Maharashtra Chunav: अकेले क्यों चुनाव लड़ना चाहती है MNS? क्या राज ठाकरे के पास कोई प्लान बी है?
Maharashtra Election News: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने विधानसभा चुनाव तारीखों के एलान से ठीक पहले कहा है कि उनकी पार्टी अकेले मैदान में उतरेगी। लोकसभा चुनावों से पहले उन्होंने एनडीए या सत्ताधारी गठबंधन को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की थी। लेकिन, विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उन्होंने पैंतरा क्यों बदल लिया है, यह कई सवाल खड़े कर रहा है।
रविवार को एमएनएस चीफ ने मुंबई के गोरेगांव में पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि 'चुनाव से पहले वे (सरकार) जो चाहेंगे वो करेंगे। आपको परेशान किया जाएगा, चीजों में उलझाया जाएगा। वे पैसे बहाएंगे.....कल चुनावों में सभी पार्टियां पैसे बांटेंगी....उसे जरूर ले लें....क्योंकि, वह आपके पैसे हैं....आपसे लूटा गया है ....पैसे जरूर लें और एमएनएस उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करें। एक बार महाराष्ट्र की पकड़ मेरे हाथों में आ गया तो यह महाराष्ट्र दिल्ली के सामने नहीं झुकेगा... हमें अपने स्वाभिमान के साथ जीना चाहिए।'

लोकसभा चुनावों से पहले महायुति को दिया बिना शर्त समर्थन
यह वही राज ठाकरे हैं, जिन्होंने लोकसभा चुनावों से पहले न सिर्फ बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी गठबंधन को बिना शर्त समर्थन दिया था, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी समर्थन की घोषणा की थी।
महायुति के साथ ही विपक्षी एमवीए के सहयोगी पर भी साध रहे हैं निशाना
राज ठाकरे विपक्षी महा विकास अघाड़ी के सहयोगियों पर भी निशाना साधने से पीछ नहीं हैं। अपने चचेरे भाई और शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे से तो उनकी अदावत है ही, वह एनसीपी (एसपी) सुप्रीमो शरद पवार को भी घेरने में लगे हुए हैं।
उन्होंने कहा, 'मैंने ठाणे में एक मीटिंग में कहा था कि शरद पवार नास्तिक हैं। वह किसी भी धर्म को नहीं मानते। उन्होंने आजतक किसी भी (धर्म) का पालन नहीं किया। मैंने जो कहा उसे बाद में मीडिया ने उठा लिया था....पवार साहेब सभी मंदिरों में गए और नीवें रखनी शुरू कर दीं। लेकिन, यह 'हाथ मिलाना' भी झूठ है।'
बीएमसी चुनावों में देरी की वजह से महायुति से छिटके राज ठाकरे?
दरअसल, राज ठाकरे को बीएमसी चुनावों को लेकर महायुति से बहुत ही उम्मीदें लगी हुई थीं। लेकिन, यह चुनाव अभी तक नहीं हुए हैं। शिवसेना (यूबीटी) और उससे निकली एमएनएस के लिए बीएमसी ही राजनीति का आधार रही है। बीएमसी चुनाव होने पर शायद राज ठाकरे को बीजेपी और शिवसेना के साथ गठबंधन में फायदा मिलने की उम्मीद थी।
महायुति के साथ रहकर ज्यादा सीटें मिलने की नहीं थी उम्मीद?
लेकिन, विधानसभा चुनावों में जिस तरह से एक-एक सीट के लिए महायुति गठबंधन की तीनों सहयोगियों बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी में ही चीजें फंसी हुई हैं, एमएनएस को अपनी उम्मीदों के मुताबिक सीटें मिलने की शायद संभावना नहीं नजर आ रही थी।
विधानसभा चुनाव में भी एमएनएस नहीं रही है बड़ा फैक्टर
वैसे महाराष्ट्र विधानसभा के पिछले दो चुनावों में एमएनएस का प्रदर्शन खास नहीं रहा है। 2014 में यह 209 सीटों पर लड़कर सिर्फ 1 सीट जीती थी और मात्र 3.15% वोट जुटा सकी थी। वहीं 2019 में पार्टी ने 101 प्रत्याशी उतारे और उसे तब भी 1 ही सीट मिली। जबकि, वोट शेयर घटकर 2.25% रह गया था।
विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद वाली परिस्थितियों का इंतजार!
अब एमएनएस शायद अकेले चुनाव लड़कर नतीजों के बाद बनने वाली संभावनाओं के भरोसे बैठना चाहती है। क्योंकि, बीएमसी चुनाव अब नई सरकार बनने पर ही होंगे और तब अपनी राजनीति का भविष्य तय करना राज ठाकरे के लिए ज्यादा आसान हो सकता है।
हालांकि, तब भी मौजूदा राजनीतिक दृष्टिकोण से उनका महायुति के साथ जुड़ना ज्यादा आसान हो सकता है, क्योंकि उनकी राजनीति का आधार ही उद्धव सेना से अलग रहने पर टिका हुआ है।












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