Mumbai Weather: मानसून की देरी ने बढ़ाई टेंशन, मुंबई में कब बरसेंगे झमाझम बदरा? IMD का आया बड़ा अपडेट
Mumbai Weather: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में रहने वाले लोगों को मानसून की फुहारों के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, मुंबई और कोंकण क्षेत्र में जून के आखिरी हफ्ते में ही मानसून की एंट्री होने के बाद झमाझम बारिश होगी।
लगातार बदल रहे मौसम के मिजाज ने इस साल बारिश की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। आमतौर पर मुंबई में मानसून की दस्तक 10 या 11 जून तक हो जाती है, लेकिन इस बार पश्चिमी तट पर मानसून की प्रगति 8 जून से पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। मानसून की इस बेरुखी के कारण मुंबई और उसके पड़ोसी जिलों में उमस और तपिश लगातार बनी हुई है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।

मौसम विभाग ने इस महीने कई बार मानसून के आगमन की तारीखों में बदलाव किया है। शुरुआती अनुमानों में इसके 18 या 19 जून तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद जताई गई थी। इसके बाद इस समयसीमा को बढ़ाकर 22-25 जून किया गया और अब इसके जून के अंत यानी 25 जून तक टलने के संकेत मिल रहे हैं।
क्यों मानसून में हो रही देरी?
आईएमडी के वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून की पश्चिमी शाखा उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पा रही है। यह मौसमी सिस्टम दक्षिण कोंकण के हरनाई क्षेत्र के पास आकर ठहर गया है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून कम से कम 20 जून तक इसी स्थिति में फंसा रह सकता है, जिसके कारण पूरे महाराष्ट्र में तेज बारिश नहीं हो रही है।
मुंबई में किस दिन शुरू होगी तेज बारिश?
'स्काईमेट' ने भी स्थिति पर चिंता जताई है। स्काईमेट के अनुसार, मुंबई में मानसून का वास्तविक आगमन 25 जून के बाद ही संभावित है। यदि ऐसा होता है, तो यह हाल के वर्षों में मानसून की सबसे अधिक देरी से होने वाली एंट्री में से एक होगी। इससे पहले साल 2023 में भी मानसून ठीक 25 जून को मुंबई पहुंचा था।
मुंबई में जून में अब तक कितनी हुई बारिश?
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून के शुरुआती पखवाड़े में मुंबई में केवल 13 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस अवधि के सामान्य औसत से काफी कम है। दिन के समय बादलों की आवाजाही जरूर होती है, लेकिन वे बिना बरसे ही आगे निकल जा रहे हैं, जिससे गर्मी से कोई ठोस राहत नहीं मिल रही है।
क्या इस बार कम होगी बारिश?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के आगमन में देरी का मतलब यह कतई नहीं है कि पूरे सीजन में बारिश कम होगी। मानसून का वास्तविक मूल्यांकन जून से सितंबर तक के चार महीनों की अवधि के आधार पर होता है। यदि आने वाले हफ्तों में मौसमी सिस्टम मजबूत होते हैं, तो बारिश की स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है।
मानसून में देरी से क्या हो रहा नुकसान?
इसके बावजूद, जून के महीने में बारिश की कमी सीधे तौर पर देश के कृषि क्षेत्र और जल संसाधनों पर दबाव बनाती है। देश के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की बुवाई जून के मध्य से शुरू हो जाती है। वर्षा में हो रहे विलंब के कारण किसानों के सामने बुवाई टालने या फसलों के नुकसान का जोखिम खड़ा हो गया है।
इसके साथ ही, मुंबई जैसे बड़े महानगरों को पानी की आपूर्ति करने वाले जलाशयों का जलस्तर भी इस समय निचले स्तर पर पहुंच जाता है। यदि जून के अंत तक भारी बारिश नहीं होती है, तो स्थानीय प्रशासन को पानी की कटौती जैसे कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। इसलिए मानसून के आने में हो रही देरी चिंता का विषय है।













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