Maharashtra New CM: देवेंद्र फडणवीस पर BJP नेतृत्व ने फिर क्यों जताया भरोसा? जानिए 5 वजहें

Maharashtra New CM: देवेंद्र फडणवीस गुरुवार को तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बीजेपी और इसके शीर्ष नेतृत्व ने फिर से उनपर विश्वास जताया है तो उसके पीछे ठोस वजहें हैं। क्योंकि, विपक्ष की ओर से यह भी आशंका जताई जा रही थी कि चौंकाने की आदत वाला बीजेपी नेतृत्व आखिरी समय पर कोई नया नाम घोषित कर सकता है। जैसा कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में देखा जा चुका है।

फडणवीस ने 'समंदर' की तरह की वापसी
फडणवीस का सीएम बनने का रास्ता जबसे साफ हुआ है, उनका पांच साल पुराना एक वीडियो खूब वायरल है। तब महाराष्ट्र विधानसभा में उद्धव ठाकरे से धोखा खाने के बाद उन्होंने कहा था, 'मेरा पानी उतरता देख मेरे किनारे पर घर मत बना लेना, मैं समंदर हूं लौटकर वापस आऊंगा।'वाकई फडणवीस विशाल जनादेश के साथ सत्ता में वापस लौटे हैं।

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पार्टी ने 20 नवंबर को हुए विधानसभा चुनावों में राज्य में पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने के अगुवा रहे 54 साल के ब्राह्मण नेता पर मुहर लगाई है। वह राज्य के दूसरे ब्राह्मण नेता हैं,जो मुख्यमंत्री रह चुके हैं और फिर से बनने भी जा रहे है। उनसे पहले सिर्फ शिवसेना के मनोहर जोशी ही ब्राह्मण नेता थे,राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

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फडणवीस के धैर्य को मिला इनाम
भाजपा ने देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री नियुक्त कर एक तरह से उन्हें उनके धैर्य का इनाम दिया है। 2019 में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने महाराष्ट्र में जीत दर्ज की थी। लेकिन, नतीजे आने के बाद उद्धव ठाकरे ने चुनाव-पूर्व गठबंधन तोड़ दिया, जिसकी वजह से फडणवीस लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए। वैसे उन्होंने बीच में अजित पवार के साथ सरकार बनाई भी, लेकिन वह कुछ ही घंटों में गिर गई।

ढाई साल बाद जब उद्धव की पार्टी टूटी तो लगा कि फडणवीस फिर से सीएम बनेंगे। लेकिन, उन्होंने शिवसेना के एकनाथ शिंदे की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी करवाई। वह पूरे ढाई साल उनके उपमुख्यमंत्री के तौर पर पूरे लगन से कार्य करते रहे और कभी भी यह संकेत नहीं दिया कि उनका डिमोशन हुआ है।

भाजपा और नेतृत्व से वफादारी
जब शिंदे सीएम बने तो पार्टी ने उनसे उनका डिप्टी सीएम बनने को कहा। फडणवीस इसके लिए जरा भी इच्छुक नहीं थे। लीडरशिप से उन्हें संकेत मिला कि यह समय की मांग है और महायुति की सरकार ठीक से चले, इसके लिए जरूरी है कि उनके जैसा नेता उसका हिस्सा हो।

उन्होंने नेतृत्व के निर्देशों को सिर झुकाकर स्वीकार किया। उन्होंने कभी नहीं सोचा कि इससे उनकी निजी राजनीतिक छवि पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने खुद से आगे पार्टी को रखा।

फडणवीस की बेदाग छवि
फडणवीस महाराष्ट्र के एक प्रभावशाली नेता के घर से निकलकर यहां तक पहुंचे हैं। उनके पिता गंगाधर फडणवीस पहले जनसंघ और फिर बीजेपी से जुड़े थे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत बीजेपी के कई नेता उन्हें अपना 'राजनीतिक गुरु' बताते हैं। फडणवीस के पिता और चाची दोनों एमएलसी रहे थे।

लेकिन, फडणवीस ने एक आम कॉर्पोरेटर से चुनावी राजनीति शुरू की और नागपुर के सबसे युवा मेयर पद से होते हुए प्रदेश के पांच साल तक मुख्यमंत्री और ढाई साल उपमुख्यमंत्री रहे,लेकिन कभी भी उनपर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा। जबकि, 1999 से ही वह विधानसभा में पहुंच रहे हैं।

रणनीतिक कौशल
महाराष्ट्र में इस बार बीजेपी की बड़ी जीत इसलिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद मिली है। सिर्फ पांच महीनों में उनके नेतृत्व में पार्टी और महायुति ने प्रदेश की चुनावी फिजा बदलने में सफलता हासिल की है।

मराठा आंदोलन, विपक्ष के तमाम नकारात्मक नैरेटिव को उन्होंने अपने रणनीतिक कौशल से नाकाम कर दिया। चीजों को स्वीकार करने और नपे-तुले फैसले लेने की उनकी क्षमता ने भी पार्टी का उनमें विश्वास को और बढ़ाने का काम किया।

फडणवीस 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की नजरों में आ चुके थे। तब वे महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष थे। उस चुनाव में मोदी लहर था तो महाराष्ट्र में उस लहर को धार देने में फडणवीस की भी बड़ी भूमिका थी। पीएम मोदी का उनके प्रति कैसा भरोसा है,यह तभी पता चल गया था, जब उन्होंने एक चुनाव अभियान में उन्हें, 'देश को नागपुर का उपहार'कहकर संबोधित किया था।

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विकास पुरुष वाली छवि
देवेंद्र फडणवीस की छवि विकास को महत्त्व देने वाली नेता की रही है। वह राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं, जिसकी वजह से खासकर शहरी युवाओं में उनकी एक खास पैठ बन चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी खुद विकास को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते हैं, इसलिए फडणवीस के नाम पर मुहर लगाने में उनकी इस छवि ने भी बड़ा प्रभाव डाला है। (पीटीआई इनपुट के साथ)

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