Maharashtra Chunav: मुंबई को 'टोल फ्री' करने के महायुति के फैसले ने कैसे बढ़ाई उद्धव ठाकरे की चुनौती?
Maharashtra Assembly Elections 2024: महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुनाव तारीखों के एलान से ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली महायुति सरकार ने मुंबई के सभी पांच एंट्री प्वाइंट पर हल्के वाहनों को टोल टैक्स से आजाद कर दिया है। यह फैसला शिवसेना (यूटीबी) के उद्धव ठाकरे और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA)की चुनौती बढ़ाने वाला है। क्योंकि, इससे सीधे मिडिल क्लास के लोगों की जेब को राहत पहुंचेगी।
इस फैसले के पीछे तो ट्रैफिक जाम से मुक्ति और उसकी वजह से ईंधन और समय की बचत बताया जा रहा है। लेकिन, जिस तरह से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के चीफ राज ठाकरे के अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा के एक दिन बाद ही यह फैसला लिया गया है, उससे साफ है कि यह सोची-समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। मुख्यमंत्री शिंदे ने ये भी कहा है कि यह फैसला 'स्थायी' होगा।

मिडिल क्लास को राहत वाला फैसला
महायुति सरकार के इस फैसले से मुंबई और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) का मध्यम वर्ग सीधे तौर पर प्रभावित होगा, जिसका मायानगरी में कारों या अन्य हल्के वाहनों से आना-जाना रोजमर्रा का काम है। महायुति सरकार में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी शामिल हैं।
61 विधानसभा सीटों पर असर
मुंबई में विधानसभा की 36 सीटें हैं और ठाणे जिले में 17 हैं। इनके अलावा रायगढ़ जिले में 7 असेंबली सीटें हैं, जो एमएमआर के दायरे में आती हैं और मुंबई की 5 एंट्री प्वाइंट पर हल्के वाहनों को टोल मुक्त करने से इन्हीं विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं पर सीधे असर पड़ने वाला है। उनकी बजत भी होगी और उनका समय भी बचेगा।
हमनें जिन 61 सीटों की बात की है, उनमें से अधिकतर पर महायुति में बीजेपी-शिवसेना का उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूटीबी) के साथ ही मुकाबला होना है। यह वह इलाका है, जहां ठाकरे परिवार का आज भी दबदबा है और विशेष रूप से एकनाथ शिंदे के अलग होने के बाद भी उसका प्रभाव खत्म नहीं हुआ है।
मुंबई, ठाणे और रायगढ़ में लोकसभा की कुल 10 सीटें हैं, जिनमें से लोकसभा चुनावों में विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) 5 सीटें जीत गया था। गौर करने वाली बात है कि महाराष्ट्र सरकार ने यह फैसला राज ठाकरे के अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा के एक दिन बाद ही की है।
महायुति सरकार से खुश हो गए राज ठाकरे
राज ठाकरे का जिक्र करना इसलिए जरूर है कि उनकी अगुवाई में एमएनएस पूरे महाराष्ट्र को टोल फ्री करने को लेकर लंबे समय से आक्रामक आंदोलन करता रहा है। इसलिए जैसे ही शिंदे सरकार ने इसकी घोषणा की राज ठाकरे महायुति सरकार को बधाई देने वालों में सबसे आगे रहे। उन्होंने फौरन ही एमएनएस कार्यकर्ताओं से कहा कि वह लोगों को बताएं कि आखिर उनकी पार्टी का आंदोलन कैसे सफल हुआ है।
उद्धव ठाकरे की पार्टी को हो सकता है नुकसान
राज ठाकरे की प्रतिक्रिया से लग रहा है कि अकेले चुनाव मैदान में उतरने के उनके फैसले को अब एक ठोस मुद्दा मिल चुका है। माना जा रहा है कि अगर इस मुद्दे पर एमएनएस आक्रामक तेवर के साथ चुनाव मैदान में उतरी तो मुंबई और आसपास की सीटों पर इसका नुकसान उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) और उसके गठबंधन एमवीए को उठाना पड़ेगा। इसका फायदा महायुति गठबंधन को मिल सकता है।
मिडिल क्लास वोट के लिए बहुत बड़ा दांव
दरअसल, बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी की महायुति सरकार ने बीते कुछ महीनों में गरीब परिवारों के लिए कई लोकप्रिय योजनाएं शुरू की हैं। सीएम माझी लाडकी बहिन योजना उनका प्रमुख वोट जुटाने वाला अभियान बना हुआ है।
ऐसे में सरकार पर आरोप लग रहे थे कि वह टैक्स देने वाले मिडिल क्लास के लिए कुछ खास नहीं कर पा रही है। लेकिन, मुंबई आने-जाने वाले छोटे वाहनों को टोल फ्री करके सत्ताधारी गठबंधन ने बहुत बड़ा चुनावी दांव चल दिया है।












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