महाराष्‍ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने मुंबई के वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक का नाम बदलकर वीर सावरकर सेतु रखा

महाराष्‍ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने मुंबई वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक का नाम बदलकर वीर सावरकर सेतु रखा

महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने बुधवार को दो बड़े ऐलान किए हैं। महाराष्‍ट्र सरकार ने अपने यहां के दो पुलों का नमा बदल दिया है।

महाराष्‍ट्र की शिंदे सरकार ने वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक का नाम बदलकर वीर सावरकर सेतु और मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक का नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति न्हावा शेवा अटल सेतु करने का ऐलान किया है।

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई के दोनों सेतु का नाम बदलने का ऐलान करते हुए कहा कि हमने वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक का नाम बदलकर वीर सावरकर सेतु और मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक का नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति न्हावा शेवा अटल सेतु कर दिया है।

इसके साथ ही सीएम शिंदे ने बताया कि उनकी सरकार ने महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना की सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है। जिसका लाभ राज्‍य के सभी नागरिकों को मिलेगा।

जानें महाराश्‍ट्र की राजनीति से वीर सावरकर का क्‍या है कनेक्‍शन

बता दें महाराष्‍ट्र में वीर सावरकर के नाम पर जमकर राजनीति होती रही है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना हमेशा वीर सावरकर के लिए भारत रत्‍न तक की मांग कर चुके है। वहीं जबसे कांग्रेस और एनसीपी का साथ उद्धव ठाकरे ने पकड़ा है तबसे सावरकर के प्रति प्रेम कम होता नजर आया वहीं उद्धव से बगावत कर महाराष्‍ट्र सरकार के सीएम बने एकनाथ शिंदे ने वीर सावरकर के सम्‍मान को और बढ़ाने का बीड़ा उठा रखा है।

2024 चुनाव से पहले शिंदे का जागा सावरकर के प्रति प्रेम

पहले उन्‍होंने वीर सावरकर के नाम पर गौरव यात्रा निकाली थी वहीं अब मुंबई के इस ऐतिहासिक पुल का नाम बदल कर वीर सावरकर के नाम पर कर दिया है। याद रहे 2024 में महाराष्‍ट्र में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसकी तैयारी में शिंदे और उनके गुट की शिवसेना जी जान से सत्‍ता में वापसी को लेकर जुटी हुई है। एकनाथ शिंदे ये जाताना चाहते हैं कि उनकी शिवसेना ही असली शिवसेना है जिसने बाला साहेब के सिद्धांतों को जिंदा रखा है।

कौन थे वीर सावरकर

वीर सावरकर जिन्‍हें विनायक दामोदर सावरकर के नाम से भी जाना जाता है वो एक हिंदू राष्ट्रवादी नेता और एक तेजतर्रार क्रांतिकारी थे, उनके नाम पर वर्सोवा ब्रांद्रा सी लिंक का नाम बदलकर सावरकर के नाम पर रखने का फैसला किया है।

वीर सावरकर को 1910 में गिरफ्तार किया गया था और 1911 में 50 साल की कैद की सजा सुनाई गई। वह 13 साल तक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सेलुलर जेल (काला पानी) की सजा काटते हुए जेल में बंद रहे और उन्होंने 1921 में 'एसेंशियल्स ऑफ हिंदुत्व' नाम की किताब भी लिखी थी।

अटल बिहारी वाजपेयी

वहीं देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी की बात की जाए जिसके नाम पर मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक का नाम बदलकर रखा जाए रहा है, वो देश के एक दो बार नहीं बल्कि तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। अटल बिहारी वाजपेयी 1996 से 2004 के बीच तीन कार्यकालों में भारत के प्रधान मंत्री रहे।

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