'लड़की बहिन योजना' पर संजय राउत का बड़ा ऐलान, गरमाई सियासत
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने शनिवार को कहा कि महिलाओं के लिए "लड़की बहन" योजना महाराष्ट्र सरकार के लिए कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं बल्कि "यू-टर्न" होगी।
उन्होंने उल्लेख किया कि पिछली महाराष्ट्र सरकारों ने पहले ही कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं।जब उनसे पूछा गया कि क्या यह नई पहल महायुति सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगी।

तो राउत ने जवाब दिया, "लड़की बहन योजना सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित नहीं होगी, बल्कि यह सरकार के लिए एक यू-टर्न साबित होगी।" उन्होंने यह भी वादा किया कि अगर विपक्ष अक्टूबर-नवंबर में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में जीतता है तो वह इस योजना के तहत मासिक वजीफा 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर देंगे।
चुनावों पर संभावित प्रभाव
महायुति के सहयोगियों का मानना है कि इस नकद हस्तांतरण पहल से पैदा हुई सद्भावना महाराष्ट्र के चुनावों में उनकी संभावनाओं को बढ़ा सकती है। शनिवार को पुणे में इस योजना का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सुझाव दिया कि अगर उनका गठबंधन चुनावों में जीत हासिल करता है तो मासिक वजीफा दोगुना करके 3,000 रुपये किया जा सकता है।
इस योजना की शुरुआत रक्षाबंधन के त्यौहार के साथ हुई और इससे एक करोड़ से ज़्यादा महिलाओं को फ़ायदा मिलने की उम्मीद है। यह मध्य प्रदेश सरकार की "लाडली बहना योजना" की तर्ज़ पर बनाई गई है और 21 से 60 साल की उम्र की विवाहित, तलाकशुदा और बेसहारा महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक सहायता प्रदान करती है, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय सीमा 2.5 लाख रुपये है।
योजना का विवरण और विपक्ष का रुख
महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में करारी हार झेलने के कुछ महीने बाद शिवसेना-बीजेपी-एनसीपी सरकार ने "मुख्यमंत्री मांझी लड़की बहन" योजना शुरू की है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब वे आने वाले महीनों में विपक्षी महा विकास अघाड़ी के खिलाफ चुनौतीपूर्ण विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।
राउत ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी योजनाएं कभी बंद नहीं होतीं और एक सक्षम सरकार या प्रशासक ऐसा दृष्टिकोण नहीं अपनाएगा। उन्होंने अपनी पार्टी के सत्ता में आने पर वजीफा राशि बढ़ाने का अपना वादा दोहराया।
इस योजना का उद्देश्य उन महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है जो विशिष्ट मानदंडों के अंतर्गत आती हैं, ताकि उन्हें आवश्यक सहायता मिल सके। इस पहल के पीछे सरकार का उद्देश्य महिला मतदाताओं की वित्तीय ज़रूरतों को सीधे संबोधित करके उनका समर्थन हासिल करना है।
आगामी विधानसभा चुनाव यह बताएंगे कि क्या यह रणनीति महायुति के लिए सफल साबित होती है या फिर यह वास्तव में राउत द्वारा भविष्यवाणी के अनुसार "यू-टर्न" साबित होती है।












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