Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Ajit Pawar vs Sharad Pawar: भतीजे ने वो ही किया जो 45 साल पहले चाचा ने कांग्रेस के साथ किया था

Ajit Pawar vs Sharad Pawar: रविवार को महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को तब मिला जब एनसीपी के कद्दावर नेता कहे जाने वाले अजीत पवार ने 18 विधायकों के साथ एनसीपी से अलग होकर एनडीए के साथ हाथ मिला लिया। जिसके बाद एनीसीपी में खलबली मच गई। अब अजीत पवार राज्य के डिप्टी सीएम बन चुके हैं तो वहीं पार्टी के टूटने से तिलमिलाए राजनीति के कद्दावर नेता शरद पवार ने आज बीजेपी को खुले तौर पर चुनौती दी है।

 Ajit Pawar vs Sharad Pawar:

उन्होंने सतारा में समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि 'आज हम सभी को एकजुट रहने की जरूरत है, हम बीजेपी को उसकी जगह दिखाकर ही दम लेंगे।' राजनीति की बिसात पर शह औऱ मात के इस खेल में तो फिलहाल अजीत पवार ही पावरफुल दिख रहे हैं लेकिन पवार राजनीति के पुराने खिलाड़ी और बाजी पलटने में माहिर कहे जाते हैं।

अब महाराष्ट्र की राजनीति क्या मोड़ लेगी?

साल 2019 में भी अजीत पवार अपने चाचा से रूठे थे लेकिन मात्र तीन दिन के अंदर ही उनके चाचा ने उन्हें मना लिया था लेकिन इस बार बात ज्यादा गंभीर हो गई है। अब महाराष्ट्र की राजनीति क्या मोड़ लेगी, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन यहां आपको हम ये जरूर बता दें कि 2 जुलाई को जूनियर पवार यानी कि अजीत पवार ने वो ही किया जो उनके राजनीतिक गुरु और चाचा जी यानी कि शरद पवार ने आज से 45 साल पहले किया था।

भतीजे ने चली चाचा वाली चाल

आपको बता दें कि राजतीनिक का ककहरा अपने चाचा शरद पवार से सीखने वाले अजीत ने वो ही चाल चली जो उनके गुरुदेव शरद पवार ने साल 1978 में चली थी और सीएम वसंतदादा पाटिल के खिलाफ बगावत कर दी थी। पवार भी पार्टी के 40 विधायको को लेकर कांग्रेस से अलग हो गए थे, जिससे कि पाटिल सरकार गिर गई थी और फिर शरद पवार Progressive Democratic Front से सीएम बने थे।

याद आया गुजरा जमाना

मालूम हो कि इमरजेंसी के बाद जनता में कांग्रेस के लिए काफी गुस्सा था। ऐसे में जब महाराष्ट्र में चुनाव होने को हुए तो पार्टी दो ग्रुप में बंट गई थी। एक ग्रुप था कांग्रेस (I) यानी कि इंदिरा कांग्रेस और दूसरा दल था कांग्रेस ( ओ), पवार कांग्रेस (ओ) का हिस्सा थे। चुनाव दोनों ने अलग-अलग होकर लड़ा लेकिन किसी को बहुमत नहीं मिला। तब कांग्रेस (I) को 62 और कांग्रेस ( ओ) 69 सीटें मिली थीं।

वसंतदादा ने सीएम की कुर्सी संभाली

लेकिन सबसे ज्यादा सीट जनता पार्टी ( 99 सीटें) के हिस्से आई थी, जिसे रोकने के लिए दोनों गुट फिर से एक हुए और फिर महाराष्ट्र में वसंतदादा पाटिल के समर्थन में गठबंधन में सरकार बनी और वसंतदादा ने सीएम की कुर्सी संभाली। इस पार्टी में उद्योग मंत्री शरद पवार थे जबकि डिप्टी सीएम का पद कांग्रेस (I) के नाशिकराव को मिला था, जो लगातार पार्टी में परेशानी खड़ी कर रहे थे।

पवार ने 40 विधायकों संग की थी बगावत

नाशिकराव और पवार के मतभेद की खबरें आने लगी थीं लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था पवार पार्टी को तोड़ सकते हैं और सरकार बनने के मात्र चार महीने के अंदर ही पवार ने चालीस विधायकों के साथ बगावत कर दी और पार्टी छोड़ दी।

38 साल में पवार बने थे राज्य के मुख्यमंत्री

इसके बाद वो Progressive Democratic Front का हिस्सा बने और सीएम पद की शपथ ली। जिस वक्त पवार सीएम बने थे उस वक्त उनकी उम्र 38 साल थी। वो देश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने थे।

पुराना इतिहास याद आया

तो आज एक बार फिर से इतिहास दोहराया गया है और उनके चेले अजीत पवार ने वहीं 45 साल पहले वाली चाल चली है। अब देखते हैं कि उनकी ये चाल उन्हें अब कहां तक लेकर जाती है और शरद पवार का अगला कदम क्या होगा?

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+