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निकाय चुनाव से पहले शरद पवार ने मारा NCP-SP का मॉस्‍टर स्‍ट्रोक, BJP और अन्‍य पार्टियों को क्‍या होगा नुकसान?

Maharashtra local body elections: महाराष्‍ट्र में निकाय चुनाव की तारीख का ऐलान चुनाव आयोग ने कर दिया है।निकाय चुनाव को लेकर जहां सत्‍तारूढ़ भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर तनातनी सुलझाने में जुटी हुई है। वहीं इस सबके बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के अध्यक्ष शरद पवार ने निकाय चुनाव को लेकर बड़ी चाल चल दी है।

एनसीपी-शरद पवार प्रमुख शरद पवार ने कोर कमेटी की बैठक में पार्टी विधायकों और सांसदो को निकाय चुनाव को ऐसा निर्देश दिया है, जो चुनाव में भाजपा और अन्‍य सहयोगी पार्टियों के लिए बड़ी मु‍सीबत खड़ा कर सकता है।

Sharad Pawar

निकाय चुनाव को लेकर शरद पवार ने चल दी ये चाल?

दरअसल, शरद पवार ने अपनी पार्टी की बैठक में विधायकों और सांसदों को निर्देश दिया है कि महाराष्‍ट्र निकाय चुनावों में सिर्फ मूल रूप से ओबीसी उम्मीदवारों को ही मौका दिया जाए। यदि ऐसे उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं, तो केवल वैकल्पिक कुनबी प्रमाणपत्र धारकों को एनसीपी एसीपी की ओर से चुनाव मैदान में मुकाबले के लिए उतारा जाए।

क्‍यों है शरद पवार का ये मॉस्‍टर स्‍ट्रोक?

बता दें हैदराबाद गजट के लागू होने के बाद मराठा समुदाय के लिए ओबीसी आरक्षण का रास्‍ता साफ हो गया है और महाराष्‍ट्र का ओबीसी समुदाय इस गजट का कड़ा विरोध कर रहा है। शरद पवार के इस कदम को निकाय चुनावों में एक 'मास्टरस्ट्रोक' माना जा रहा है, क्‍योंकि ओबीसी समुदाय को निकाय चुनाव में मौका देकर पवार की पार्टी ओबीसी वोट बैंक पर कब्जा जमा सकती है।

न्‍यूज 9 की रिपोर्ट के अनुसार पिछली बैठक में एनसीपी-शरद पवार गुट ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी उम्‍मीदवारों के साथ अधिक से अधिक युवा और नए उम्मीदवारों को अवसर देने का निर्णय लिया था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति पार्टी को कितना लाभ पहुंचाती है। नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के लिए मतदान 2 दिसंबर को होगा, जबकि मतगणना 3 दिसंबर को निर्धारित है।

हैदराबाद गजट क्या है?

आजादी से पहले भारत में कई रियासतें थीं, जिनमें से एक थी हैदराबाद रियासत, जिस पर निज़ाम का शासन था।
इस रियासत के अधीन आज के महाराष्ट्र के मराठवाड़ा के 8 जिले आते थे -औरंगाबाद, बीड, परभणी, नांदेड, लातूर, हिंगोली, जालना और उस्मानाबाद।

इसलिए मराठवाड़ा के सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक नियम निज़ाम की सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों और आदेशों के अधीन थे।

1918 का "हैदराबाद गजट"

1918 में निज़ाम सरकार ने एक अधिसूचना (Notification) जारी की थी, जिसमें "कुनबी" या "कृषक" जाति को
"सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (Backward Class)" माना गया था। यह आदेश हैदराबाद स्टेट गजट में प्रकाशित हुआ था - इसलिए इसे "हैदराबाद गजट" कहा जाता है।

  • महाराष्ट्र में इसका महत्व

  • 1948 में हैदराबाद रियासत का भारत में विलय हुआ और 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के बाद मराठवाड़ा क्षेत्र महाराष्ट्र में शामिल हुआ।
  • इस वजह से मराठवाड़ा के कई समुदाय यह तर्क देते हैं कि चूंकि हमारे पूर्वज हैदराबाद रियासत के नागरिक थे और वहाँ कुनबी जाति को पिछड़ा वर्ग माना गया था, इसलिए महाराष्ट्र सरकार को भी उसी "हैदराबाद गजट" को मान्यता देनी चाहिए।
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