिषद में शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) के नेता अंबादास दानवे विपक्ष के नेता हैं।

परंपरा के हिसाब से एनसीपी बड़ी दावेदार
विधानसभा से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 'परिपाटी के हिसाब से विपक्ष में जिस पार्टी के पास सबसे ज्यादा विधायक होते हैं, उन्हें ही यह पद मिलता है, जो कि एनसीपी के पास है। लेकिन, कांग्रेस ने भी दावा किया है। इसलिए हमने दोनों दलों से कहा कि देख लें कि कोई सहमति से एक नाम हो, ताकि जल्द पीएसी गठित की जा सके।'
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स्पीकर कर सकते हैं रोहित पवार के नाम की घोषणा
उस अधिकारी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि 'अगर ऐसा नहीं होता है तो परंपरा के अनुसार अध्यक्ष का नाम घोषित कर दिया जाएगा।' विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा भी है कि लोक लेखा समिति की घोषणा जल्द की जाएग।

कांग्रेस-एनसीपी में मतभेद से क्यों खुश हो रहे होंगे उद्धव?
लेकिन, कांग्रेस और एनसीपी में पीएसी अध्यक्ष के मुद्दे पर जो भी खींचतान चल रही है, उससे अभी तक पीएसी का गठन लटका हुआ है और इससे पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे बहुत खुश हो सकते हैं। क्योंकि, इस देरी की वजह से बीएमसी पर सीएजी की स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है, जो दो महीने पहले सदन में पेश किया गया था।
पीएसी के गठन में देरी से सीएजी की रिपोर्ट लंबित
गौरतलब है कि देश के कई छोटे राज्यों से भी ज्यादा बजट वाली बीएमसी पर अभी भी उद्धव ठाकरे की पार्टी का कब्जा है। विधानसभा से सीएजी की रिपोर्ट को पीएसी में ही चर्चा के लिए भेजा जाता है, जो कि आगे की कार्रवाई की सिफारिश करती है। लेकिन, पीएसी जब अस्तित्व में ही नहीं है तो कार्रवाई की सिफारिश करेगा कौन?

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सीएजी ने बीएमसी की कारगुजारियां उजागर की हैं
दरअसल, सीएजी की रिपोर्ट में बीएमसी पर बिना नियमों के पालन किए करोड़ रुपए के ठेके देने पर आपत्ति जाहिर की गई है। इसके मुताबिक बीएमसी ने इसमें पारदर्शिता नहीं रखी, ठेकेदारों के फेवर किए, जिससे इसे वित्तीय नुकसान झेलनी पड़ी और दाम बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए। बीएमसी चुनाव से पहले अगर पीएसी की ओर से इस रिपोर्ट पर कार्रवाई होती है तो उद्धव ठाकरे की पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।












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