महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने औद्योगिक अनुमति पत्रों की अनुमति और रिन्यूअल का आधा कर दिया समय
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए अनुमति (कंसेंट) अनुमोदन और नवीनीकरण की अवधि में 50% की महत्वपूर्ण कटौती की है। महाराष्ट्र सरकार ने अपनी 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' नीति के तहत औद्योगिक अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाया है। जिसके तहत महाराष्ट्र के रेड, ऑरेंज और ग्रीन रंग की श्रेणियों में आने वाले उद्योगों को बड़ी राहत मिली है। यह निर्णय उद्योग स्थापना, अनुमति प्रक्रियाओं और उनके नवीनीकरण को तेज़ और सरल बनाएगा।
केंद्र की 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और राज्य की 'विकसित महाराष्ट्र 2047' नीतियों के अनुरूप, MPCB ने हरित श्रेणी के उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है। अब इन प्रतिष्ठानों की स्थापना, संचालन और पिछली अनुमतियों के नवीनीकरण के लिए पूर्व-निर्धारित 30 दिनों की अवधि घटाकर मात्र 15 दिन कर दी गई है।

ऑरेंज कैटेगरी के उद्योगों के लिए भी कार्यप्रणाली में तेज़ी लाई गई है। जहां पहले उद्योग स्थापना के लिए अनुमति मिलने में 45 दिन लगते थे, अब यह अवधि घटकर 24 दिन रह गई है। इसी प्रकार, इन उद्योगों के संचालन या अनुमति के नवीनीकरण के लिए 60 दिनों को भी अब केवल 24 दिनों में पूरा किया जा सकेगा।
सबसे जटिल रेड कैटेगरी के उद्योगों को भी प्रक्रियात्मक लाभ प्राप्त हुए हैं। इन उद्योगों की स्थापना की अनुमति के लिए पहले 60 दिन, संचालन शुरू करने के लिए 90 दिन और अनुमति के नवीनीकरण के लिए 120 दिन का समय लगता था। अब इन सभी प्रक्रियाओं को केवल 40 दिनों के भीतर संपन्न करना होगा।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा उद्योगों की स्थापना, संचालन और अनुमति नवीनीकरण के समय में इस कटौती से राज्य की औद्योगिक प्रगति को एक बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा। यह पहल महाराष्ट्र में व्यापार-अनुकूल माहौल को मजबूत करेगी और निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
MPCB ने इससे पूर्व भी उद्योगों को राहत देने के लिए कदम उठाए थे। इनमें सफेद श्रेणी में 850 उद्योगों और नीली श्रेणी में अतिरिक्त 9 (कुल 17) उद्योग संवर्गों को शामिल करना शामिल है, जिससे औद्योगिक प्रतिष्ठानों को सुविधा मिली और नियामक जटिलता कम हुई थी।
इस ताजा सुधार के पीछे, बोर्ड के अध्यक्ष श्री सिद्धेश कदम की पहल और सदस्य सचिव (आईएएस) श्री एम. देवेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में गठित एक विशेष अध्ययन समिति का योगदान रहा। इस समिति ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों का दौरा कर वहां की अनुमति कार्यप्रणाली का गहन अध्ययन किया था।
समिति के अध्ययन से निष्कर्ष निकला कि महाराष्ट्र औद्योगिक प्रगति में अग्रणी राज्य भले ही है, लेकिन इसे और तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए प्रक्रियाओं में गति लाना अनिवार्य है। अन्य राज्यों की कार्यप्रणालियों का अवलोकन कर, बोर्ड ने उद्योगों को न्यूनतम समय में विभिन्न मंजूरी मिल सकें, इसके लिए अवधि घटाने का निर्णय लिया।
इस महत्वपूर्ण निर्णय पर विश्वास व्यक्त करते हुए, बोर्ड के सदस्य सचिव श्री एम. देवेंद्र सिंह (आईएएस) ने कहा,"अनुमति अनुमोदन में अब बेहद कम समय लगेगा, और फेसलेस ऑनलाइन कंप्यूटरीकृत प्रणाली के माध्यम से यह एक सफल कदम उठाया गया है। इससे राज्य में औद्योगिक निवेश को निश्चित रूप से बढ़ावा मिलेगा।"
वहीं, बोर्ड के अध्यक्ष श्री सिद्धेश कदम ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, "उद्योगों की भरभराटी के लिए आवश्यक अनुमतियां अत्यंत कम समय में प्रदान करने हेतु बोर्ड हमेशा पहल करता रहता है। उद्योगों के लिए 'उद्योग मित्र' नीति ही हमारा प्रमुख ध्येय है।"












Click it and Unblock the Notifications