'मराठी नहीं, तो परमिट नहीं', महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के लिए लागू हुआ सख्त नियम, मचा बवाल
Marathi language test for driver: महाराष्ट्र में खासकर मुंबई में मराठी भाषा को लेकर आए दिन लोगों के बीच विवाद देखने को मिलता है। एक फैसले के कारण अब ये विवाद और गहराता नजर आ रहा है! दरअसल, महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर में अब ऑटो और टैक्सी चलाना सिर्फ गाड़ी चलाने तक सीमित नहीं रहा-मराठी बोलना भी उतना ही जरूरी हो गया है। सरकार ने एक नया पायलट अभियान शुरू किया है, जिसमें ड्राइवरों की भाषा क्षमता की भी जांच हो रही है।
मीरा रोड और भायंदर इलाके में 12,000 से ज्यादा ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के परमिट और दस्तावेजों की जांच शुरू हो चुकी है। इस बार सिर्फ कागज नहीं, बल्कि ड्राइवरों की मराठी भाषा की समझ भी परखी जा रही है। इस अभ्यास का सबसे अहम पहलू एक अनिवार्य मराठी परीक्षा का शुभारंभ है।

अब देनी होगी मराठी की परीक्षा
अब ड्राइवरों को मराठी पढ़ना, लिखना और बोलना आना चाहिए। इसके लिए उन्हें छोटा गद्य लिखना होगा और मौखिक टेस्ट भी देना पड़ेगा। पहले जहां सिर्फ सर्टिफिकेट से काम चल जाता था, अब खुद अपनी स्किल दिखानी होगी।
क्यों लिया गया ये फैसला?
यह कदम लाइसेंस और परमिट जारी करने में अनियमितताओं को लेकर उठाई गई चिंताओं के बाद उठाया गया है, जिसके कारण परिवहन विभाग ने नियमों को सख्त किया है। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने बताया कि यह पहल उन शिकायतों के बाद शुरू की गई जिनमें उचित सत्यापन प्रक्रियाओं में खामियां उजागर हुई थीं।
नई प्रणाली ड्राइवरों के मराठी कौशल का सीधे मूल्यांकन करके पुराने तरीके से आगे बढ़ी है। पहले भाषा विशेषज्ञ का प्रमाण पत्र पर्याप्त माना जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब ड्राइवरों को अपनी दक्षता साबित करने के लिए छोटे गद्यांश लिखने होंगे और मौखिक परीक्षण से भी गुजरना होगा।
नियम क्या कहते हैं?
महाराष्ट्र मोटर व्हीकल नियम के नियम 24 के तहत मराठी भाषा का ज्ञान जरूरी है। 2019 में इसे और मजबूत किया गया था, ताकि ड्राइवर स्थानीय भाषा में यात्रियों और अधिकारियों से ठीक से बात कर सकें।
फेल हुए तो परमिट सस्पेंड
जो चालक इस परीक्षा में असफल होंगे या मानदंडों को पूरा नहीं करेंगे, उनके परमिट निलंबित किए जा सकते हैं। इस प्रकार, भाषा दक्षता अब अनुपालन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
कब तक चलेगा अभियान?
यह पूरा अभियान 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) तक चलेगा। इसके बाद रिपोर्ट तैयार होगी और अगर यह सफल रहा, तो पूरे राज्य में ऐसा नियम लागू हो सकता है।












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