'मेरे पास नौकरी नहीं, 3 साल से सैलरी तक नहीं मिली', पेरिस ओलंपिक में तिरंगा लहराने वाले गुरु का दुखद अंत
Jaspal Rana Financial Struggle: भारतीय खेल जगत ने अपना एक ऐसा सितारा खो दिया है, जिसने न सिर्फ खुद देश के लिए पदक जीते बल्कि कई युवा खिलाड़ियों के सपनों को भी उड़ान दी। एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता और स्टार निशानेबाज मनु भाकर के कोच जसपाल राणा का 49 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके जाने की खबर ने खेल प्रेमियों को स्तब्ध कर दिया है। विडंबना यह है कि जिस कोच ने मनु भाकर को ओलंपिक मंच पर इतिहास रचने में मदद की, वही कुछ समय पहले अपने संघर्षों और आर्थिक परेशानियों का दर्द बयां कर रहे थे।
बेहद कठिन समय से गुजर रहे थे जसपाल
पेरिस ओलंपिक के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें एक नौकरी की जरूरत है और पिछले तीन साल उनके लिए बेहद कठिन रहे हैं। आज उनके निधन के बाद वह बयान फिर से चर्चा में है और लोगों को भावुक कर रहा है। एक ऐसे खिलाड़ी और कोच का सफर अचानक थम गया, जिसने भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में बड़ा योगदान दिया।

मनु भाकर की सफलता के पीछे बड़ी भूमिका
जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के सबसे बड़े नामों में शामिल थे। खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने देश के लिए कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते। बाद में कोच के रूप में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर की शानदार सफलता के पीछे भी उनकी मेहनत और मार्गदर्शन को अहम माना गया। टोक्यो ओलंपिक के बाद मनु और जसपाल राणा के बीच दूरियां बढ़ गई थीं, लेकिन पेरिस से पहले दोनों फिर साथ आए और इसका नतीजा पूरी दुनिया ने देखा।
जब दुनिया जश्न मना रही थी, तब उन्होंने सुनाया था अपना दर्द
पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर के दो पदक जीतने के बाद पूरा देश खुशी मना रहा था। इसी दौरान जसपाल राणा का एक इंटरव्यू काफी चर्चा में आया था। उन्होंने कहा था कि पिछले तीन साल से उन्हें किसी संस्था से नियमित वेतन नहीं मिला है। उन्होंने बताया था कि उन्हें अपने भविष्य को लेकर चिंता है और भारत लौटने के बाद नौकरी की तलाश करनी पड़ेगी। राणा ने यह भी कहा था कि टोक्यो ओलंपिक के बाद उन्हें बिना वजह आलोचना का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने उन्हें खलनायक की तरह पेश किया, जबकि उस समय वह वहां मौजूद भी नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने कभी सार्वजनिक रूप से अपनी परेशानियों की चर्चा नहीं की।
"मनु स्टार हैं, मैं नौकरी ढूंढ रहा हूं"
अपने बयान में जसपाल राणा ने कहा था कि मनु भाकर आज देश की स्टार हैं और उन्हें इस बात पर गर्व है। उन्होंने खुद को एक बेरोजगार कोच बताते हुए कहा था कि उन्हें जल्द ऐसी नौकरी ढूंढनी होगी जिससे नियमित आय हो सके। उनका यह बयान उस समय भी लोगों को चौंका गया था, क्योंकि देश के लिए इतने पदक जीतने और खिलाड़ियों को तैयार करने वाला एक दिग्गज कोच आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा था।
म्यूनिख से लौटते समय बिगड़ी तबीयत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटते समय फ्लाइट में उनकी तबीयत खराब हो गई थी। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया और इलाज शुरू किया गया। कुछ समय तक उनकी स्थिति पर नजर रखी गई, लेकिन गुरुवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली।
जसपाल राणा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई खेल हस्तियों और खिलाड़ियों ने दुख जताया है। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारतीय खेल जगत का बड़ा नाम बताते हुए श्रद्धांजलि दी। कई खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि भारतीय शूटिंग ने अपना एक सच्चा मार्गदर्शक खो दिया है।
भारतीय शूटिंग का एक सुनहरा अध्याय
जसपाल राणा सिर्फ एक सफल निशानेबाज नहीं थे, बल्कि युवा खिलाड़ियों को तराशने वाले बेहतरीन कोच भी थे। उन्होंने अपने अनुभव और मेहनत से कई खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। मनु भाकर की सफलता हो या भारतीय शूटिंग की नई पीढ़ी का उभरना, हर जगह उनका योगदान दिखाई देता है। आज उनके जाने से खेल जगत में जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भरना आसान नहीं होगा।














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