क्या था किनारा अग्निकांड? 9 साल बाद बॉम्बे HC से मिला न्याय, परिजनों को BMC देगा 50-50 लाख रुपये
Kinara Hotel fire incident: मुंबई के किनारा होटल अग्निकांड मामले में आखिरकार 9 साल बाद मृतकों के परिजनों को इंसान मिला है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहद मुंबई महानगर पालिका (BMC) को होटल में लगी आग में मारे गए 8 लोगों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश जारी किया है। बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला, 2015 के होटल अग्निकांड में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक जीत है।
इस मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने बीएमसी को अपने कर्तव्य का पालन करने में पूरी तरह विफल होने के लिए फटकार लगाई है। कोर्ट ने बीएमसी को लापरवाही का दोषी पाया और उम्मीद जताई है कि इस फैसले से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नगर निगम द्वारा सतर्कता बरती जाएगी। जानिए क्या है किनारा अग्निकांड केस और कोर्ट ने अपने आदेश में क्या-क्या कहा?

गौरतलब है कोर्ट में मृतकों के माता-पिता ने याचिका दाखिल की थी जिसे लोकायुक्त ने फरवरी 2017 में याचिकाओं को खारिज करते हुए पहले प्रत्येक परिवार को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा देने की बात कही थी, लेकिन पीड़ित परिवारों ने मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की। बीते 9 सालों से मृतकों के परिजन न्याय की लड़ाई लड़ रहे थे।
परिजनों को BMC देगा 50-50 लाख रुपये
बीते मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मृतकों के परिजनों को बड़ी राहत देते हुए बीएमसी को 12 सप्ताह के अंदर प्रत्येक पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि बीएमसी की निष्क्रियता के कारण होटल किनारा में अवैध गतिविधियां जारी रहीं, जिसके चलते आग लगी और लोगों की जान गई।
क्या था किनारा होटल अनिकांड केस?
16 अक्टूबर 2015 को कुर्ला में स्थित सिटी किनारा होटल में अचानक आग लग गई थी जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई। इस आग में झुलस कर मरने वाले सात छात्र थे जिनकी उम्र 18 से 20 वर्ष के बीच थी। इन छात्रों के अलावा एक विरार के रहने वाले डिजाइन इंजीनियर थे जिसकी उम्र महज 31 साल थी।
कौन थे ये आठ लोग?
होटल में जलकर मरने वाले छात्रों में पांच छात्र बॉस्को टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के थे और दो इसी कालेज के मास कम्युनिकेशन के छात्र थे। ये छात्र ताहा शेख, ब्रायन फर्नांडीस, साजिद चौधरी, शारजील शेख, आकाश थापर, इरविन डिसूजा और बर्नडेटा डिसूजा थे। इनके अलावा आठवां शख्स 31 वर्षीय अरविंद कनौजिया था जो स्टर्लिंग इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी सर्विसेज में नौकरी करता था।
इस वजह से जिंदा झुलस गए 8 लोग
कुर्ला में स्थित किनारा होटल में ये आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी। इस होटल में कमरे तक जाने वाली सीढ़ियां आग लगने से नष्ट हो गई थी जिस कारण 8 युवक फंस गए थे। ये युवक इतनी बुरी तरह आग में जिंदा झुलस गए थे कि इनको पहचान पाना भी मुश्किल हो गया था।
छात्र होटल में क्यों गए थे?
ये सभी छात्र कॉलेज में परीक्षा समाप्त होने के बाद खाना खाने के किए होटल किनारा में पहुंचे थे। उसी समय होटल में शॉर्ट शर्किट की वजह से आग लगी और ये छात्र होटल से बाहर नहीं निकल पाए और वहीं उनकी झुलस कर मौत हो गई। अरविंद कनौजिया इसी होटल के वातानुकूलित कमरे में था।
अग्नि पीड़ितों के परिवारों को मिला न्याय तो झलका दर्द
एक दशक लंबी कानूनी लड़ाई ने परिवारों को बहुत तकलीफ दी, लेकिन कोर्ट के इस फैसले ने पीड़ितों के परिवारों को सांत्वना भी दी है।
मृतक बेटे की मां बोलीं- हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था
19 साल के आकाश थापर जिनकी मौत इस अग्निकांड में हुई थी, उनकी मां रेखा थापर ने कहा "यह एक लंबी यात्रा रही है लेकिन आज हमें न्याय मिला है। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था।"
आकाश की बहन मोनिका थापर ने कहा कि न्याय की इस लड़ाई ने हमारे धैर्य की परीक्षा ली। मोनिका ने कहा, 'देर से मिला न्याय, न्याय से वंचित रहने से बेहतर है। भले ही हमें अब कुछ हद तक सांत्वना मिली है, लेकिन मुझे अपने भाई की मौत का दर्द जीवन भर रहेगा
मृतक की मां बोलीं- हमारे बच्चे तो कभी वापस नहीं आएंगे
होटल में लगी आग में मरने वाली 18 साल की बर्नाडेट डी'सूजा भी थी उसकी मां जैसिंटा डी'सूजा, ने कहा "आखिरकार हमें अपने बच्चों के लिए न्याय मिल गया। भावनात्मक नुकसान हमेशा रहेगा; हमारे बच्चे कभी वापस नहीं आएंगे। मैंने 2013 में अपने पति को खो दिया और फिर अपनी बेटी को। मैं एक मां हूं और मैं इस नुकसान से उबर नहीं सकती। हमने पिछले एक दशक में बहुत संघर्ष किया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या-क्या कहा?
- न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की पीठ ने इसे "चौंकाने वाला" मामला करार देते हुए कहा होटल के पास अग्निशमन विभाग से आवश्यक अनुमति नहीं है ये पता होते हुए भी बीएमसी ने होटल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। अगर बीएमसी सतर्क रहता तो ऐसी घटना नहीं होती।
- बीएमसी द्वारा बरती गई लापरवाही और वैधानिक कर्तव्यों का उल्लंघन है। आठ लोगों की जान जाने से उनके परिवारों के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का घोर उल्लंघन हुआ है।
- होटल ने लाइसेंस की कई शर्तों का उल्लंघन किया था,जिसमें 'मेजेनाइन फ्लोर' पर एक सर्विस एरिया का संचालन करना शामिल था,जिसे भंडारण क्षेत्र माना जाता था।
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