Maharashtra Elections 2024: मुस्लिम वोट के पांच दावेदार! किसे लग सकता है तगड़ा झटका?
Maharashtra Chunav 2024: महाराष्ट्र में किसी भी दल से संसद में कोई भी मुस्लिम जनप्रतिधि नहीं है। मौजूदा विधानसभा में भी उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं हासिल है। लेकिन, जहां तक मुसलमान वोट की बात है तो इस बार के विधानसभा चुनावों में कम से कम पांच-पांच दल और गठबंधन मुस्लिम वोट पाने के उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब यह मुसलमानों को तय करना है कि वह 20 नवंबर को किसी एक की तरफ ही झुककर मतदान करेंगे या फिर इसबार महाराष्ट्र में मुस्लिम वोट भी बिखर जाएंगे।
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों की घोषणा से थोड़े पहले राज्यपाल इदरिस नाइकवाड़ी को अपने विशेष कोटे से विधान परिषद में मनोनीत नहीं करते तो वहां भी कोई मुस्लिम प्रतिनिधि नहीं था। 2019 के विधानसभा चुनावों में भी 288 सीटों में से सिर्फ 10 मुस्लिम विधायक ही चुनकर विधानसभा तक पहुंचे थे।

महाराष्ट्र में करीब 12% मुसलमान, लेकिन प्रतिनिधित्व का अकाल
2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य में मुसलमानों की आबादी 12 फीसदी (11.54%) से थोड़ा कम है। लेकिन, उनकी शिकायत रही है कि राजनीतिक दल उनसे वोट तो लेते हैं, लेकिन जब उन्हें उचित प्रतिनिधित्व देने की बारी आती है तो हाथ पीछे खींच लेते हैं। इस साल के लोकसभा चुनावों में 48 सीटों में भी एक भी मुस्लिम नेता चुनाव नहीं जीता।
एमवीए मुस्लिम वोट का सबसे बड़ा दावेदार
इस बार के विधानसभा चुनावों में पांच-पांच दल और गठबंधन मुस्लिम वोटों की आस में बैठे हैं। विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA) खुद को इनके वोट का सबसे बड़ा दावेदार मानता है।
लेकिन, लोकसभा चुनावों में इसने एक भी मुसलमान को टिकट तक नहीं दिया था। दूसरे दावेदार में हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) है। इसने इसबार दो दर्जन से अधिक प्रत्याशी खड़े किए हैं, जिसमें कई हिंदू भी हैं।
प्रकाश अंबेडकर की VBA ने भी ठोका मुस्लिम वोट पर दावा
तीसरे दावेदारों में वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) है, जिसे 2019 के विधानसभा चुनावों में 6.92% वोट मिले थे। लेकिन, इस बार के लोकसभा चुनावों में उसका वोट शेयर घटकर मात्र 2.77% रह गया।
वीबीए के चीफ प्रकाश अंबेडकर ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया है कि लोकसभा चुनावों में 'संविधान पर संकट' को देखते हुए दलितों और मुसलमानों ने एमवीए को वोट दे दिया था। लेकिन, इस बार ओबीसी के 'आरक्षण को बचाने' के लिए वीबीए को वोट करेंगे।
वीबीए ने 2019 के लोकसभा चुनावों में एआईएमआईएम से गठबंधन भी किया था, लेकिन अब अंबेडकर कहते हैं, 'AIMIM ईमानदार पार्टी नहीं है, वह भाग गई। हम किसी संगठन के माध्यम से नहीं, बल्कि मुसलमानों के साथ सीधे संबंध रखेंगे। हमने 20 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं और पिछले 70 वर्षों में विधानसभा चुनावों में यह सबसे ज्यादा है।'
मराठा आंदोलनकारियों को भी चाहिए मुस्लिम वोट
महाराष्ट्र में मुसलमान वोट के दावेदारों में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन चलाने वाले मनोज जारांगे पाटिल भी शामिल हो गए हैं। वह इस चुनाव में मराठा, मुस्लिम और दलितों का समीकरण बिठाकर चुनावी गोटी सेट करने में लगे हैं। हालांकि, नामांकन की तारीख खत्म हो चुकी है, लेकिन, वह रणनीतिक तौर पर 31 अक्टूबर को कोई बड़ा एलान कर सकते हैं।
उनका कहना है, 'मैं एक प्रभावी चुनावी समीकरण बनाने की कोशिश कर रहा हूं। कुछ धार्मिक (मुस्लिम) नेता मराठा, मुस्लिम और दलितों के बीच समीकरणों पर चर्चा करने के लिए दूर-दूर से अंतरवाली सारथी का दौरा करने वाले हैं। उन्हें प्राइवेट चॉपर की इजाजत नहीं मिल रही है, लेकिन हमें कल (बुधवार) तक की उम्मीद है।'
महायुति गठबंधन भी डाल रहा है मुस्लिम वोट बैंक पर डोरे
मुस्लिम वोट के पांचवां दावेदार सत्ताधारी महायुति गठबंधन के दल भी हैं। जिस तरह से आखिरी वक्त में अजित पवार की एनसीपी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक को भाजपा के विरोध के बावजूद टिकट दिया है, उससे लगता है कि वह मुसलमानों में पार्टी के जनाधार को बरकरार रखने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में महायुति सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल इदरिस नाइकवाड़ी को उच्च सदन में मनोनीत भी कर चुके हैं।
अब यह 23 नवंबर को मालूम पड़ेगा कि मुसलमानों ने एकजुट होकर किस पर भरोसा जताया है और किसे झटका दिया है।












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