Maharashtra Chunav: किस तरह से दो-दो मोर्चे पर फंस चुकी है कांग्रेस? मुंबई में कहीं हो न जाए हरियाणा जैसा हाल!
Maharashtra Election 2024: महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में अकेले 36 सीटें मायानगरी मुंबई में हैं। प्रदेश में नामांकन की समय-सीमा समाप्त होने को है, लेकिन कांग्रेस पार्टी को दो-तरफा संघर्ष करना पड़ रहा है। एक तो पार्टी को सहयोगी शिवसेना (यूटीबी) के आगे एक-एक सीट के लिए हाथ फैलानी पड़ रही है, तो दूसरी तरफ पार्टी के अंदर टिकट बंटवारे को लेकर वही हालात पैदा हो रहे हैं, जिसका खामियाजा यह हरियाणा में भुगत भी चुकी है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक उसे दिए एक एक इंटरव्यू में कांग्रेस सांसद और पार्टी की मुंबई यूनिट की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने हाल ही में कहा था कि कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे की पार्टी से मुंबई की 18 सीटें मांगी थीं। उनके मुताबिक पार्टी का यह दावा लोकसभा चुनावों पर आधारित था, जिसमें पार्टी 6 में से दो पड़ लड़ी और एक जीती थी।

पहले उद्धव की पार्टी ने दिया झटका, अब पार्टी के अंदर से तनाव
लेकिन, उद्धव की पार्टी के सामने पार्टी इस कदर दबाव में नजर आ रही है कि उसने 9 सीटों पर ही अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं और बहुत अच्छा संयोग रहा तो एक और सीट भी उसे मिल सकती है। ऐसे में पार्टी के जिन नेताओं का पत्ता साफ हुआ है, उनमें खलबली मचना स्वाभाविक है।
कांग्रेस में टिकट बंटवारे में पक्षपात का भी लग रहा आरोप
सहयोगी दल से सीटें कम मिली हैं और दावेदार ज्यादा हो गए हैं, इसकी वजह से टिकट बांटने में पक्षपात का आरोप भी लग रहा है। पार्टी के एक वर्ग के नेताओं के बीच से ऐसी बातें सामने आई हैं। लेकिन, वर्षा गायकवाड़ ने इस तरह के दावों का खंडन ही नहीं किया है, बल्कि आरोप लगाया है कि 'निहित स्वार्थी तत्व' अफवाह फैलाने में जुटे हैं।
मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष की बहन को भी मिल गया टिकट
टिकट बंटवारे से नाराज नेताओं का दावा है कि एक तो पार्टी नेतृत्व सहयोगी से सम्मानजनक सीटें ले पाने में नाकाम रही है, और जो भी सीटें खाते में आई हैं, वह भी मुट्ठीभर नेताओं या उनके रिश्तेदारों के बीच बांट दी गई हैं।
मसलन, पार्टी में भारी विरोध के बावजूद गायकवाड़ की बहन ज्योति को धारावी सीट से टिकट मिल गया है। हरियाणा में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर भी इसी तरह से मनचाहे लोगों को टिकट देने के आरोप लगे थे।
कांग्रेस के गुहार के आगे भी नहीं झुकी उद्धव की शिवसेना
इससे पहले पार्टी ने पूरा जोर लगा लिया कि उद्धव कम से कम वर्सोवा, बांद्रा ईस्ट और बायकुला की सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने को राजी हो जाएं। लेकिन, शिवसेना (यूबीटी) टस से मस होने के लिए तैयार नहीं हुई।
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के एक विधायक वर्सोवा से अपने दामाद को टिकट दिलवाने की कोशिशों में लगे हुए थे। लेकिन, जब उन्हें लगा कि ऐसा होना मुश्किल है, तो उन्होंने पार्टी नेतृत्व को इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह इस सीट पर अपना दावा ही छोड़ दे।
कुछ उम्मीदवार ने पार्टी को लौटा दिए टिकट
इतना ही नहीं, पार्टी के कुछ उम्मीदवार तो ऐसे हैं, जिन्हें चुनाव लड़ने का मौका दिया भी गया है तो वह मनपंसद सीट नहीं मिलने पर हथियार डालने को राजी हो गए हैं।
मसलन, सचिन सावंत को अंधेरी वेस्ट से टिकट मिला। लेकिन, उन्होंने बयान जारी कर कहा, 'मैंने बांद्रा ईस्ट से टिकट मांगा था। लेकिन, सीट-बंटवारे में यह हमारे सहयोगी को चली गई है। मैं पार्टी नेतृत्व को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे अंधेरी वेस्ट के लिए चुना। लेकिन, मैंने नेतृत्व से अनुरोध किया है कि अपना फैसला बदल लें।'
इससे पहले बांद्रा वेस्ट की सीट पर भी एक उम्मीदवार चुनाव लड़ने से आनाकानी करता दिखा था। यहां से भाजपा के मुंबई अध्यक्ष आशीष शेलार मैदान में हैं। कांग्रेस ने उनके खिलाफ पूर्व कॉर्पोरेटर आसिफ जकारिया को उतारा है। सूत्रों का कहना है कि शुरू में वह चुनाव लड़ने से हिचकिचा रहे थे। लेकिन, जब पूर्व सांसद प्रिया दत्त किसी भी सूरत में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हुईं तो पार्टी ने किसी तरह जकारिया को टिकट लेने के लिए मना लिया।
जनाधार कहीं का और टिकट थमाया कहीं पर
इसी तरह जानकारी के मुताबिक चारकोप से पार्टी प्रत्याशी यशवंत सिंह भी शुरू में इस सीट चुनाव लड़ने के लिए नहीं तैयार हो रहे थे। एक नेता के मुताबिक, 'वे पार्टी के उत्तर भारतीय सेल से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कांदिवली ईस्ट से टिकट मांगा था, क्योंकि वहां उत्तर भारतीयों की अच्छी आबादी है। लेकिन, बजाए इसके कांदिवली से एक गुजराती प्रत्याशी (कालू बधेलिया) को उतार दिया गया।'
लेकिन, मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ यही दावा कर रही हैं कि पार्टी ने टिकट देने के लिए सिर्फ मेरिट को आधार बनाया है। उनके मुताबिक, 'जो नाराज हैं या जिनको टिकट नहीं मिला है, वे तो कुछ भी कह सकते हैं। लेकिन, हमने उन लोगों को टिकट दिया है, जो लड़कर चुनाव जीत सकते हैं।'












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