Maharashtra: MVA ने मुसलमानों से मुंह क्यों फेरा? एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं देने पर उठ रहे हैं सवाल

Maharashtra Lok Sabha Election 2024: महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के गठबंधन महा विकास अघाड़ी (एमवीए) पर समान विचारधारा से प्रभावित पार्टियां ही मुसलमानों की उपेक्षा का आरोप लगी रही हैं। एमवीए में शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एनसीपी शरदचंद्र पवार शामिल है, लेकिन इन्होंने ज्यादातर सीटों पर नाम तय किए हैं, लेकिन मुस्लिम प्रत्याशी नहीं दिए हैं।

महाराष्ट्र में हाल तक एमवीए के साथ प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) के साथ सीटों पर तालमेल को लेकर बातचीत चल रही थी। आखिरी समय में डील फाइनल नहीं हुई तो दोनों गठबंधनों ने अलग रास्ता अपनाना लिया। रविवार को वीबीए चीफ ने ही एमवीए पर एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं देने को के लिए सवाल उठा दिए।

maha vikas aghadi

बीजेपी पर आरोप लगाने वाली पार्टियों को मुसलमानों से मोहभंग!
महाराष्ट्र में मुसलमानों की आबादी करीब 12% है। ऐसे में खासकर कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी की ओर से अबतक एक भी मुस्लिम नाम नहीं दिया जाना, जरूर चौंकाता है। क्योंकि, ये वही पार्टियां हैं, जिनकी बीजेपी से यही शिकायत रहती है कि वह मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट नहीं देती।

'मुस्लिम वोट चाहिए, मुस्लिम उम्‍मीदवार नहीं'
प्रकाश अंबेडकर ने रविवार को अपने एक्स पोस्ट में लिखा,'...एमवीए ने अभी तक एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को नामांकित नहीं किया है...अगर उन्हें बीजेपी की तरह मुसलमानों को बाहर रखना पड़ा है तो फिर दोनों में अंतर क्या है? मुख्यधारा की मीडिया मुसलमानों के बाहर रखने पर चुप क्यों है? उनका आरोप है, 'महा विकास आघाड़ी को मुस्लिम वोट चाहिए, मुस्लिम उम्‍मीदवार नहीं'।

सेक्युलरों का मुस्लिम प्रेम उजागर हो गया- वारिस पठान
मुस्लिम प्रत्याशियों की उपेक्षा की वजह से एमवीए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के भी निशाने पर है। पूर्व विधायक और पार्टी नेता वारिस पठान ने कहा है कि 'तथाकथित सेक्युलर पार्टियों का मुसलमानों के प्रति प्रेम उजागर हो गया है।'

पठान का कहना है, '48 उम्मीदवारों में से लोकसभा चुनावों के लिए एक भी मुस्लिम उम्मीदवार अभी तक नहीं उतारा गया है। इससे पता चलता है कि उन्हें सिर्फ इनका वोट चाहिए।'

कांग्रेस के भीतर पहले ही दर्ज हो चुका है विरोध
महा विकास अघाड़ी के मुस्लिम नेता मुस्लिम उम्मीदवारों की उपेक्षा को लेकर पहले ही ऐतराज जता चुके हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस के महासचिव जाकिर अहमद कह चुके हैं कि कम से कम मुंबई की 6 में से 1 सीट पर तो मुसलमान को टिकट देना चाहिए। उनके मुताबिक कांग्रेस को मुसलमानों को जोड़े रखने के लिए यह जरूरी है। मुंबई की 6 में से 3 सीटों पर मुस्लिम वोटर अहम रोल निभाते रहे हैं।

महा विकास अघाड़ी ने मुस्लिम उम्मीदवारों से मुंह क्यों मोड़ा?
ऐसे में प्रश्न है कि क्या एमवीए ने मुस्लिम उम्मीदवारों से इसलिए तो मुंह नहीं मोड़ा है कि उन्हें लगता है कि मुसलमान वोटरों के पास विकल्प नहीं हैं? इसलिए, उनका वोट इंडिया ब्लॉक या एमवीए को ही मिलेगा, जो कि बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति गठबंधन या एनडीए को टक्कर देने में सक्षम है।

क्या इन दलों के मन में यह भी डर है कि अगर मुस्लिम उम्मीदवार उतारा गया तो महायुति के लिए देश के मौजूदा सियासी माहौल में ध्रुवीकरण करना ज्यादा आसान हो जाएगा। हो सकता है कि शायद एक सोची-समझी रणनीति के तहत एमवीए ने मुस्लिम प्रत्याशियों से परहेज रखने वाला जोखिम लेने का फैसला किया हो!

एमवीए को मुस्लिम उम्मीदवार नहीं देने से फायदा होगा या नुकसान?
महा विकास अघाड़ी के लिए चिंता की बात ये है कि सीटों पर तालमेल फाइनल नहीं होने के बाद प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी राज्य की 48 में से 35 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पिछले चुनाव में भी इस पार्टी ने ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया था। एमआईएम भी कम से कम राज्य की 5 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

इस तरह से इनका लक्ष्य दलित-मुस्लिम मतदाताओं को टारगेट करना है, जो कि कांग्रेस और एनसीपी का भी परंपरागत वोट बैंक रहा है। 2019 में विपक्षी गठबंधन को इसका बड़ी नुकसान झेलना पड़ा था। जबकि, ओवैसी की पार्टी ने औरंगाबाद में जीत दर्ज करके इतिहास रच दिया था। वहीं अंबेडकर की पार्टी जीती तो नहीं थी, लेकिन कई सीटों पर कांग्रेस-एनसीपी के हार का कारण जरूर बन गई थी।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+