Mahaparinirvan Diwas 2025: महाराष्ट्र में 'महापरिनिर्वाण दिवस' की छुट्टी, जानिए क्या खुला है और क्या बंद?
Mahaparinirvan Diwas 2025 Holiday: महापरिनिर्वाण दिवस हर साल 6 दिसंबर को भारत में डॉ. भीमराव अंबेडकर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भारत के संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के प्रतीक, डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए समर्पित है।
महाराष्ट्र सरकार ने डॉ. अंबेडकर की स्मृति में आज छुट्टी का ऐलान किया है जिसकी वजह से आज राज्य में मुंबई में स्कूल और जूनियर कॉलेजों में छुट्टी है।

आइए विस्तार से जानते है कि आज मुंबई में क्या खुला है और क्या बंद?
- मुंबई और राज्य के कई शहरों में आज State और semi-government कार्यालय बंद हैं।
- शराब की बिक्री प्रतिबंधित है क्योंकि शराब की दुकानें बंद रहेंगी क्योंकि आज ड्राई डे घोषित किया गया है।
- सार्वजनिक और निजी बैंक सामान्य रूप से काम करेंगे क्योंकि आरबीआई ने छुट्टी घोषित नहीं की है।
- शेयर एक्सचेंज बीएसई और एनएसई ने अवकाश की सूचना जारी नहीं की है।
- शिक्षा विभाग के क्लस्टर रिसोर्स सेंटर (सीआरसी) ने मुंबई में स्कूल बंद करने की सूचना दी है।
- मुंबई के सभी स्कूलों और जूनियर कॉलेज आज बंद है।
- मध्य रेलवे ने महापरिनिर्वाण दिवस पर 14 अतिरिक्त ट्रेनों का शेड्यूल जारी किया है।
- औरंगाबाद, आदिलाबाद, नागपुर और शोलापुर से चलने वाली ये ट्रेनें आज मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल तक आएंगी।
डॉ. भीमराव अंबेडकर: भारतीय संविधान के शिल्पकार
डॉ. अंबेडकर, जिन्हें 'बाबासाहेब' के नाम से जाना जाता है, न केवल भारत के संविधान के मुख्य शिल्पकार थे, बल्कि एक समाज सुधारक, अर्थशास्त्री और राजनीतिक विचारक भी थे। उन्होंने समाज में व्याप्त जाति-आधारित भेदभाव और असमानता के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। उनके प्रयासों ने दलित और हाशिए पर खड़े समाज के लोगों को शिक्षा और समान अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. अंबेडकर ने अपनी पूरी जिंदगी दलितों, महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों को अधिकार दिलाने में लगा दी। उन्होंने कहा था, "मैं उस धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाए।"
महापरिनिर्वाण दिवस का महत्व
महापरिनिर्वाण दिवस, डॉ. अंबेडकर के 1956 में महापरिनिर्वाण (मृत्यु) के उपरांत उनकी विरासत और उनके विचारों को स्मरण करने का अवसर है। इस दिन लाखों लोग मुंबई के दादर स्थित चैत्यभूमि पर एकत्र होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिनमें संगोष्ठियां, सामूहिक प्रार्थनाएं और रैलियां शामिल होती हैं।












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