महाराष्ट्र के एक गांव ने 'बैलेट पेपर' के जरिए 'पुन:मतदान' करवाने की बनाई योजना, पुलिस ने लगाया कर्फ्यू
Maharashtra Elections 2024: महाराष्ट्र चुनाव परिणाम में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की सटीकता पर विपक्षी पार्टियां लगातार सवाल उठा रही हैं। वहीं सोलापुर जिले के मालशिरस तहसील के मरकडवाड़ी गांव के लोगों ने 3 दिसंबर को मतपत्रों का उपयोग करके एक अनोखे "पुन:मतदान" की योजना बनाई थी, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए 5 दिसंबर तक मार्कडवाडी में कर्फ्यू लगा दिया है।
पूरे क्षेत्र में 50 पुलिस अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। सोलापुर के अधीक्षक अतुल कुलकर्णी ने बताया "निषेधात्मक आदेश लागू हैं, अगर लोग फिर भी एक साथ आते हैं और कानून का पालन नहीं करते हैं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

जानें क्यों करवाना चाहते हैं पुन: मतदान
बता दें महाराष्ट्र चुनाव परिणामों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के उत्तमराव जानकर को मार्कडवाडी में भाजपा के राम सतपुते से अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा है। यहां पर 1,900 मतदाताओं में से सतपुते को 1,003 वोट मिले, जबकि जानकर को 843 वोट मिले।
यह परिणाम चौंकाने वाला था, क्योंकि गांव में जानकर का ऐतिहासिक प्रभुत्व था और उनका गढ़ माना जाता है। जानकर के मजबूत संबंधों और गांव के धनगर समुदाय उनके पक्ष में है। इसके बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा है।
गांव के एक निवासी ने अविश्वास और ग्राम पंचायत स्तर पर फिर से चुनाव के लिए अपील की थी लेकिन उसे खारिज कर दिया गया, जिसके बाद उत्तम जानकर ने सामूहिक रूप से स्व-संगठित मतपत्र मतदान करवाने का प्रस्ताव रखा।
वे लोगों में डर पैदा कर रहे हैं
उत्तम जानकर ने प्रशासनिक विरोध की परवाह किए बिना फिर से चुनाव कराने का ऐलान किया। इसके साथ ही ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया और गांव की पहल को रोकने के प्रशासन के प्रयासों की आलोचना की।उत्तम जानकर ले कहा "हम सिर्फ यह जांच कर रहे हैं कि वोट कहां गए, क्या ईवीएम में कोई गलती है और प्रशासन इस तरह की कवायद का विरोध क्यों कर रहा है। वे लोगों में डर पैदा कर रहे हैं, लेकिन कोई बात नहीं, चुनाव कराए जाएंगे।
भाजपा ने आरोप का दिया जवाब
वहीं दूसरी ओर सतपुते के एक भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक ने उनकी जीत का श्रेय उनकी योग्यता और गांव में उनके योगदान को दिया और ईवीएम के खिलाफ आरोपों को खारिज कर दिया। कार्यकर्ता ने जोर देकर कहा "सतपुते को योग्यता के आधार पर वोट मिले। वह इस गांव में धन लेकर आए और लोगों ने उसी आधार पर वोट दिया। इसका ईवीएम से कोई लेना-देना नहीं है।"
चुनाव करवाने का अधिकार सिर्फ चुनाव आयोग को है
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने गांव में फिर से चुनाव कराने की योजना को अनिवार्य रूप से प्रतीकात्मक बताया, क्योंकि चुनाव आयोग को चुनावों की देखरेख करने का संवैधानिक अधिकार है। अधिकारी ने कहा "संविधान के अनुसार, चुनाव आयोग को इन चुनावों को कराने का काम सौंपा गया है। यह अब एक दिखावटी अभ्यास के अलावा कुछ नहीं है। संदेह के मामले में उपलब्ध कानूनी उपाय चुनाव याचिका है।"












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