6 सांसदों को साथ लाकर शिंदे ने दिखाया दम, सीएम देवेंद्र फडणवीस की बढ़ी टेंशन
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मुंबई की सीटें हमेशा से सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र रही हैं। इस बार के चुनाव में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी 'शिवसेना' के वजूद को साबित करने के लिए एक बेहद अनोखा और आक्रामक दांव खेला है। जिसके बाद भाजपा के प्रतिनिधित्व वाले महायुति गठबंधन में मजबूत कर ली है।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी से बगागत कर छह सांसद 22 जून को एकनाथ शिंदे की सेना में शामिल हो गए। जिसके बाद राज्य में ही नहीं लोकसभा में भी शिंदे की पार्टी की की स्थिति मजबूत हो गई है। सोमवार को छह बागी सांसदों के शिवसेना में शामिल होने पर शिंदे ने दहाड़ते हुए कहा "छह टाइगर अब हमारी सेना में हैं।" इसके साथ ही एकनाथ शिंदे ने मंच से ऐसा ऐलान किया जिसने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महायुति की तीसरी सहयोगी पार्टी एनसीपी की टेंशन बढ़ा दी है।

एकनाथ शिंदे ने लोकसभा टिकटों का कर दिया ऐलान
दरअसल, सांसदों के शामिल होने के साथ ही एकनाथ शिंदे ने 2029 लोकसभा चुनाव के लिए इन सभी को टिकट देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने सांसदों से वादा किया कि उन्हें लोकसभा चुनाव मे शिवसेना का टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। जिसके बाद महायुति गठबंधन में नया विवाद खड़ा कर दिया है। क्योंकि एकनाथ शिंदे का ये बयान महायुति के भीतर भविष्य की सीट शेयरिंग और तालमेल को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है।
बीजेपी और एनसीपी के लिए क्यों बढ़ी चुनौती?
शिंदे की इस घोषणा से बीजेपी और एनसीपी दोनों के लिए असहज स्थिति बनती दिख रही है क्योंकि सीटों पर ये उद्धव की पार्टी छोड़कर ये सांसद सक्रिय हैं, उनमें से कई पर बीजेपी या एनसीपी का मजबूत प्रभाव माना जाता है। ऐसे में भविष्य में इन सीटों के बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों के बीच टकराव की संभावना बढ़ गई है।
महायुति में सीटों को लेकर नया समीकरण
धाराशिव सीट परभणी उद्धव गुट छोड़कर शिवसेना में शामिल हुए ओमराजे निम्बालकर की धाराशिव लोकसभा सीट महायुति में बीजेपी के पास है। अर्चना पाटिल ने भाजपा के टिकट पर 2024 में चुनाव लड़ा था। बागी सांसद संजय दीना पाटिल उत्तर पूर्व मुंबई लोकसभा सीट सांसद आए है ये भी सीट भाजपा के पास है। वहीं शिरडी सीट से बागी सांसद भाऊसाहेब वकचौरे शिवसेना में शमिल हुए हैं और मौजूदा शिवसेना सांसद सदाशिव लोखंडे का क्या होगा1 हिंगोली जैसी सीटों को लेकर भी स्थिति जटिल हो गई है। शिंदे की घोषणा ने इन सीटों को लेकर भाजपा की टेंशन को बढ़ा दिया है।
आने वाले समय में बढ़ सकता है राजनीतिक तनाव
कुल मिलाकर, एकनाथ शिंदे की इस रणनीति ने जहां उनके खेमे को मजबूत किया है, वहीं बीजेपी और एनसीपी के सामने 2029 के चुनाव से पहले सीट बंटवारे और गठबंधन संतुलन को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में महायुति के भीतर यह समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ता है।












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