‘कांग्रेस पार्टी पर अब वामपंथियों का कब्जा’, पार्टी से इस्तीफा देकर संजय निरुपम ने गांधी परिवार पर बोला हमला

कांग्रेस से छह साल के लिए निकाले गए संजय निरूपम ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कई कांग्रेसी नेताओं पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी संरचनात्मक और वैचारिक तौर पर बिखरी हुई है। उन्होंने कांग्रेस पर धर्मविरोधी होने का भी आरोप लगाया।

महाराष्ट्र के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में पांच पावर सेंटर हैं। पांचों सेंटर के कॉकस हैं। इन सभी लॉबी के भीतर संघर्ष चलता रहता है। इन लॉबी से दूर रहने वाले लोग परेशान हो रहे हैं।

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संजय निरुपम गुरुवार को मीडिया के सामने आए। उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस में एक पावर सेंटर हुआ करता था और उसका एक कॉकस हुआ करता था जिसके खिलाफ बाकी लोग लड़ते रहते थे। इस समय कांग्रेस पार्टी में 5 पावर सेंटर हो गए हैं। इन पांतों पावर सेंटर के पांचों कॉकस हैं, सभी की अपनी लॉबी है जो आपस में टकराती रहती है।

संजय निरुपम ने कहा कि इन पांचों पावरसेंटर में पहला पावर सेंटर सोनिया गांधी का है। दूसरा पावर सेंटर राहुल गांधी का है। तीसरा पार्टी सेंटर बहन जी(प्रियंका गांधी) का है। चौथा पावर सेंटर अध्यक्ष महोदय का है। वहां तो ऐसे-ऐसे लोग हैं जिनका कोई राजनीतिक आधार तक नहीं है। वे अचानक ही ताकतवर हो गए हैं।

संजय निरुपम ने आगे कहा कि इसके अलावा एक और आखिरी पावरसेंटर है जो कि एआईसीसी के महासचिव केसी वेणुगोपाल का है। वो भी अपने ढंग से अपनी राजनीति करते हैं। इन पावर सेंटर में हो रहे टकराव की वजह से पार्टी की ये गत हुई है।

संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस में बढ़ते टकराव की वजह से बाकी राज्यों में कांग्रेस के लीडर्स हैं उन्हें दिक्कतें हो रही हैं। पिछले पांच वर्षों से वो इसे महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर कार्यकर्ताओं में निराशा बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस में वैचारिक स्तर पर एक द्वंद चल रहा है। अगर इसे ठीक नहीं किया गया तो कांग्रेस में बहुत कुछ खत्म हो जाएगा। कांग्रेस बार-बार कहती है कि वे सेक्युलर पार्टी है। कांग्रेस ने शुरुआत में गांधी के सेक्युलरिज्म को अपनाया जिसमें धर्म का विरोध नहीं था। इसके बाद उन्होंने नेहरू के सेक्युलरिज्म को अपनाया जिसमें से धर्म ही गायब हो गई।

भारत में अब नेहरुवियन सेक्युलरिज्म की उम्र पूरी हो चुकी है। अब इसे मानने वाले सबसे अधिक लोग कम्यूनिस्ट हैं जो खुद ही खत्म हो चुके हैं। पूरी कांग्रेस पार्टी में लेफ्टिस्ट विचारधारा हावी हो गई है। यही वजह है कि अयोध्या में रामलला की स्थापना का विरोध किया गया। अकेली कांग्रेस ऐसी पार्टी थी जिसने इसे बीजेपी का प्रचार करार दिया। इसी पार्टी ने राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया था। ये दर्शाता है कि पार्टी पर कम्युनिस्ट विचारधारा कितनी हावी हो गई है।

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