महाराष्ट्र में कांग्रेस और MVA की करारी हार के बाद चल रही है दिलचस्प मुहिम, रोचक हैं कुछ दलील!
Maharashtra Election result 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के जो ऐतिहासिक नतीजे आए हैं, वह लगता है कि हारने वाले राजनीतिक दलों की ही नहीं, उनके विचारों के कथित समर्थकों की उम्मीदों पर भी पानी फेर चुके हैं। वे नतीजे स्वीकार नहीं करने के लिए एक से बढ़कर एक दलीलें गढ़ रहे हैं। नए-नए तर्क लेकर आ रहे हैं। जिन सवालों को चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट से बार-बार हल किया जा चुका है, घुमा-फिरा कर उन्हीं मुद्दों को उठाकर फिर से सनसनी पैदा करने की कोशिशें होती दिख रही हैं।
महाराष्ट्र के चुनाव परिणामों से मायूस लोगों को फिर से ईवीएम में बहुत बड़ी खामियां नजर आने लगी हैं। कुछ को अब चुनाव की घोषणा से पहले सत्ताधारी गठबंधन की ओर से शुरू किए गए कल्याणकारी योजनाएं खटकने लगी हैं। लेकिन, मजे की बात है कि जिन प्रश्नों का संविधान के संरक्षक के रूप में सुप्रीम कोर्ट बार-बार जवाब दे चुका है, फिर से उन्हीं मुद्दों को संदिग्ध दिखाने के प्रयास चल रहे हैं।

'संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा' के लिए भूख हड़ताल
मसलन, पुणे के एक सोशल वर्कर बाबा अधव कहते हैं,'चुनाव से पहले वोटरों को पैसे और चीजों के वितरण पर भारतीय चुनाव आयोग की ओर से रोक नहीं लगाई गई।' उन्होंने तो 'संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा' के लिए भूख हड़ताल करने का एलान तक भी कर दिया।
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अधव का दावा है कि वह 1952 से ही चुनाव देख रहे हैं और उनका हिस्सा रहे हैं। वे कहते हैं, 'लेकिन, मैंने कभी इतना जबरदस्त भ्रष्टाचार नहीं देखा। चुनाव से ठीक पहले पैसे बांटने के लिए योजनाओं की घोषणा करना उनमें से एक है, जिसपर चुनाव आयोग की ओर से कोई आपत्ति नहीं की गई।'
जनता भी चुनाव नतीजों से असहमत-ऐक्टिविस्ट
असीम सरोडे नाम के एक और ऐक्टिविस्ट और वकील भी हैं, जिन्हें नतीजें को लेकर बहुत संदेह है और उनका दावा है कि ईवीएम हैकिंग की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। उनका कहना है, 'जो भी राजनीतिक दल चुनाव जीते या हारे, ईवीएम हमेशा से संदेह के घेरे में है। शुरू में राजनीतिक नेताओं की ओर से ही ईवीएम के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए, लेकिन अब जनता भी चुनाव नतीजों से असहमत होने लगी है।'
बैलेट पेपर वाले 'बूथ लूट' के जमाने में वापसी की मुहिम!
सरोडे का दावा है कि अंदर के बेईमान लोग और अपराधी राजनीतिक फायदे के लिए ईवीएम से छेड़छाड़ कर सकते हैं। ईवीएम के प्रति यह नकारात्मकता कुछ राजनीतिक दलों की ही तरह है, जिन्हें चुनावों में मायूसी हाथ लगी है। ये पार्टियां अब बैलेट पेपर के जमाने में वापसी की मुहिम चला रही हैं।
जबकि, मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर ईवीएम पर संदेह जताने वाली याचिका न सिर्फ खारिज कर दी है, बल्कि साफ तौर पर कह दिया है कि जब हार जाते हैं,तभी ईवीएम से दिक्कत होने लगती है और जब जीतते हैं तो ईवीएम से कोई शिकायत नहीं रहती।
एमवीए का महायुति पर ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप
महाराष्ट्र चुनाव में हारने वाले महा विकास अघाड़ी ने पुणे में एक प्रेस कांफ्रेंस करके महायुति पर ईवीएम से 'छेड़छाड़' का आरोप लगाया है। इनकी मांग है कि आने वाले चुनावों से बैलेट पेपर की ओर लौट चला जाए।
हारे तो कह दिया नतीजे मानते ही नहीं!
शरद पवार की एनसीपी (एसपी) के पुणे के नेताओं ने अन्य एमवीए नेताओं के साथ यहां तक कह दिया है कि वह इस चुनाव नतीजे को मानते ही नहीं है।
हारते-हारते बचे कांग्रेस नेता बैलेट पेपर के लिए चलाएंगे हस्ताक्षर अभियान
वहीं अपनी सीट मुश्किल से बचाने वाले महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने बैलेट पेपर से चुनाव करवाने के लिए एक राज्य व्यापी हस्ताक्षर अभियान चलाने का एलान किया है। बाद में यह अपनी मांगों को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के सामने रखेंगे।
पटोले ने कहा, 'जनता को लगता है कि उनके वोट का दुरुपयोग हो रहा है। कांग्रेस एक राज्य व्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू करेगी। राहुल गांधीजी एक राष्ट्रीय मार्च की गुवाई करेंगे, जिसमें बैलैट पेपर से चुनाव का आह्वान किया जाएगा।'
दो सीटों पर आए बराबर वोट तो ईवीएम दोषी!
उधर कराड नॉर्थ और पाटन में चुनाव हारने वाले दो निकटतम प्रतिद्वंद्वियों को ईवीएम पर इसलिए शक है कि उन्हें मिलने वाले वोट बराबर हैं। मसलन, कराड नॉर्थ में बीजेपी से हारने वाले एनसीपी (एसपी) के बालासाहेब पाटिल को 90,935 वोट मिले हैं।
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इसी तरह से पाटन में शिवसेना से हारने वाले निर्दलीय प्रत्याशी और एनसीपी (एसपी) के बागी सत्यजीत पटनाकर को भी 90,935 ही वोट आए हैं। हालांकि, दो अलग-अलग सीटों पर इन दोनों ही उम्मीदवारों की हार का मार्जिन क्रमश: 43,691 और 34,824 वोट है। लेकिन, इन्हें इस वजह से ईवीएम पर संदेह हो रहा है कि दो सीटों पर हारने वालों को बराबर संख्या में ही वोट कैसे मिल सकते हैं?












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