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Maharashtra Chunav: कैसे BJP के लिए RSS ने लगाया जोर? 'वोट जिहाद' का निकाल लिया तोड़!

Maharashtra Chunav 2024: लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में भाजपा की अगुवाई वाले महायुति गठबंधन को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ तो इसका एक बड़ा कारण आरएसएस की ओर से समर्थन नहीं मिलना बताया गया था। तब दोनों संगठनों में एक दूरी नजर आई थी। लेकिन, नतीजों के बाद उसपर काफी काम हुआ और अब भाजपा के नेता खुद ही मान रहे हैं कि कैसे संघ उनके अनुरोध पर पहले की तरह सहायता करने लगा है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के दिग्गज देवेंद्र फडणवीस ने टीओआई को दिए एक इंटरव्यू में इस चुनाव में संघ और उससे जुड़े संगठनों से मिल रहे सहयोग के बार में विस्तार से बताया है। उन्होंने जो कुछ कहा है, उससे साफ है कि इस चुनाव में आरएसएस पूरी तरह से पहले वाले अंदाज में अपनी भूमिका निभा रहा है।

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देश की भलाई के लिए संघ से मांगा समर्थन- फडणवीस
उन्होंने कहा है कि 'संघ एक पैरेंट ऑर्गेनाइजेशन है। हमनें इस वैचारिक परिवार के सभी सदस्य संगठनों से अनुरोध किया था कि कट्टर-वामपंथी और अराजकतावादी मतभेद पैदा करने का काम कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि देश की संस्थानों से लोगों का भरोसा उठ जाए। 2024 के चुनावों में हमने इंडी अलायंस से लड़ाई नहीं लड़ी। हमने इन्हीं ताकतों से लड़ाई लड़ी।'

उन्होंने आगे बताया है, 'इस बार हमने संघ के इन सभी सदस्य संगठनों से अनुरोध किया था कि चाहे आपका राजनीति से कुछ भी लेना-देना नहीं हो, लेकिन देश की भलाई के लिए आपको हमारी मदद करनी चाहिए।'

संघ के स्वयं सेवकों ने महायुति की जीत के लिए लगा दिया है जोर
इसका असर पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में दिखने लगा है। आरएसएस के स्वयं सेवक जनसंपर्क अभियान तेज कर चुके हैं। उनका अभियान बहुत ही संतुलित, लेकिन ठोस रणनीति पर आधारित है और लक्ष्य महायुति के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करना है।

मतदान के लिए प्रोत्साहित करने के काम में जुटा आरएसएस
इस अभियान में शामिल संघ के एक स्वयंसेवक ने कहा, 'हमारा प्राथमिक उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को मतदान के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है और यह भी सुनिश्चित करना है कि वह पूरी तरह सोच-समझकर और जानकारी रखते हुए ही ऐसे विकल्प चुनें जो देश की एकता और सुरक्षा को मजबूत करता है।' हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि 'हम कभी भी मतदाताओं से किसी एक खास पार्टी या गठबंधन को वोट डालने के लिए नहीं कहते हैं।'

वोटों का विभाजन रोकने पर फोकस
संघ के स्वयं सेवकों का अपने क्षेत्र में खास प्रभाव रहता है। वह सिर्फ चुनाव के दिन ही लोगों से नहीं घुलते-मिलते हैं, बल्कि यह उनके व्यवहार का हिस्सा होता है। इस वजह से उनके लिए चुनावों के दौरान घर-घर जाकर जनसंपर्क का काम भी आसान हो रहा है और हाउसिंग सोसाइटी में अनौपचारिक बैठकों के माध्यम से भी अपनी बातें पहुंचाई जा रही हैं।

एक और स्वयंसेवक ने इसके बारे में बताया, 'हम मतदाताओं से आग्रह कर रहे हैं कि समान-विचारधारा वाले दलों के बीच वोटों का विभाजन न हो ऐसे प्रयास करें, क्योंकि खंडित जनादेश से राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है।'

सोशल मीडिया का भी हो रहा है भरपूर इस्तेमाल
जहां तक शहरी मतदाताओं की बात है और उसमें भी युवा वोटरों तक पहुंच सुनिश्चित करना है तो इसके लिए तमाम तरह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी काम आ रहे हैं। अलग-अलग श्रेणी के मतदाताओं के बीच अलग-अलग तरह के संदेश, सूचनाएं और प्रेरक जानकारियां पहुंचाई जा रही हैं।

'संघ यह नहीं बताता कि किसे वोट दें'
स्वयं सेवकों की पूरी कोशिश है कि वह बिना किसी राजनीतिक विवाद में शामिल हुए ज्यादा से ज्यादा लोगों को मतदान में शामिल होने के लिए प्रेरित करें। एक वरिष्ठ सदस्य के मुताबिक, 'हम लोगों से यह नहीं कह रहे हैं कि किन्हें वोट दें, बल्कि यह याद दिला रहे हैं कि राष्ट्र के भविष्य के लिए उनका उत्तरदायित्व क्या है।'

मुंबई जैसे शहरी इलाकों में कम मतदान चुनाव आयोग के लिए भी एक बहुत चिंता की वजह रही है। चाहे-अनचाहे आरएसएस उसमें भी एक सराहनीय योगदान कर रहा है।

वोट जिहाद का निकाल लिया तोड़!
आरएसएस की यह भी कोशिश कि हाल के दिनों में पैदा हुए एक विशेष वोटिंग पैटर्न, जिसे बीजेपी वाले 'वोट जिहाद' का नाम दे रही है, उसके व्यापक असर से भी अवगत कराएं, क्योंकि मतदाताओं के फैसले से इसपर बहुत बड़ा असर पड़ सकता है। संघ के एक विचारक ने कहा, 'जागरूक नागरिक और संगठन के अंग के तौर पर हमारा उत्तरदायित्व है कि हम देशभक्त, लेकिन अनजान हिंदुओं को कुछ वोटिंग रणनीतियों के असर के बारे में जानकारी दें।'

इसे भी पढ़ें- Maharashtra Chunav 2024: महाराष्‍ट्र चुनाव में अजित पवार 'किंगमेकर' या 'स्पॉइलर'? जानिए क्‍या दिया जवाब

फडणवीस ने भी अपने इंटरव्यू में कहा है, '(लोकसभा चुनावों में) कई सीटों पर हमारे खिलाफ 'वोट जिहाद' हुआ था। अब अगर ऐसा होता भी है तो उसकी असर सीमित हो जाएगा।'

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