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Maharashtra Cabinet: देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे की सरकार के 12 मंत्रियों को क्यों रखा बाहर?

Maharashtra Cabinet News: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने नए मंत्रिमंडल में पिछली एकनाथ शिंदे सरकार में मंत्री रहे 12 विधायकों को जगह नहीं दी है। इसको लेकर बगावत के सुर भी फुट पड़े हैं और खासकर बीजेपी की सहयोगी शिवसेना और एनसीपी में इसको लेकर ज्यादा नाराजगी दिख रही है।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने जिन 12 विधायकों को महायुति की नई मंत्रिपरिषद में जगह नहीं दी है, उनमें बीजेपी के नेता भी शामिल हैं। अलग-अलग नेताओं का पत्ता कटने की भिन्न वजहें बताई जा रही हैं। बीते रविवार को फडणवीस मंत्रिपरिषद में 39 नए सदस्यों को शामिल किया गया था। जिन दिग्गजों को इसमें जगह नहीं मिली है, उनमें एनसीपी के छगन भुजबल, बीजेपी के सुधीर मुनगंटीवार और शिवसेना के अब्दुल सत्तार जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं।

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1) छगन भुजबल
येवला सीट से एमएलए छगन भुजबल एनसीपी के बड़े चेहरे हैं। वह बीते कई सरकारों में मंत्री रह चुके हैं और राज्य के एक बड़ा ओबीसी चेहरा हैं। माना जा रहा है कि महाराष्ट्र की नंदगांव सीट पर शिवसेना विधायक सुहास कांडे के खिलाफ अपने भतीजे समीर भुजबल को निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़वाने का उनका फैसला उनपर भारी पड़ गया। कहा जा रहा है कि महायुति के नेता, जिनमें एनसीपी के लोग भी शामिल हैं, उन्होंने उन्हें मंत्री बनाए जाने का विरोध किया था।

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2) सुधीर मुनगंटीवार
बीजेपी के दिग्गज नेता और सात बार के विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार को भी फडणवीस सरकार में जगह नहीं मिली है। वह बल्लारपुर से बीजेपी एमएलए हैं। माना जा रहा है कि वह संगठन के लिए बेहतर नेता माने जाते हैं, इसलिए उन्हें कोई महत्वपूर्ण रोल दिया जा सकता है। लेकिन, अभी उनका जिस तरह से पत्ता कटा है, उसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि जब उन्हें चंद्रपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने को कहा गया, जो शुरू में उन्होंने अनिच्छा जाहिर की थी।

3) अब्दुल सत्तार
सिल्लोड सीट से शिवसेना विधायक और पार्टी के दिग्गज अब्दुल सत्तार भी मंत्री रह चुके हैं। वह चार बार के विधायक हैं। भाजपा उनपर पहले भ्रष्टाचार का आरोप लगा चुकी थी। इसलिए जब उन्हें शिंदे कैबिनेट में जगह मिली तो भी पार्टी की हिचकिचाहट दिखी थी। वह पहले हिंदू संगठनों के निशाने पर भी रहे थे। बीते चुनाव में भाजपा ने उनके लिए प्रचार करने से भी अनिच्छा जताई थी।

4) तानाजी सावंत
परांडा विधानसभा से शिवसेना विधायक तानाजी सावंत को भी फडणवीस मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिली है। इनकी वजह से पिछली महायुति सरकार की तब फजीहत हो गई थी, जब उन्होंने कहा था कि उन्हें एनसीपी के मंत्रियों के साथ बैठने में उन्हें 'उल्टी' आने लगती है। इसकी वजह से महायुति सरकार में विवाद पैदा हो गया था।

5) दीपक केसरकर
सावंतवाडी सीट से चार बार के एमएलए और एकनाथ शिंदे के खास दीपक केसरकर भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना सके हैं। माना जा रहा है कि पिछली सरकार में शिक्षा मंत्री रहते उनकी परफॉर्मेंस को लेकर उठने वाले सवालों की वजह से उन्हें किनारे रहना पड़ गया है। इसके अलावा खासकर बीजेपी नेता नारायण राणे के खिलाफ लोकसभा चुनावों में काम करने के संदेहों की वजह से भी उन्हें कीमत चुकानी पड़ी है, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं।

6) दिलीप वाल्से पाटिल
अंबेगांव सीट से एनसीपी विधायक शरद पवार के निजी सचिव रह चुके हैं। आठ बार के विधायक विधानसभा स्पीकर और वित्त मंत्री जैसे पद भी संभाल चुके हैं। उनके समर्थकों से जो संकेत मिले हैं, उसके मुताबिक उन्होंने खुद ही स्वास्थ्य कारणों से फिलहाल के लिए कैबिनेट से दूर रहने का फैसला किया है।

7) रवींद्र चव्हाण
डोंबिवली के बीजेपी विधायक फडणवीस के बेहद करीब माने जाते रहे हैं और पीडब्ल्यूडी जैसे विभाग संभाल चुके हैं। पार्टी में उनके कद और बीजेपी नेताओं के साथ उनके ताल्लुकातों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि हो सकता है कि उन्हें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की कमान सौंपी जाए, क्योंकि चंद्रशेखर बावनकुले कैबिनेट में शामिल हो चुके हैं।

8) विजय कुमार गावित
विजय कुमार गावित सात बार के विधायक हैं और बीती कई सरकारों में मंत्री रह चुके हैं। नंदुरबार के एमएलए बीजेपी में आने से पहले कांग्रेस-एनसीपी सरकार में उनपर भ्रष्टाचार के भी आरोप लग चुके हैं। बीते चुनावों में उन्होंने अपने परिवार के लोगों को दूसरे दलों से टिकट दिलवाया, इसको लेकर भाजपा के साथ-साथ शिवसेना में भी असंतोष हुआ। शायद पार्टी उन्हें मंत्री न बनाकर यह संकेत देना चाहती है कि अनुशासनहीनता के लिए जगह नहीं है।

9) सुरेश खाडे
मिरज विधानसभा सीट से चार बार के बीजेपी विधायक सुरेश खाडे को कथित तौर पर मंत्री के रूप में उनके खराब प्रदर्शन और नए चेहरों को मौका देने की पार्टी की रणनीति की वजह से कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी है।

10) संजय बनसोडे
उदगीर से एनसीपी एमएलए संजय बनसोडे 2 बार के विधायक हैं। माना जा रहा है कि पार्टी को सीमित संख्या में मिला मंत्री पद इनका पत्ता कटने की वजह बन गई है।

11) धर्मराव बाबा आत्राम
अहेरी सीट से एनसीपी एमएलए धर्मराव बाबा आत्राम का भी मंत्री पद कट गया है। माना जा रहा है कि जब वह मंत्री थे और उनसे ज्यादा जवाबदेही की उम्मीद थी, लेकिन उसमें वह पिछड़ रहे थे। यही वजह है कि पार्टी ने उनकी जगह अन्य नेता को तरजीह देने का फैसला किया।

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12) अनिल पाटिल
अमलनेर सीट से एनसीपी के दो बार के एमएलए अनिल पाटिल पहली बार के विधायक होते हुए भी शिंदे सरकार में मंत्री बन गए थे। लेकिन, माना जा रहा है कि पार्टी अभी दूसरे नेताओं को मौका देना चाहती थी और आगे इनका नंबर भी आ सकता है, इसी वजह से फिलहाल इन्हें मंत्रिपरिषद से बाहर रखा गया है।

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