Mumbai Property: मुंबई और पुणे में अपना घर का सपना होगा पूरा, महाराष्ट्र सरकार ने दी बड़ी सौगात
Mumbai Property: रियल एस्टेट सेक्टर को स्थिरता देने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेडी रेकनर (Ready Reckoner) दरों को अपरिवर्तित रखने की घोषणा की है। इसका सीधा लाभ घर खरीदारों और डेवलपर्स दोनों को मिलेगा, क्योंकि 1 अप्रैल 2026 से प्रॉपर्टी वैल्यूएशन के मानक पिछले वर्ष 2025-26 के स्तर पर ही बने रहेंगे।
सरकार के इस फैसले से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जो प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे हैं। रेडी रेकनर दरों में बढ़ोतरी न होने से स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज में अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि पिछले वर्ष मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (Mumbai Metropolitan Region) में इन दरों में औसतन 3.39% की वृद्धि की गई थी।

Mumbai Property: रियल स्टेट सेक्टर को मिलेगा बूस्ट
- रियल एस्टेट इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है। क्रेडाई-एमसीएचआई के पूर्व अध्यक्ष डोमिनिक रॉमेल ने बताया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में खासतौर पर इजरायल-ईरान तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ा है। ऐसे में यह निर्णय बाजार को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगा। नरेडको के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने इसे दूरदर्शी और समयानुकूल कदम बताया है। उनका कहना है कि रियल एस्टेट क्षेत्र लागत में उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। दरों को स्थिर रखना खरीदारों और डेवलपर्स दोनों के लिए फायदेमंद है।
Ready Reckoner Rates में नहीं किया गया बदलाव
- अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो रेडी रेकनर दरों में लगातार बदलाव होते रहे हैं। 2017-18 में इन दरों में औसतन 5.86% की वृद्धि हुई थी।
- 2020-21 में कोविड-19 महामारी के कारण यह वृद्धि घटकर 1.74% रह गई। इसके बाद 2022-23 में 4.81% की बढ़ोतरी लागू की गई, जो दो साल तक जारी रही। 2025-26 में भी विभिन्न क्षेत्रों में दरों में वृद्धि दर्ज की गई थी।
सरकार की आय पर नजर डालें तो प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से राजस्व में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2025-26 में राज्य को लगभग 60,568 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो तय लक्ष्य 63,500 करोड़ रुपये के करीब है। रेडी रेकनर दरें किसी भी क्षेत्र में प्रॉपर्टी की न्यूनतम सरकारी कीमत तय करती हैं, जिसके आधार पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज निर्धारित होते हैं। ऐसे में इन दरों को स्थिर रखना आम लोगों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।












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