महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों का बढ़ाया स्टाइपेंड
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों (GMC) में मेडिकल इंटर्न डॉक्टरों को दिए जाने वाले "स्टाइपेंड" (stipend) में खासा इजाफा कर दिया है। अभी तक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दिन रात ड्यूटी करने वाले इन इटर्न डॉक्टरों को 11,001 रुपये स्टाइपेंड के तौर पर मिलते थे जिसे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार ने अब 11 हजार से बढ़ाकर सीधे 18,000 हजार रुपये कर दिया है।

महाराष्ट्र सरकार ने ये फैसला मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस फीस की तुलना में अपर्याप्त पेमेंट और अन्य राज्यों की तुलना में कम स्टाइपेंड के संबंध में एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स (ASMI) की लगातार शिकायतों के बाद लिया है।
विदेश में डॉक्टरी पढ़कर आए इंटर्न को क्या मिलेगा बढ़ा हुआ स्टाइपेंट?
फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) यानी जिन्होंने विदेश में अपनी शिक्षा पूरी की है और महाराष्ट्र में इंटर्नशिप की है, वे भी सरकार द्वारा बढ़ाए गए इस स्टाइपेंड के पात्र होंगे। उन्हें भी 18 हजार रुपये मासिक वजीफा यानी स्टाइपेंट मिलेगा।
लंबे समय से एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स (ASMI) इटर्न डॉक्टरों को हाई पेमेंट किए जाने की पैरवी करता रहा है, एएसएमआई महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ. अथर्व शिंदे ने इटर्न डॉक्टरों को 30 हजार रुपये के मासिक स्टाइपेंड की मांग की क्योंकि इतना ही असम और कर्नाटक जैसे राज्यों में दिया जा रहा है।
वहीं चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय (DMER) ने शुरू में ये स्टाइपेंड बढ़ाकर 22,000, रुपये करने का प्रस्ताव रखा था।
18,000 प्रति माह से अधिक की आकांक्षाओं के बावजूद, कई इंटर्न, जो अपनी इंटर्नशिप जल्द पूरी करने वाले हैं उन्होंने इटर्न का शिंदे सरकार द्वारा स्टाइपेंट में वृद्धि किए जाने से खुश नजर आए। उन्होंने कहा महाराष्ट्र अब सरकारी मेडिकल कॉलेज में इंटर्न डॉक्टरों के लिए सबसे कम भुगतान करने वाला राज्य नहीं होगा।












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