Maharashtra Cabinet: क्या इस वजह से फडणवीस सरकार का हिस्सा बनने से हिचकिचा रहे थे एकनाथ शिंदे?
Maharashtra New CM Cabinet Minister: राजनीति में कभी-कभी अच्छे चुनाव परिणाम के बाद भी ज्यादा बढ़ी हुई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसका सबसे ताजा और बेहतर उदाहरण शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे हैं। उनके मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी अगुवाई में महायुति ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। खुद शिवसेना के विधायकों की संख्या में काफी इजाफा हो गया। लेकिन,चुनाव नतीजे आने के पहले दिन से ही शिंदे चौतरफा असमंजस में घिरे नजर आए।
बीजेपी विधायक दल के नेता देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री के रूप में शपथग्रहण से कुछ घंटे पहले तक यह मालूम नहीं था कि एकनाथ शिंदे क्या करेंगे? कभी उनके सरकार में शामिल होने और डिप्टी सीएम बनने के लिए तैयार होने की खबरें आईं तो कभी सरकार से दूर रहने की आशंका जताई गई। आखिरकार उन्होंने सभी अटकलों को खारिज करके शपथ ली और अजित पवार के साथ उपमुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हो गए।

शिंदे सरकार में होंगे, तभी शिवसेना को कोई एमएलए उसमें शामिल होगा- उदय सामंत
शिंदे क्या करने वाले हैं, उसको लेकर असमंज गुरुवार को तब और बढ़ गया जब शिवसेना नेता उदय सामंत ने कह दिया कि अगर उन्होंने देवेंद्र फडणवीस सरकार में डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ नहीं लिया, तो उनकी पार्टी का कोई एमएलए सरकार का हिस्सा नहीं बनेगा।
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उन्होंने कहा था,'हमने शिंदे को यह बहुत ही स्पष्ट तौर पर बता दिया है कि नई सरकार में उन्हें निश्चित तौर पर उपमुख्यमंत्री बनना होगा।' उन्होंने साफ किया,'अगर एकनाथ शिंदे ने उपमुख्यमंत्री का पद नहीं स्वीकार किया, तो शिवसेना का कोई एमएलए सरकार में कोई जिम्मेदारी नहीं संभालेगा।' हालांकि, बाद में उन्होंने ही पुष्टि की कि शिंदे सरकार में शामिल होंगे।
शिवसेना एमएलए लगातार डालते रहे शिदें पर सरकार में शामिल होने का दबाव
इससे यह साफ है कि एकनाथ शिंदे पर सरकार में शामिल होने का दबाव सिर्फ बीजेपी से ही नहीं, बल्कि उनकी पार्टी की ओर से भी था। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार शिवसेना के नव-निर्वाचित एमएलए और नेताओं ने उनसे लगातार मुलाकात की और सरकार में शामिल होने का आग्रह किया।
शिंदे के सामने एक अनार, सौ बीमार वाली स्थिति!
लेकिन, तथ्य यह है कि शिंदे के लिए अब सत्ता का समीकरण बदल चुका है। संवैधानिक तौर पर किसे मंत्री बनाना है, यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है। यह विशेषाधिकार अब फडणवीस के पास जा चुका है। लेकिन, गठबंधन की राजनीति की वजह से नई सरकार में शिवसेना के कोटे से कौन मंत्री बनेगा, यह शिंदे ही तय करेंगे। संख्या गणित के हिसाब से पार्टी से करीब एक दर्जन नेताओं को मंत्री पद मिलने की संभावना है।
शिंदे पर नए चेहरों को मौका देने का भी दबाव!
शिंदे के सामने इसके लिए भी जबरदस्त लॉबिंग चली है। उनकी पिछली सरकार में पार्टी के जितने भी मंत्री थे, उनमें से लगभग सभी को फिर से मंत्री पद चाहिए। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक शिवसेना नेताओं का कहना है कि हो सकता है कि शिंदे कुछ नए चेहरों को भी मौका देना चाह रहे हों।
ज्यादा विधायक,निर्दलीय और आने वाले चुनावों की चुनौती
जब वह उद्धव ठाकरे से अलग होकर निकले थे तो उनके पास शिवसेना के 40 विधायक आए थे। आज इस पार्टी के विधायकों की संख्या 57 है। इसके अलावा 4 निर्दलीय विधायकों ने भी शिवसेना को समर्थन दिया है। शिंदे आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को भी देख रहे होंगे, जिसके लिए उन्हें शिवसेना मंत्रियों में जाति और क्षेत्र का संतुलन बिठाने की भी चुनौती है।
सरकार का हिस्सा बनने से क्यों हिचकिचा रहे थे एकनाथ शिंदे?
एक पर्यवेक्षक के मुताबिक,'जिन एमएलए को मंत्री नहीं बनाया जाएगा,उन्हें सरकारी निगमों में एडजस्ट करना होगा। भारत गोगावाले और संजय शिरसाट जैसे विधायक 2022 से ही कैबिनेट में शामिल होने के इंतजार में बैठे हैं। इसलिए उन्हें या तो मंत्री बनाना पड़ेगा या फिर समझा-बुझाकर शांत रखना होगा। अगर सेना को 11 से 13 मंत्री पद मिलता है तो संतुलन बिठाना बहुत ही मुश्किल होगा और सभी विधायकों को खुश रखना आसान नहीं रहेगा। कुछ वरिष्ठ एमएलसी भी मंत्री के रूप में प्रमोशन के इंतजार में बैठे हैं।'
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शिवसेना विधायक संजय शिरसाट ने इसी वजह से कहा था कि '..(शिंदे को)कुछ और समय दें, क्योंकि हमें नगर निगम और जिला परिषद के चुनाव भी मजबूती से लड़ना है।' क्या पार्टी के अंदर की इन चुनौतियों की वजह से ही शिंदे सरकार में शामिल होने से हिचकिचाते रहे कि कहीं उससे शिवसेना में असंतुष्टों की जमात न खड़ी होने लग जाए?












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