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Mumbai Hostage: ₹2 करोड़ के कर्ज ने खेला 17 मासूमों पर दांव, 3 घंटे तक सस्पेंस से भरे ऑपरेशन की इंसाइड स्टोरी

Mumbai Hostage Crisis: साल 2022 में यामी गौतम की एक फिल्म आई थी 'A Thursday' जिसमें एक महिला अपने साथ हुए अन्याय का बदला लेने के लिए प्ले स्कूल के बच्चों को बंधक बना लेती है। बिल्कुल इसी तरह का एक खौफनाक सीन मुंबई में तब देखने को मिला जब एक शख्स ने 17 मासूम बच्चों को एक स्टूडियो के अंदर बंधक बना लिया था।

मुंबई के पवाई इलाके ने बीते गुरुवार, 30 अक्टूबर को करीब तीन घंटे तक एक दिल दहला देने वाला दृश्य देखा।हवा में ज्वलनशील स्प्रे और एयरगन से लैस यह व्यक्ति बार-बार धमकी दे रहा था कि अगर पुलिस ने अंदर घुसने की कोशिश की, तो वह सभी को जला देगा।

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करीब तीन घंटे की टेंशन, लगातार बातचीत और बेहद सटीक ऑपरेशन के बाद मुंबई पुलिस ने सभी बच्चों को सकुशल बाहर निकाल लिया, जबकि आरोपी 50 वर्षीय रोहित आर्या की गोली लगने से मौत हो गई। लेकिन पुलिस के लिए ये ऑपरेशन इतना आसान भी नहीं था क्योंकि अंदर एक सनकी शख्स के हाथों में 17 बच्चों की जिंदगियां कैद थीं। आइए विस्तार से जानते हैं इस ऑपरेशन की इंसाइड स्टोरी....

कैसे शुरू हुआ खौफनाक होस्टेज कांड?

पुलिस के मुताबिक, यह घटना गुरुवार दोपहर 1:30 बजे शुरू हुई, जब पोवाई पुलिस स्टेशन को सूचना मिली कि महावीर क्लासिक बिल्डिंग में स्थित आरए स्टूडियो के अंदर बच्चों को बंधक बनाकर रखा गया है।

रोहित आर्या नामक व्यक्ति ने चार दिन पहले ही यह स्टूडियो किराए पर लिया था और खुद को एक फिल्ममेकर बताया था। उसने स्थानीय बच्चों को "वेब सीरीज के ऑडिशन" के बहाने बुलाया था। 10 से 15 साल के बीच उम्र वाले ये सभी बच्चे उसके जाल में फंस गए।

कैसे खुली पोल?

दोपहर 1 बजे के बाद जब बच्चों को बुलाए गए माता-पिता उन्हें बाहर आते नहीं देख पाए, तो उन्होंने स्टूडियो के बाहर चिंता जतानी शुरू की। कुछ समय बाद पास की बिल्डिंग के निवासियों ने खिड़की से बच्चों को रोते और मदद मांगते देखा - इसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस, क्यूआरटी (Quick Response Team), बम स्क्वॉड और फायर ब्रिगेड तुरंत मौके पर पहुंची।

रोहित आर्या की मांग - "मुझे ₹2 करोड़ चाहिए"

करीब 2:15 बजे आरोपी रोहित आर्या ने खुद का एक वीडियो जारी किया। वीडियो में उसने कहा, मैं आतंकवादी नहीं हूं... मैंने किसी गलत मकसद से ये काम नहीं किया। महाराष्ट्र शिक्षा विभाग मुझ पर ₹2 करोड़ का बकाया रखता है। मैंने उनके लिए स्वच्छता अभियान और शैक्षणिक फिल्में बनाईं, लेकिन पैसे नहीं मिले। अब मैं आत्महत्या करने से पहले जवाब चाहता हूं। आर्या का दावा था कि उसने राज्य सरकार की "माझी शाळा, सुंदर शाळा" परियोजना के तहत काम किया था।

होस्टेज ड्रामा की टाइमलाइन

  • 1:30 PM: पोवाई पुलिस को कॉल मिली कि बच्चों को आरए स्टूडियो में बंधक बनाया गया है।
  • 1:45 PM: क्यूआरटी, बम स्क्वॉड और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचे, बातचीत शुरू हुई।
  • 2:15 PM: रोहित आर्या ने वीडियो जारी किया और ₹2 करोड़ की मांग दोहराई।
  • 2:45 PM: बच्चों को खिड़की से रोते हुए देखा गया; आरोपी ने स्टूडियो को जलाने की धमकी दी।
  • 3:15 PM: दो पुलिस टीमों ने डक्ट लाइन से बिल्डिंग पर चढ़ाई की; एक टीम ने ग्लास वॉल काटी, दूसरी ने बाथरूम वेंट से एंट्री ली।
  • 4:30 PM: आरोपी ने आत्मसमर्पण से इनकार किया; पुलिस ने चेतावनी दी।
  • 4:35 PM: एंटी-टेरर सेल के अधिकारी अमोल वाघमारे ने एक गोली चलाई जो आर्या के सीने में लगी।
  • 4:45 PM: सभी 17 बच्चों और दो बड़ों को सकुशल बाहर निकाला गया; आरोपी अस्पताल में मृत घोषित।

पुलिस ने कैसे रचा 'ऑपरेशन रेस्क्यू'?

मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन बेहद सटीक और संवेदनशील था। आरोपी ने स्टूडियो को अंदर से बंद कर रखा था और सेंसर लगाए थे ताकि किसी की एंट्री का पता चल सके। पुलिस लगातार उससे बातचीत करती रही, ताकि उसका ध्यान बंटा रहे और दूसरी ओर दो टीमें धीरे-धीरे इमारत में घुस सकें।

एक टीम ने ग्लास वॉल काटी और दूसरी टीम बाथरूम वेंट के रास्ते अंदर पहुंची। जब आर्या ने आग लगाने की धमकी दी, तो पुलिस ने "न्यूट्रलाइजेशन फायर" का आदेश दिया। गोली लगने के बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सभी 17 बच्चे और 2 बुजुर्ग सुरक्षित निकाले गए। उन्हें सेवन हिल्स अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया और बाद में घर भेज दिया गया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा -"यह तीन घंटे की ऐसी जंग थी, जिसमें हर सेकंड कीमती था। हमारा पहला लक्ष्य बच्चों की सुरक्षा था, और हम उसमें सफल हुए।"

कौन था आरोपी रोहित आर्या?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, रोहित आर्या पुणे का रहने वाला था और पहले सरकारी परियोजनाओं से जुड़ा रहा था। उसने शिक्षा विभाग से भुगतान को लेकर कई बार प्रदर्शन भी किया था - यहां तक कि एक बार आज़ाद मैदान में भी धरना दिया था।

बताया जा रहा है कि वह एपिलेप्सी (मिर्गी) की बीमारी से भी जूझ रहा था और पिछले वर्ष एक प्रदर्शन के दौरान बेहोश हो गया था। मुंबई पुलिस का यह ऑपरेशन हाल के सालों में सबसे तेज़, जोखिमपूर्ण और सफल बचाव अभियानों में गिना जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया कि किस तरह आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव मिलकर समाज में त्रासदी का रूप ले सकते हैं।

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