Ladki Bahin Yojana क्या है? BMC चुनाव से पहले क्यों हो रहा है इसको लेकर विवाद, चुनाव आयोग तक को देना पड़ा दखल
Ladki Bahin Yojana Installment Payment Stopped: महाराष्ट्र में होने वाले नगर निकाय चुनावों से ठीक पहले सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। इसी बीच राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने महायुति सरकार को एक बड़ा झटका दिया है।
दरअसल, आयोग ने मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना (Mukhyamantri Majhi Ladki Bahin Yojana) की जनवरी माह की किस्त तय समय से पहले जारी करने पर रोक लगा दी है। यह फैसला उस वक्त आया है, जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सरकार मकर संक्रांति से पहले दिसंबर और जनवरी की दो किस्तें एक साथ महिलाओं के खातों में डालने की तैयारी कर रही थी। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला, इस योजना पर क्यों मचा है बवाल...

क्या है पूरा मामला?
राज्य चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (आचार संहिता) लागू होने के कारण सरकार किसी भी तरह का अग्रिम भुगतान (Advance Payment) नहीं कर सकती। यह फैसला उन शिकायतों के बाद लिया गया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि चुनाव से ठीक पहले योजना की दो किस्तें एक साथ देकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
दरअसल, बीजेपी नेता और मंत्री गिरीश महाजन ने बयान दिया था कि पात्र महिलाओं को दिसंबर और जनवरी की ₹1,500-₹1,500 की राशि मिलाकर कुल ₹3,000 मकर संक्रांति (14 जनवरी) से पहले मिलेंगे। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से "विशेष उपहार" बताया था। इसी बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया।
Ladki Bahin Yojana पर चुनाव आयोग ने क्यों लगाई रोक?
राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने साफ कहा-जो राशि देय है, वह दी जा सकती है, लेकिन आचार संहिता के दौरान किसी भी तरह का अग्रिम भुगतान स्वीकार्य नहीं है। इसके अलावा, इस अवधि में नए लाभार्थी भी नहीं जोड़े जा सकते। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जो किस्तें पहले से लंबित हैं या नियमित रूप से देनी हैं, उन्हें जारी किया जा सकता है, लेकिन चुनाव से पहले अतिरिक्त या समय से पहले भुगतान को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का असर
नगर निगम चुनावों को देखते हुए राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है। मतदान 15 जनवरी को और मतगणना 16 जनवरी को होनी है। ऐसे में चुनाव आयोग का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की घोषणाएं या भुगतान मतदाताओं को प्रभावित करने की श्रेणी में आ सकती हैं। आचार संहिता के तहत यह नियम है कि चुनाव की घोषणा से पहले शुरू की गई विकास योजनाएं जारी रह सकती हैं, लेकिन किसी नई सुविधा, अतिरिक्त लाभ या अग्रिम राशि का ऐलान नहीं किया जा सकता।
'लाडकी बहीण योजना' क्या है?
मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना महायुति सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से एक है। इसके तहत 18 से 65 वर्ष की पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की आर्थिक सहायता दी जाती है। माना जाता है कि इस योजना ने 2024 के विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन (बीजेपी, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार गुट की एनसीपी) की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।
विपक्ष का आरोप: वोट के बदले भुगतान की कोशिश
इस पूरे मामले पर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा-सरकार महिलाओं की भावनाओं के साथ खेल रही थी। दो महीने तक पैसा नहीं दिया और अब चुनाव से पहले वोट के बदले भुगतान करना चाहती थी। राज्य चुनाव आयोग का फैसला स्वागतयोग्य है। वहीं, कांग्रेस नेता और वकील संदेश कोंडविलकर ने आयोग में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि 14 जनवरी को भुगतान की योजना बनाई गई थी, जो मतदान से ठीक एक दिन पहले पड़ता है।
बिहार चुनाव में भी जीविका दीदी पर उठा था सवाल
इस फैसले की तुलना हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव से भी की जा रही है। वहां चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को ₹10,000 देने की घोषणा की थी। विपक्ष ने इसे चुनावी लुभावन कदम बताया था, हालांकि एनडीए ने भारी बहुमत से चुनाव जीत लिया था।
राज्य चुनाव आयोग के फैसले के बाद अब महाराष्ट्र सरकार सिर्फ वही भुगतान कर सकेगी, जो पहले से निर्धारित और नियमित है। जनवरी की किस्त को समय से पहले या दो महीने की राशि एक साथ देने की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला साफ संदेश देता है कि चुनाव के दौरान कल्याणकारी योजनाओं का इस्तेमाल वोटरों को लुभाने के लिए नहीं किया जा सकता, और आचार संहिता का उल्लंघन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा।












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