महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक की जमानत अर्जी खारिज, दाऊद से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में हैं अंदर
महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक को स्पेशल कोर्ट ने फिर झटका दिया है। दाऊद इब्राहिम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में उनकी बेल अर्जी खारिज कर दी गई है। ईडी ने उनकी जमानत याचिका का सख्त विरोध किया था।
मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक की जमानत याचिका आज खारिज कर दी है। यह मामला पाकिस्तान में छिपे बैठे आतंकी सरगना दाऊद इब्राहिम की गैर-कानूनी गतिविधियों से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा है। शरद पवार की पार्टी एनसीपी के वरिष्ठ नेता नवाब मलिक तभी से जेल के अंदर हैं, जब वह उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महा विकास अघाड़ी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। स्पेशल कोर्ट के विशेष जज आएन रोकड़े ने उनकी बेल याचिका खारिज की है।

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक की जमानत अर्जी खारिज
मुंबई की विशेष अदालत ने पिछले 14 नवंबर को एनसीपी के सीनियर नेता नवाब मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। प्रवर्तन निदेशालय ने नवाब मलिक को इसी साल फरवरी में गिरफ्तार किया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं और इस समय इलाज के नाम पर मुंबई के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हैं। गिरफ्तारी के समय नवाब मलिक उद्धव सरकार में भारी-भरकम मंत्री थे और जेल जाने के बाद भी उन्होंने ना तो इस्तीफा दिया था या ना ही पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने उन्हें कैबिनेट से बर्खास्त किया था। हालांकि, जून में खुद उद्धव की सरकार ही गिर गई थी और मलिक का मंत्री पद भी उसी के साथ चला गया था।
दाऊद इब्राहिम के साथ साठगांठ से जुड़ा है मामला
एनसीपी नेता ने स्पेशल कोर्ट में जमानत की अर्जी इस आधार पर दी थी कि उनका दावा है कि मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई आधार नहीं है। हालांकि, जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने यह कहकर उनकी बेल याचिका का पूरजोर विरोध किया कि यह केस नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने दाऊद इब्राहिम और उसके गुर्गों के खिलाफ दर्ज किया था और याचिका पर उसी के आधार पर विचार किया जाना चाहिए।
'बेकसूर होने का कोई सवाल ही नहीं है'
ईडी ने अदालत में दावा किया है कि आरोपी (नवाब मलिक) दाऊद इब्राहिम और उसकी बहन हसीना पार्कर के साथ डील करते थे और इसलिए 'उनके बेकसूर होने का कोई सवाल ही नहीं है।'
एनसीपी नेता के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय का मुकदमा दाऊद इब्राहिम के खिलाफ एनआईए की एफआईआर के आधार पर ही है। दाऊद 1993 के मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड है और उसके और उसके सहयोगियों के खिलाफ एनआईए की एफआईआर सख्त आतंकवाद-निरोधी कानून यूएपीए के तहत दर्ज की गई है। (इनपुट-पीटीआई)












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