मुंबई के बांद्रा में बड़ा हादसा: चॉल का हिस्सा ढहने से मची अफरातफरी, 7 के मलबे में फंसे होने की आशंका
Mumbai chawl collapse: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai) से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। शुक्रवार, 18 जुलाई तड़के शहर के पश्चिमी उपनगर बांद्रा में एक चॉल का हिस्सा अचानक भरभरा कर ढह गया। हादसे के वक्त चॉल में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई।
इस दर्दनाक हादसे में अब तक 12 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि कम से कम 7 लोगों के अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

सिलेंडर ब्लास्ट बना हादसे की वजह
मुंबई पुलिस ने प्रारंभिक जांच के हवाले से बताया कि चॉल ढहने की वजह सिलेंडर फटने की घटना हो सकती है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, चॉल के अंदर एक गैस सिलेंडर में विस्फोट हुआ, जिससे इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक जमींदोज हो गया। विस्फोट इतना तेज था कि आसपास के इलाके में भी इसकी आवाज सुनाई दी, जिसके बाद लोग घबराकर बाहर निकल आए।
12 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, अस्पताल में भर्ती
Bandra chawl collapse हादसे के बाद तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। दमकल विभाग, मुंबई पुलिस और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की टीमें मौके पर तुरंत पहुंचीं। अब तक 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। सभी घायलों को पास के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों की टीम लगातार इनकी निगरानी कर रही है।
7 लोग अब भी लापता, मलबे में खोज जारी
अधिकारियों ने बताया कि अब भी करीब सात लोग लापता हैं और आशंका है कि वे मलबे में फंसे हो सकते हैं। राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी है और बचावकर्मी अत्यधिक सावधानी से मलबा हटाकर लोगों को खोजने की कोशिश कर रहे हैं। हादसे की भयावहता को देखते हुए मौके पर बड़ी संख्या में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां, एंबुलेंस और बचाव टीमें तैनात की गई हैं।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन ने हालात पर काबू पाने के लिए BMC, मुंबई पुलिस और फायर ब्रिगेड को अलर्ट कर दिया। तीनों विभागों की टीमें मौके पर समन्वय के साथ काम कर रही हैं। पूरे इलाके को घेर लिया गया है ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए। मलबा हटाने के लिए विशेष उपकरणों और मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों देखा जा रहा है। चश्मदीदों के अनुसार, चॉल की हालत पहले से ही खराब थी, लेकिन कोई उचित मरम्मत या निरीक्षण नहीं कराया गया था। लोगों का आरोप है कि BMC की लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ है, क्योंकि ऐसी जर्जर इमारतों की नियमित जांच और मरम्मत की प्रक्रिया बेहद धीमी होती है।
प्रशासन की ओर से आश्वासन
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि राहत कार्य पूरा होने के बाद विस्तृत जांच की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, घायलों को हर संभव चिकित्सीय सहायता मुहैया कराई जा रही है और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है।
मुंबई जैसे महानगर में चॉलों की हालत पहले से ही चिंताजनक मानी जाती रही है। ऐसे में यह हादसा एक बार फिर इस ओर इशारा करता है कि जर्जर और पुराने भवनों की निगरानी और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को तेज करना समय की मांग है। इस हादसे ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा को लेकर भी एक गंभीर बहस को जन्म दिया है।












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