महाराष्ट्र में हिंदी थोपने के आरोप पर झुकी फडणवीस सरकार, थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का फैसला लिया वापस
Three-language policy: महाराष्ट्र के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी कोतीसरे विषय के रूप में अनिवार्य किए जाने के फैसलेफडणवीस सरकार की जमकर आलोचना हो रही थी। शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की MNS सरकार पर महाराष्ट्र के लोगों पर हिंदी थोपने का आरोप लगा रही थी।इस मुद्दें पर बुरी तरह घिरने के बाद राज्य की महायुति सरकार ने रविवार को बड़ा फैसला लिया है।
फडणवीस कैबिनेट ने रविवार को थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी के कार्यान्वयन से संबंधित दो सरकारी प्रस्तावों (जीआर) को वापस लेने का फैसला किया। महराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बताया कि शिक्षाविद् डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति भाषा नीति के कार्यान्वयन की देखरेख और आगे का रास्ता सुझाने के लिए बनाई जाएगी।

फडणवीस ने कहा, "राज्य मंत्रिमंडल ने कक्षा एक से तीन-भाषा नीति के कार्यान्वयन के संबंध में अप्रैल और जून में जारी सरकारी प्रस्तावों (जीआर) को वापस लेने का फैसला किया है। डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा जो (थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूले) कार्यान्वयन की सिफारिश करेगी।
फडणवीस ने आरोप लगाया कि यह पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे थे जिन्होंने डॉ. रघुनाथ माशेलकर समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था कि कक्षा 1 से 12 तक तीन-भाषा नीति शुरू की जाए, और इसके कार्यान्वयन के लिए एक पैनल भी गठित किया था।
शिवसेना (यूबीटी) के विरोध के बाद झुकी फडणवीस सरकार
कैबिनेट का फैसला शिवसेना (यूबीटी) के मुंबई और महाराष्ट्र भर में विरोध प्रदर्शन के कुछ ही घंटों बाद आया, जिसके दौरान प्रदर्शनकारियों ने 17 जून के प्रस्ताव की प्रतियां जलाईं। संकल्प में कहा गया था कि हिंदी "आम तौर पर" तीसरी भाषा के रूप में काम करेगी, लेकिन अंग्रेजी और मराठी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए अनिवार्य नहीं होगी।
पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया कि वह हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसके थोपने का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा, "हमने जीआर की प्रतियों को जला दिया है, जिसका मतलब है कि हम इसे स्वीकार नहीं करते हैं। हम हिंदी का विरोध नहीं करते हैं, लेकिन हम इसे थोपने की अनुमति नहीं देंगे। सरकार को मोर्चे के पीछे का कारण समझ में नहीं आता है। मराठी के साथ अन्याय किया गया है। सवाल यह है कि आप छात्रों पर कितना दबाव डालने जा रहे हैं।"
हिंदी पढ़ाए जाने को लेकर जारी किया था आदेश
गौरतलब है कि फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने इससे पहले 16 अप्रैल को एक जीआर जारी किया था, जिसमें अंग्रेजी और मराठी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए हिंदी को अनिवार्य तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य किया गया था। विपक्षी दलों और नागरिक समाज के वर्गों से विरोध का सामना करते हुए, सरकार ने बाद में 17 जून को एक संशोधित जीआर जारी किया, जिसमें हिंदी को वैकल्पिक विषय बना दिया गया। इस आदेश में कहा गया था कि कक्षा 1 से 5 तक हिंदी विषय को तीसरे विषय के रूप में स्कूलों में पढ़ाया जाएगा। अगर एक कक्षा में 20 से अधिक बच्चे तीसरे विषय के रूप में किसी अन्य भाषा को पढ़ने की इच्छा जाहिर करते हैं तो सरकार स्कूल में उस विषय का शिक्षक उलब्ध करवाएगी नहीं तो इन बच्चों को ऑनलाइन उस विषय को पढ़ाया जाएगा।












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