Maharashtra: बारामती में चाचा अजित पवार के सामने युगेंद्र पवार के चुनाव लड़ने की चर्चा, जानिए सियासी समीकरण
Maharashtra Assembly Elections 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं। बारामती में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार और उनके भतीजे युगेंद्र पवार के बीच संभावित मुकाबले की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने अभी 20 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। लेकिन बारामती सहित विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा जारी है।
32 वर्षीय युगेंद्र शरद पवार के भतीजे और अजित पवार के भाई श्रीनिवास पवार के पुत्र हैं। युगेंद्र ने बोस्टन की नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक किया है और पारिवारिक राजनीति में गहरी रुचि रखते हैं। बारामती जो पारंपरिक रूप से पवार परिवार का गढ़ रहा है। हाल ही में पारिवारिक खींचतान का केंद्र बना है। जुलाई 2023 में अजित पवार के बगावत के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और सुप्रिया सुले के बीच लोकसभा चुनावी मुकाबला भी देखा गया था। जिसमें सुनेत्रा को हार का सामना करना पड़ा था।

हालांकि अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा फिलहाल सत्तारूढ़ महायुती गठबंधन का हिस्सा है। लेकिन उन्होंने अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। दूसरी ओर युगेंद्र अपने राजनीतिक करियर की तैयारी शरद पवार के मार्गदर्शन में कर रहे हैं। जिसका संकेत सितंबर में बारामती में स्वातंत्र्य यात्रा की शुरुआत से मिलता है। युगेंद्र शरद पवार द्वारा स्थापित विद्या प्रतिष्ठान के कोषाध्यक्ष भी हैं।
लोकसभा चुनाव में युगेंद्र का सक्रिय प्रचार
पिछले लोकसभा चुनाव में युगेंद्र सुप्रिया सुले के लिए प्रचार कर रहे थे। जबकि उनके पिता श्रीनिवास पवार महायुति सरकार में शामिल होने पर अजित पवार की आलोचना कर रहे थे। नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में अजित पवार बारामती से फिर चुनाव लड़ेंगे या नहीं। इस पर कयास लगाए जा रहे थे। राकांपा के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने हाल ही में इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि अजित पवार अपनी परंपरागत सीट से ही चुनाव लड़ेंगे।
जब युगेंद्र से बारामती में अजित पवार की जगह लेने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सीधे जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि मुझे किसी की जगह लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है और न ही मैं किसी का विरोध करना चाहता हूं। हालांकि उन्होंने यह संकेत दिया कि वह चुनावी मैदान में हो सकते हैं। उन्होंने शरद पवार के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर करते हुए कहा कि वह अपने दादा को छोड़कर नहीं जा सकते।
युगेंद्र ने शरद पवार के साथ अपनी चर्चा की
युगेंद्र ने एक मराठी न्यूज पोर्टल को बताया कि उनकी उम्मीदवारी का फैसला शरद पवार और बारामती की जनता करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वातंत्र्य यात्रा का उद्देश्य बारामती के निवासियों के साथ फिर से जुड़ना और शरद पवार की विचारधारा को मजबूत करना था। उन्होंने कहा कि स्वाभिमानी बारामती के लोग पवार साहेब के साथ जो हुआ। उसे पसंद नहीं कर रहे थे।
हालांकि युगेंद्र और शरद पवार के बीच उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है। लेकिन युगेंद्र ने संकेत दिया कि वह शरद पवार के आगामी बारामती दौरे के दौरान इस मुद्दे पर बात करेंगे। इस बीच राकांपा के कार्यकर्ता लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई रणनीतियों की तर्ज पर स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित कर रहे हैं।
बारामती में राजनीतिक माहौल अभी भी गरम
युगेंद्र ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान जो राजनीतिक भावना थी। वह अभी भी बारामती में मजबूत है। उन्होंने कहा कि अब डर की भावना समाप्त हो गई है और लोग आगे आ रहे हैं। यह बयान देते हुए उन्होंने अपने चाचा अजित पवार पर परोक्ष रूप से निशाना साधा। पिछले लोकसभा चुनाव में बारामती लोकसभा क्षेत्र के छह में से पांच विधानसभा क्षेत्रों में सुप्रिया सुले ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाई थी और 1.50 लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्हें 2019 के मुकाबले 45,000 वोट ज्यादा मिले। जिससे उनका कुल वोट प्रतिशत 7,32,312 हो गया।
बारामती का यह राजनीतिक घटनाक्रम आगामी चुनावों में पवार परिवार के आंतरिक संघर्ष और महाराष्ट्र की राजनीति में इसके प्रभाव को रेखांकित करता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि युगेंद्र पवार के राजनीतिक कदम किस दिशा में जाते हैं और क्या यह अजित पवार के नेतृत्व को चुनौती दे सकते हैं या नहीं।












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