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Maharashtra: महाराष्ट्र में हर दिन 8 किसान दे रहे जान, 90 दिनों में 767 ने की आत्महत्या, मुआवजे में भी घपला

Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि जनवरी से मार्च 2025 तक राज्य में कुल 767 किसानों की आत्महत्याएं दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकांश मामले विदर्भ क्षेत्र में सामने आए।

किसानों की आत्महत्याओं पर विपक्ष का सवाल

कांग्रेस के विधायकों ने महाराष्ट्र में, विशेष रूप से विदर्भ क्षेत्र में, किसानों की आत्महत्याओं में बढ़ोतरी को लेकर सत्तारूढ़ दल बीजेपी से लिखित प्रश्न पूछा था। उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि राज्य सरकार मृतक किसानों के परिवारों को किस प्रकार सहायता प्रदान कर रही है। कांग्रेस विधायकों ने वित्तीय सहायता को मौजूदा 1 लाख रुपये से बढ़ाने की भी मांग की।

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मरने वालों को मात्र 1 लाख की मदद

पुनर्वास मंत्री और एनसीपी विधायक मकरंद पाटिल ने सदन में लिखित जवाब पेश किया और आश्वासन दिया कि महाराष्ट्र सरकार किसानों को हर संभव मदद दे रही है। महाराष्ट्र सरकार आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

मौतें- 767, मुआवजा सिर्फ 376 को

पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 से मार्च तक तीन महीनों में कुल 767 किसानों ने आत्महत्या की। इनमें से 376 किसान सरकारी मुआवजे के लिए पात्र थे, जबकि 200 किसानों को सहायता नहीं मिली क्योंकि वे सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करते थे।

विदर्भ क्षेत्र की स्थिति गंभीर

मकरंद पाटिल ने आगे बताया कि पश्चिमी विदर्भ - यवतमाल, अमरावती, अकोला, बुलढाणा और वाशिम में जनवरी 2025 से मार्च की अवधि के बीच 257 किसानों ने आत्महत्या की, जिनमें से 76 मृतक किसानों के परिवारों को राज्य सरकार से वित्तीय सहायता मिली, जबकि 74 आवेदन अयोग्य घोषित कर दिए गए। आवेदन अयोग्य करने के कारण या तो स्पष्ट तरीके से नहीं बताया गया या फिर मामूली वजहों का हवाला दिया गया।

मराठवाड़ा में भी आत्महत्याएं

मराठवाड़ा के हिंगोली जिले में, जनवरी 2025 से मार्च तक तीन महीनों में 24 किसानों की आत्महत्याएं दर्ज की गईं। किसानों की आत्महत्या एक गंभीर मुद्दा है, और सरकार इस समस्या को हल करने के लिए विभिन्न कदम उठाने का दावा रही है। इसमें वित्तीय सहायता प्रदान करना, कृषि ऋण माफ करना और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं प्रदान करना शामिल है। लेकिन आंकड़ा देखकर बिल्कुल ऐसा नहीं लग रहा कि सरकार के इन कदमों से जरा सा भी फर्क पड़ रहा हो।

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