मनी लॉन्ड्रिंग: डिप्टी सीएम अजित पवार बोले- कई एजेंसियों ने जांच की, लेकिन कुछ नहीं निकला
मुंबई, 2 जुलाई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्रि अजित पवार इन दिनों मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी संदेहास्पद भूमिका को लेकर वह विपक्ष के निशाने पर है। इस मामले में नया मोड़ उस समय आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महाराष्ट्र में सतारा के जरंदेश्वर सहकारी चीनी कारखाने (जरंदेश्वर एसएसके) की संपत्ति को जब्त कर लिया। ईडी के मुताबिक यह वही चीनी मिल है जिसका साल 2010 में एमएससीबी ने कम कीमत पर और उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना नीलामी कर दी थी। उस दौरान अजित पवार एमएससीबी के निदेशक मंडल के प्रमुख थे।

बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) घोटाला मामले की जांच में 65.75 करोड़ की शुगर मिल अटैच की गई है। दावा किया जा रहा है कि यह चीनी मिल डिप्टी सीएम अजित पवार की कंपनी से जुड़ी हुई है, यह उनकी पत्नी सुनेत्रा अजित पवार के नाम पर रजिस्टर्ड है। ईडी द्वारा चीनी मिल को अटैच करने पर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार की तरफ से भी पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा, 'एजेंसी को जांच करने का अधिकार है। पहले सीआईडी और एसीबी ने जांच की लेकिन कुछ नहीं निकला। ईओडब्ल्यू जांच भी चल रही है। हर तरफ से हुई जांच लेकिन कुछ सामने नहीं आया।'
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सूत्रों के मुताबिक चार याचिकाकर्ताओं द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर किए जाने के बाद महाराष्ट्र स्टेट कॉपरेटिव बैंक घोटाला सामने आया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि कई चीनी मिलों ने करोड़ों का कर्ज नहीं चुकाया था, जिसके बाद बैंकों ने मिलों को कुर्क कर उनकी नीलामी कर दी थी। नीलामी प्रक्रिया में मिलों को कई पदाधिकारियों को बेचा गया, जिसमें कुछ शीर्ष राजनेता भी शामिल थे। बताया जा रहा है कि अजीत पवार बैंकों के निदेशकों में से एक थे और उन्होंने नीलामी में कुछ मिलें खरीदी थीं।












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