'RSS और बड़े मंदिरों के फंड की भी जांच करवाए', महाराष्ट्र में मदरसों की जांच पर भड़की कांग्रेस, जानें मामला
महाराष्ट्र के नागपुर रेलवे स्टेशन पर 30 जनवरी 2026 को बाल तस्करी के संदेह में मौलाना के साथ पकड़े गए 22 बच्चों के मामले के बाद मदरसे पुलिस के जांच के दायरे में आ गए हैं। महाराष्ट्र में मदरसों को होने वाली फंडिंग की जांच शुरू हो चुकी है। जिसके बाद मदरसों की जांच का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है।
इस पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई का बड़ा बड़ा बयान आया हैं। उन्होंने कहा है कि केवल मदरसों की जांच ना की जाए बल्कि आरएसएस और हिंदू मंदिरों समे अन्य सभी संस्थानों की भी जांच होनी चाहिए। कांग्रेस नेता के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है। उनका तर्क है कि किसी एक समुदाय या संस्था को विशेष रूप से निशाना बनाकर सवाल उठाना अनुचित है। जानिए क्या है पूरा मामला?

हुसैन दलवई बोले- RSS को फंड कहां से मिलते हैं?
हुसैन दलवई ने सवाल किया, "अगर आप मदरसों की जांच कर रहे हैं और यह पूछ रहे हैं कि फंड कहां से आते हैं, तो मैं पूछता हूं, आरएसएस को फंड कहां से मिलते हैं? उसकी भी जांच कीजिए। बड़े मंदिरों को फंड कहां से मिलते हैं? उसकी भी जांच कीजिए। मुद्दा यह है कि सिर्फ मदरसों की ही बात क्यों? सबकी बात कीजिए।"
तो यह नियम सब पर समान लागू हो...
दलवई ने आरोप लगाया कि मदरसों की जांच एक खास तबके को निशाना बनाने का बहाना है। उन्होंने कहा कि देश में कई सामाजिक, धार्मिक और वैचारिक संस्थाएं अलग-अलग स्रोतों से फंड पाती हैं। अगर पारदर्शिता चाही जा रही है, तो यह नियम सब पर समान लागू हो। उन्होंने कहा कि आरएसएस और मंदिरों समेत अन्य संस्थाओं को मिलने वाले फंड की भी वैसी ही जांच हो जैसी मदरसों की की जा रही है। उनका मानना है कि इसी से निष्पक्षता और भरोसा कायम रहेगा।
क्या है बच्चों की बाल तस्करी का मामला?
दरअसल, नागपुर रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को बाल तस्करी के संदेह में 22 बच्चों को हिरासत में लिया गया। ये सभी बच्चे यवतमाल जिले के एक मदरसे से बिहार जा रहे थे, जब रेलवे पुलिस की कार्रवाई ने स्टेशन पर कुछ समय के लिए भ्रम का माहौल पैदा कर दिया। दिनभर की पूछताछ के बाद, बच्चों को चाइल्डलाइन के माध्यम से एक बाल सुधार गृह भेज दिया गया था।
घटना शुक्रवार सुबह लगभग 9 बजे की हुई जब नागपुर रेलवे प्लेटफॉर्म पर 22 नाबालिग बच्चे अपने साथ एक मौलाना और एक केयरटेकर के साथ खड़े थे। कुल 24 लोग, जिसमें ये बच्चे भी शामिल थे, अमृत भारत एक्सप्रेस से बिहार के पूर्णिया जिले के लिए रवाना होने वाले थे। ट्रेन आने में देरी के कारण वे सभी इंतजार कर रहे थे, तभी स्टेशन मास्टर की उन पर नज़र पड़ी।
कहां जा रहे थे मदरसे के बच्चे?
इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को बिना किसी स्पष्ट अभिभावक के देखकर स्टेशन मास्टर ने तुरंत रेलवे सुरक्षा बल (RPF), रेलवे पुलिस और चाइल्डलाइन को सूचित किया। इसके बाद, जिला बाल संरक्षण अधिकारी का एक दल भी मौके पर पहुंचा। पूछताछ के दौरान, मौलाना ने बताया कि ये सभी बच्चे यवतमाल जिले के आर्णी स्थित एक मदरसे में पढ़ते हैं और फरवरी में रमज़ान की छुट्टियों के लिए अपने घर, पूर्णिया जा रहे थे।
मौलाना ने आर्णी के मदरसे से संबंधित दस्तावेज़ और एक स्थानीय पार्षद का पत्र भी प्रस्तुत किया। इसके बाद, चाइल्डलाइन और रेलवे पुलिस ने बच्चों के माता-पिता से संपर्क स्थापित करना शुरू किया। हालांकि, शाम तक कुछ ही अभिभावकों से संपर्क हो पाया, जिसके बाद सभी बच्चों की चिकित्सकीय जांच करवाकर उन्हें पाटणकर चौक स्थित शासकीय बाल गृह भेज दिया गया।
बच्चों के नाबालिग होने और दस्तावेज़ों की कथित कमी के कारण कुछ अधिकारियों को उनकी तस्करी का संदेह था, जिसके चलते जीआरपी (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग भी उठी। लेकिन अधिकारियों ने बताया कि जिन अभिभावकों से संपर्क हो पाया, उनकी जानकारी मौलाना द्वारा दी गई जानकारी से मेल खाती थी। इसलिए, अन्य माता-पिता से संपर्क होने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। इस मामले के बाद एक बार फिर मदरसे जांच के घेरे में आ चुके हैं।












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