Maharashtra: शादी के कार्ड पर छपवानी होगी दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि, क्यों लागू किया जा रहा ये नियम?
Mandatory DOB on Wedding Card: महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार राज्य सरकार एक नया और कड़ा प्रशासनिक कदम उठाने जा रही है। जिसके तहत अब राज्य में शादी के कार्ड पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि (Date of Birth) अनिवार्य रूप से छपवानी पड़ेगी। अगर नियम का पालन नहीं किया गया तो सख्त कानूनी कार्रवाई भी होगी। इतना ही नहीं प्रिटिंग प्रेस और मैरिज हॉल की भी इस मामले में कानूनी जवाबदेही होगी।
महाराष्ट्र सरकार क्यों लागू कर रही ये नियम?
महाराष्ट्र सरकार महाराष्ट्र में बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक कुरीति पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए ये नया और अनोखा नियम लागू करने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य राज्य में नाबालिगों की शादियों को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है।

अदिति तटकरे ने बताया क्या होगा लाभ?
इस अहम योजना की जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने विधानसभा में दी। उन्होंने भाजपा विधायक अतुल भातखलकर द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि प्रशासन इस नए नियम को कानूनी रूप देकर लागू करने की व्यावहारिकताओं की जांच कर रहा है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से विवाह के समय वर-वधू की सही उम्र की जांच करना काफी आसान हो जाएगा।
राजस्थान मॉडल की तर्ज पर काम करेगी सरकार
राजस्थान के मॉडल पर महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ये नियम लागू कर रही है। राजस्थान के कई क्षेत्रों में इस नियम को लागू किए जाने के बाद बाल विवाह के मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। राजस्थान के इसी मॉडल का बारीकी से स्टडी करने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने भी इस दिशा में ठोस कदम आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
कैसे काम करेगा ये नया नियम?
इस व्यवस्था के तहत, जब भी कोई परिवार शादी के कार्ड छपवाने के लिए प्रिंटिंग प्रेस से संपर्क करेगा, तो उन्हें वर और वधू दोनों के कानूनी आयु प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे। प्रमाण पत्रों में दर्ज जन्मतिथि को निमंत्रण पत्र पर विशिष्ट रूप से प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। इससे न केवल परिवार बल्कि विवाह से जुड़ने वाले रिश्तेदारों और स्थानीय नागरिकों को भी वर-वधू की असल उम्र का पता चल सकेगा।
प्रिंटिंग प्रेस और मैरिज हॉल की भी होगी कानूनी जवाबदेही
प्रस्तावित नियमों के दायरे में केवल वर-वधू के अभिभावक ही नहीं आएंगे, बल्कि विवाह के आयोजन से जुड़े अन्य व्यावसायिक संस्थान भी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। शादी के कार्ड छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस के मालिक, विवाह स्थल के संचालक यानी मंगल कार्यालय या मैरिज हॉल के मैनेजमेंट की भी कानूनी जवाबदेही तय की जाएगी। यदि किसी शादी में नाबालिग युवक या युवती की शादी का मामला सामने आता है, तो इन सभी संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
प्रिटिंग प्रेस और मैरिज हाल के लिए क्या होंगे नियम?
नए नियमों के तहत प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को शादी का कार्ड छापने से पहले वर-वधू के जन्म प्रमाण पत्र या अन्य सरकारी पहचान पत्रों की प्रतियां अपने पास सुरक्षित रखनी होंगी। इसी तरह मैरिज हॉल के मैनेजमेंट को बुकिंग के समय ही आयु संबंधी प्रमाणपत्रों की पुष्टि करनी होगी। इससे शादियों के गैर-कानूनी रजिस्ट्रेशन और अवैध शादियों पर पूरी तरह रोक लगाने में मदद मिलेगी।
बाल अधिकार आयोग की सिफारिश
महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल विवाह रोकने के लिए शादी के कार्ड पर दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि अनिवार्य रूप से छापने की सिफारिश की है। सरकार का मानना है कि इससे उम्र का सत्यापन आसान होगा और नाबालिगों की शादी पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
जांच में मिलेगी आसानी
भारत में विवाह के लिए लड़कियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में बाल विवाह के मामले सामने आते हैं। शादी के कार्ड पर जन्मतिथि दर्ज होने से प्रशासन, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम सेवकों और पुलिस को संदिग्ध मामलों की पहचान व जांच करने में आसानी होगी।
महाराष्ट्र के किन क्षेत्रों में बाल विवाह आज भी है बड़ी चुनौती?
महाराष्ट्र के कुछ जिलों, विशेष रूप से मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह की गंभीर सामाजिक समस्या आज भी चुनौती बनी हुई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, कमजोर आर्थिक स्थिति और शिक्षा के अभाव के चलते लोग शादियों में कानून की अनदेखी कर देते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार अब चौतरफा प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करना चाहती है।














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