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कैबिनेट विस्तार से पहले आदित्य ठाकरे की CM देवेंद्र फडणवीस से अपील, कहा-'इन नेताओं को मंत्रिमंडल से रखें दूर'

Maharashtra News: महाराष्ट्र में 12,000 करोड़ रुपए के कथित सड़क घोटाले को लेकर राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के प्रमुख नेता आदित्य ठाकरे ने इस घोटाले की गहन जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके शासन के दौरान मंत्री रहे मंगल प्रभात लोढ़ा और दीपक केसरकर की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

400 किमी सड़क कंक्रीटीकरण परियोजना पर सवाल

यह विवाद बृहन्मुंबई नगर निगम की 400 किमी सड़क कंक्रीटीकरण परियोजना से जुड़ा है। जिसे आदित्य ठाकरे ने पहले ही भ्रष्टाचार का अड्डा करार दिया था। उन्होंने जनवरी 2023 में चेतावनी दी थी कि इस परियोजना से मुंबई में जलभराव की समस्याएं और बढ़ सकती हैं। ठाकरे ने उस समय BMC कमिश्नर इकबाल सिंह चहल को पत्र लिखकर इस परियोजना को रोकने की अपील की थी। लेकिन परियोजना पर काम जारी रहा।

devendra fadanvis

भ्रष्टाचार के आरोप और 66 प्रतिशत अधिक अनुबंध लागत

आदित्य ठाकरे का आरोप है कि इस परियोजना में 66 प्रतिशत अधिक लागत के अनुबंध जारी किए गए। जिससे ठेकेदारों और राजनेताओं ने अवैध रूप से करोड़ों रुपए कमाए। उन्होंने दावा किया कि यह मुंबई के करदाताओं की मेहनत की कमाई को बर्बाद करने का मामला है। ठाकरे ने शिंदे और उनके मंत्रिमंडल के दौरान इस परियोजना को मंजूरी देने वाले मंत्रियों को भी इस घोटाले के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

सोशल मीडिया पर आदित्य का हमला

आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भाजपा और शिंदे सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सरकार इस घोटाले पर गंभीर है तो उन्हें तत्कालीन अवैध सीएम शिंदे और उनके शासन के 2 संरक्षक मंत्रियों लोढ़ा और केसरकर को कैबिनेट से बाहर करना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने इस परियोजना में भ्रष्टाचार की अनदेखी की और शिंदे के शासन का समर्थन किया।

बीजेपी ने भी उठाए सड़क निर्माण पर सवाल

गौर करने वाली बात यह है कि भाजपा ने भी सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे और SIT जांच की मांग की थी। हालांकि आदित्य ठाकरे ने इसे भाजपा की दोहरी नीति करार दिया और कहा कि पार्टी ने एक तरफ भ्रष्टाचार की आलोचना की। वहीं दूसरी ओर इस घोटाले को अंजाम देने वालों का समर्थन किया।

नागपुर में कैबिनेट विस्तार से पहले बढ़ा सियासी पारा

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है। जब महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल विस्तार और शीतकालीन सत्र की तैयारियां जोरों पर हैं। नागपुर में रविवार शाम होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से पहले आदित्य ठाकरे के आरोपों ने सियासी हलचल को और तेज कर दिया है।

राज्य प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व पर असर

आदित्य ठाकरे के इस आक्रामक रुख ने राज्य प्रशासन के कामकाज और मुंबई के बुनियादी ढांचे के विकास पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर इस मामले में निष्पक्ष जांच होती है तो यह महाराष्ट्र के राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग

आदित्य ठाकरे के आरोपों ने जनता के बीच भ्रष्टाचार और जवाबदेही की बहस को फिर से जीवंत कर दिया है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और जांच के नतीजे क्या होंगे।

यह घोटाला महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती है। क्या यह जांच दोषियों को सजा दिलाएगी या फिर यह भी अन्य राजनीतिक मामलों की तरह दबा दी जाएगी। यह देखने वाली बात होगी।

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