Maharashtra Civic Chunav 2025: दिवाली के बाद PMC-PCMC में मतदान की तैयारी, जानें क्या है तारीख?
Maharashtra Civic Chunav 2025: महाराष्ट्र में लंबे समय से लटके स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने मंगलवार (5 अगस्त 2025) को ऐलान किया कि पुणे नगर निगम (PMC) और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम (PCMC) समेत अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव दिवाली (20 अक्टूबर) के बाद नवंबर-दिसंबर 2025 में कराए जाएंगे, जो जनवरी 2026 तक खिंच सकते हैं।
लेकिन, वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) मशीनों के इस्तेमाल से इनकार ने विपक्ष को हमलावर बना दिया है। आइए जानते हैं इस सियासी ड्रामे का पूरा माजरा...

दिवाली के बाद शुरू होगा चुनावी शोर
राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने नासिक में चुनावी तैयारियों की समीक्षा के बाद पत्रकारों से कहा, 'हम अक्टूबर के अंत से चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की योजना बना रहे हैं। यह चरणबद्ध तरीके से होगी, क्योंकि एक साथ सभी चुनाव कराना मानव संसाधनों की कमी के कारण संभव नहीं।'
उन्होंने साफ किया कि जुलाई 2025 की मतदाता सूची के आधार पर चुनाव होंगे, और पिछले चुनावों की तरह चार सदस्यीय वार्ड संरचना लागू रहेगी। SC-ST और OBC आरक्षण में कोई बदलाव नहीं होगा, जबकि OBC सीटों के लिए लॉटरी पद्धति अपनाई जाएगी।
VVPAT पर सियासी तूफान
वाघमारे ने स्पष्ट किया कि स्थानीय निकाय चुनावों में VVPAT मशीनों का इस्तेमाल नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'पहले भी स्थानीय चुनावों में VVPAT का उपयोग नहीं हुआ। नांदेड़ नगर निगम के पिछले चुनाव में दो वार्डों में इसे प्रयोग के तौर पर आजमाया गया था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।' इस फैसले पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
शिवसेना (UBT) की प्रवक्ता सुषमा अंधारे ने चेतावनी दी, 'VVPAT के बिना चुनावों की पारदर्शिता पर सवाल उठेंगे। अगर मशीनें नहीं लगीं, तो हमें कोर्ट जाना पड़ेगा।' कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने भी इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, 'VVPAT के बिना मतदान की निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी?'
PMC-PCMC में 3 साल से प्रशासक राज
पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगमों में 2022 से निर्वाचित निकाय नहीं हैं। दोनों ही प्रशासकों के हवाले हैं, जिससे नागरिक सेवाओं पर असर पड़ा है। BJP नेता सारंग कामटेकर ने कहा, 'निर्वाचित निकायों की सख्त जरूरत है। लोग प्रशासकों से त्रस्त हैं। दिवाली के बाद चुनाव का फैसला सही है, लेकिन त्योहारी सीजन के कारण मतदान कम हो सकता है।' उन्होंने अनुमान लगाया कि चुनाव नवंबर-दिसंबर में होंगे, और जनवरी 2026 तक खिंच सकते हैं।
किन-किन निकायों में होंगे चुनाव?
महाराष्ट्र के 29 नगर निगम, 243 नगर परिषदें, 37 नगर पंचायतें, 26 जिला परिषदें, और 289 पंचायत समितियों में चुनाव होने हैं। इनमें प्रमुख हैं: -
- बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC)
- पुणे नगर निगम (PMC)
- पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम (PCMC)
- नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, कोल्हापुर, डोंबिवली, कल्याण, छत्रपति संभाजी नगर, और वसई-विरार।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और OBC आरक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 में स्थानीय निकाय चुनावों को चार सप्ताह में अधिसूचित करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने 27% OBC आरक्षण को मंजूरी दी, लेकिन 2017 की वार्ड सीमाओं के आधार पर चुनाव कराने का निर्देश दिया। BMC के लिए 227 वार्डों की मैपिंग पूरी हो चुकी है, और ड्राफ्ट 5 अगस्त 2025 तक शहरी विकास विभाग को सौंपा जा चुका है।
सियासी समीकरण: महायुति vs MVA
महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति (BJP, शिवसेना, NCP) और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (कांग्रेस, शिवसेना UBT, NCP-SP) के बीच कांटे की टक्कर होगी। 2024 के लोकसभा चुनावों में MVA ने 30 सीटें जीतीं, लेकिन विधानसभा चुनावों में महायुति ने 230 सीटों के साथ दबदबा बनाया। CM देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया है कि महायुति एकजुट होकर सिविक चुनाव लड़ेगी।
क्यों हुई देरी?
- कोविड-19: महामारी ने शुरुआती देरी का कारण बना।
- OBC आरक्षण विवाद: सुप्रीम कोर्ट में तीन साल तक चले मुकदमों ने प्रक्रिया को रोका।
- वार्ड परिसीमन: उद्धव ठाकरे सरकार ने BMC के वार्ड 227 से बढ़ाकर 236 किए, जिसे शिंदे सरकार ने रद्द कर दिया। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहा।
क्या है जनता की उम्मीद?
पिछले तीन साल से प्रशासकों के राज में नागरिक सेवाएं प्रभावित हुई हैं। निर्वाचित निकायों की वापसी से जनता को बेहतर जवाबदेही और समस्याओं के समाधान की उम्मीद है। लेकिन VVPAT के बिना चुनावों पर सवाल और सियासी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा। क्या महायुति इस मौके को भुना पाएगी, या MVA बाजी मारेगी? नवंबर-दिसंबर का सिविक चुनाव महाराष्ट्र की सियासत का अगला रणक्षेत्र होगा।
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