Maharashtra Chunav 2024: कांग्रेस-शिवसेना (UBT) में सीट शेयरिंग पर क्‍यों नहीं बन रही सहमति? जानिए पांच कारण

Maharashtra Election 2024: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के बीच सहमति नहीं बनती दिख रही। दोनों पार्टियों ने गतिरोध खत्‍म करने के लिए एनसीसी (SP) के चीफ शरद पवार से संपर्क कर रही है।

महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा ने 99 सीटों पर उम्‍मीदवार उतार दिए। कांग्रेस, शिवसेना (UBT) व शरद पवार एनसीपी के बीच सीट शेयरिंग का पेंच फंसने के कारण उम्‍मीदवारों की सूचियां अटकी हुई हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के बीच सीट बंटवारे पर सहमति इन 5 कारणों के चलते नहीं हो पा रही है।

Maharashtra Chunav 2024 Congress Uddhav ShivSena

1. कांग्रेस चाह रही 125 सीटें, विदर्भ में सीटें देने से मना

सूत्रों के हवाले से शिवसेना (यूबीटी) ने अपने लिए, कांग्रेस के लिए और एनसीपी (एसपी) के लिए क्रमशः 100:100:88 सीट शेयरिंग का फॉर्मूला प्रस्तावित किया है।

शिवसेना (यूबीटी) के एक नेता ने कहा कि राज्य कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले कांग्रेस के लिए 125 सीटें चाहते थे। उन्होंने विदर्भ में शिवसेना को सीटें देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण पिछले सप्ताह एक बैठक में उनके और शिवसेना सांसद संजय राउत के बीच टकराव हुआ।

सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) ने ऐसी सीटें मांगी हैं, जहां कांग्रेस की मजबूत उपस्थिति है - रामटेक और धामनगांव रेलवे। या जहां उसने 2019 में जीत हासिल की थी - चंद्रपुर में वरोरा, अमरावती में दरियापुर, बांद्रा पूर्व और नागपुर दक्षिण।

2. शिवसेना (यूबीटी) का लोकसभा 'बलिदान'

शिवसेना (यूबीटी) का मानना ​​है कि उसने गठबंधन धर्म निभाने के लिए लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस के लिए विदर्भ की दो लोकसभा सीटों-रामटेक और अमरावती का त्याग किया था। अब वह चाहती है कि महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में यह पुरानी पार्टी उसका एहसान वापस करें।

हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) को बताया गया है कि इन सीटों पर उसके पास मजबूत उम्मीदवार नहीं हैं और उसे बाहर से लाए उम्मीदवारों पर निर्भर रहना होगा। कांग्रेस ने यह भी बताया कि उसने कोंकण क्षेत्र में एक भी सीट नहीं मांगी है, जिसे शिवसेना का गढ़ माना जाता है, क्योंकि सीट बंटवारे के लिए जीतने की क्षमता ही एकमात्र मानदंड होना चाहिए।

3. पटोले का 'आक्रामक' व्यवहार

नाना पटोले महाराष्‍ट्र राज्य कांग्रेस प्रमुख हैं। सूत्रों ने बताया कि पिछले सप्ताह एक बैठक में पटोले का "आक्रामक" व्यवहार शिवसेना (यूबीटी) को पसंद नहीं आया और उसने दावा किया कि यह अनावश्यक था।

महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख की नासिक शहर में सीट की मांग ने भी शिवसेना को नाराज़ कर दिया, जिसके कारण पटोले और राउत के बीच टकराव हुआ और बैठक बेनतीजा रही। बाद में राउत ने धमकी दी कि अगर पटोले बातचीत में हिस्सा लेंगे तो वे बातचीत बंद कर देंगे। हालांकि, कांग्रेस ने कहा कि उसके राज्य प्रमुख को बातचीत से बाहर नहीं रखा जा सकता।

4. शिवसेना की मांग

कांग्रेस के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) 100 सीटों की मांग करके अपनी क्षमता से अधिक जोर लगा रही है, जबकि उसकी ताकत 80-85 सीटों तक सीमित है। कांग्रेस को लगता है कि उन्हें 15-20 सीटें और देने से उनकी जीत की संभावना कम हो जाएगी और उनकी संख्या बढ़ जाएगी।

5. मातोश्री बैठक

कांग्रेस का दावा है कि रविवार को उद्धव ठाकरे द्वारा अपने आवास पर बुलाई गई "तत्काल बैठक" से वह अचंभित रह गई, जिसके कारण उसे अपनी केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की बैठक रद्द करनी पड़ी। उसने महाराष्ट्र के अपने नेतृत्व से दिल्ली में ही रहने को कहा, जिससे दो दिन तक सीटों के बंटवारे पर बातचीत की संभावना लगभग खत्म हो गई।

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