Maharashtra Election: क्या चुनाव जिताने वाली बीजेपी की इस रणनीति की MVA के पास कोई काट है?
Maharashtra Chunav: वित्तीय तौर पर मजबूत दो महत्वपूर्ण राज्यों तेलंगाना और कर्नाटक में चूकने के बाद भाजपा किसी भी कीमत पर महाराष्ट्र को अपने हाथ से नहीं निकलने देना चाहती है। प्रदेश की कमान उसने भले ही शिवसेना को दे रखी है और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई में सरकार चला रही है, लेकिन सरकार में वापसी की पूरी जिम्मेदारी उसने अपने कंधों पर ही ले रखी है।
महाराष्ट्र में नवंबर में होने वाला विधानसभा चुनाव केंद्र में सत्ताधारी एनडीए और विपक्ष की अगुवाई कर रहे इंडिया अलायंस दोनों के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति गठबंधन को लोकसभा चुनावों वाली नकारात्मक तस्वीर बदलने की चुनौती है तो विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) हर हाल में सत्ता पर काबिज होने के लिए दम लगा रही है।

गेमचेंजर स्कीम के भरोसे भाजपा गठबंधन
नवंबर में होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव जीतने के लिए बीजेपी की रणनीति मुख्य रूप से 5 बिंदुओं पर आधारित है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है, हाल ही में लॉन्च की गई 'लाडकी बहीण योजना'। इसको पार्टी और महायुति गठबंधन गेमचेंजर स्कीम मानकर चल रही है।
बीजेपी को इस योजना में सबसे बड़ा लाभ ये दिख रहा है कि दो किस्तों के बदले कुल 3,000 रुपए पहले ही 21 से 65 साल की लाभार्थी महिलाओं के खातों में डाल दी गई है; और गणेश चतुर्थी तक यानी चुनावों की घोषणा से पहले तीसरी किस्त भी मिल जाने की संभावना है।
इस योजना का लाभ महाराष्ट्र की 85 लाख से एक करोड़ महिलाओं को मिलने जा रहा है। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने न्यूज18 से कहा है, 'किसी के खाते में पहले ही पैसा पहुंच जाना सबसे बेहतर चुनावी वादा है। महाराष्ट्र से हमें जो फीडबैक मिला है, उसके मुताबिक महिलाएं बहुत खुश हैं और सरकार के दोबारा सत्ता में आने पर और अधिक किस्तों का इंतजार कर रही हैं। ग्रामीण महाराष्ट्र में यह योजना गेम-चेंजर है।'
वोट शेयर में एमवीए की मामूली बढ़त से आगे निकलने की रणनीति
महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से महायुति को सिर्फ 13 सीटें ही मिली थीं। लेकिन, महायुति और एमवीए के वोट शेयर में मात्र 0.4% का अंतर रहा था। अगर वोटों की संख्या के हिसाब से देखें तो यह सिर्फ 2.03 लाख वोट हैं और बीजेपी की पूरी रणनीति इसी अंतर को पाटकर आगे निकलने पर केंद्रित है। पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि पहले ऐसे अंतर को वह आसानी से पाट चुकी है, इसलिए वह विधानसभा चुनाव में निश्चित रूप से कहानी पलट सकती है।
बेहतर नतीजे देने वाले रणनीतिकारों को सौंपी जिम्मेदारी
पिछले साल जब मध्य प्रदेश विधानसभा के चुनाव होने वाले थे तो इस तरह का माहौल था कि बीजेपी के करीब दो दशकों की सत्ता के दिन अब लद चुके हैं। चुनावी पंडित उसे 60 से ज्यादा सीटें नहीं दे रहे थे। लेकिन, तथ्य यह है कि पार्टी ने 163 सीटें जीतकर ऐसे राजनीतिक पंडितों को फिर से गलत साबित कर दिया।
पार्टी ने उस चुनाव में केंद्रीय मंत्रियों भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव को एमपी में चुनाव जिताने की जिम्मेदारी सौंपी थी। लोकसभा चुनाव का परिणाम आते ही पार्टी ने एक बार फिर से अपने इन्हीं दोनों सफल चेहरों को क्रमश: प्रभारी और सह-प्रभारी बनाकर महाराष्ट्र भेज दिया।
विकास भी चुनाव जीतने की रणनीति का अहम हिस्सा
फिर से महाराष्ट्र फतह के लिए एनडीए या महायुति गठबंधन ने प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी बहुत ज्यादा फोकस कर रखा है। बीजेपी की अगुवाई वाले गठबंधन ने विधानसभा चुनाव अभियान में भी इसे बहुत ज्यादा प्रमुखता देने की तैयारी की है।
'लाडकी बहीण योजना' की रकम दोगुनी करने का वादा
बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति गठबंधन का चुनाव जीतने वाला पांचवां फंडा फिर से महिला वोटरों पर ही केंद्रित है। बीते शनिवार को ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नागपुर में घोषणा की है कि अगर उनकी सरकार और बड़ी बहुमत के साथ सरकार में वापस लौटती है तो 'लाडकी बहीण योजना' के लिए लड़कियों और महिलाओं को अभी जो 1,500 रुपए महीने दिए जा रहे हैं, वह रकम बढ़ाकर पहले 2,500 रुपए और फिर 3,000 रुपए मासिक कर दी जाएगी।
चुनावी विश्लेषक भी मानते हैं कि अगर मध्य प्रदेश के तत्कालीन भाजपाई मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'लाडली बहना योजना' के तहत चुनाव से पहले महिलाओं के खातों में रकम ट्रांसफर करने नहीं शुरू किए होते तो परिणाम पलट भी सकता था।
महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में तस्वीर बदलने की उम्मीद में बीजेपी
महाराष्ट्र में एनडीए को यकीन है कि महिलाओं के लिए लॉन्च की गई योजना से पश्चिमी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के ग्रामीण इलाकों में उसे जबर्दस्त फायदा मिल सकता है, जहां लोकसभा चुनावों में उसे बहुत मुश्किल चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
'लाडकी बहीण योजना' से दबाव में दिख रहा है एमवीए
महायुति सरकार की इस योजना का ही प्रभाव है कि महा विकास अघाड़ी की ओर से भी अब इस योजना की रकम सत्ता में आने पर 5,000 से 10,000 रुपए तक बढ़ा दिए जाने के बादे किए जाने लगे हैं।
बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि लोकसभा चुनावों में एमवीए को उद्धव ठाकरे कैंप और शरद पवार कैंप को अपने-अपने आधार वोटरों के बीच कुछ सहानुभूति का भी फायदा मिला था। लेकिन, अब पार्टी मानकर चल रही है कि नवंबर आते-आते यह सहानुभूति भी उसकी योजना की वजह से फीकी पड़ने वाली है।
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