Maharashtra Chunav: अजित पवार का 2019 की बैठक में गौतम अडानी की मौजूदगी पर चौकाने वाला खुलासा, मचा सियासी बवाल

Maharashtra Assembly Elections 2024: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार ने हाल ही में एक साक्षात्कार में 2019 की एक अहम बैठक का खुलासा किया है। जिसने महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मचा दी है। इस बैठक में जाने-माने उद्योगपति गौतम अडानी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित कई हाई-प्रोफाइल नेता मौजूद थे। अजित पवार के इस बयान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में अडानी के कथित प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अजित पवार के इस खुलासे ने महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल उठा दिए हैं।

एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार

अजित पवार एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने भाजपा के साथ 2019 में हुए अल्पकालिक गठबंधन को याद करते हुए कहा कि हर कोई जानता है कि बैठक कहां हुई थी। अमित शाह, गौतम अडानी, प्रफुल्ल पटेल, देवेंद्र फडणवीस, अजित पवार और शरद पवार वहां थे। इस बयान के बाद से विपक्ष ने इस बैठक में अडानी की उपस्थिति को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं।

ajit pawar

सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर उठाए सवाल

शिवसेना की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर अडानी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वह भाजपा के अधिकृत वार्ताकार हैं। क्या उन्हें गठबंधन तय करने की जिम्मेदारी दी गई है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया और कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार को गिराने का मुख्य कारण अडानी के व्यापारिक हित थे। उन्होंने महाराष्ट्र में अपनी परियोजनाओं के लिए राजनीतिक समीकरण बदले। इसलिए हम कहते हैं कि यह महाराष्ट्र सरकार नहीं बल्कि अडानी सरकार है।

गौतम अडानी की भूमिका पर भी उठे सवाल

इसके अलावा धारावी पुनर्विकास परियोजना में अडानी के संभावित व्यापारिक हितों का मुद्दा उठाते हुए गायकवाड़ ने कहा कि गौतम अडानी का अधिकार क्या था। वे सरकार गठन की चर्चाओं में क्यों शामिल थे। उनके इस बयान ने महाराष्ट्र के राजनीतिक माहौल में व्यापार और सत्ता के बीच के संबंधों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

इस बीच एनसीपी के वरिष्ठ नेता और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने इस बैठक से अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि मुझे ऐसी किसी बैठक की जानकारी नहीं है। जिसमें उपमुख्यमंत्री द्वारा बताए गए नाम शामिल थे। इस बयान ने भी सत्तारूढ़ गठबंधन में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है।

महाराष्ट्र में सत्ता और उद्योगपतियों के बीच के संबंधों पर नई बहस

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार के इस बयान ने महाराष्ट्र में सत्ता और उद्योगपतियों के बीच के संबंधों पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप। जिसमें सरकार गठन में उद्योगपतियों के प्रभाव की बात की जा रही है। शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर देते हैं।

डिप्टी सीएम अजित पवार के इस चौंकाने वाले खुलासे ने भारतीय राजनीति में कॉर्पोरेट और राजनीतिक गठजोड़ की संभावित जटिलता को उजागर किया है। विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों के बावजूद सत्तारूढ़ गठबंधन की चुप्पी इस मुद्दे को और भी पेचीदा बना रही है। अब देखना होगा कि यह खुलासा महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिरता और सरकार की छवि पर क्या प्रभाव डालता है।

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