महाराष्ट्र में क्या फिर पलटेगी बाजी? अपने ही विधायकों ने एकनाथ शिंदे को दी 3 बड़ी टेंशन
उद्धव ठाकरे की सरकार गिराने के बाद भाजपा के सहयोग से मुख्यमंत्री बने एकनाथ शिंदे अब एक नहीं, बल्कि तीन-तीन मुश्किलों में घिरते हुए नजर आ रहे हैं।
मुंबई, 3 सितंबर: महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद एक बार फिर से उथल-पुथल मच गई है। दरअसल, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की सरकार गिराने के बाद भाजपा के सहयोग से मुख्यमंत्री बने एकनाथ शिंदे अब एक नहीं, बल्कि तीन-तीन मुश्किलों में घिरते हुए नजर आ रहे हैं। ईटी की खबर के मुताबिक, उद्धव ठाकरे से अलग हुए शिवसेना के विधायक अपने लिए मंत्री पद की मांग कर रहे हैं, जिसकी वजह से एकनाथ शिंदे गुट की टेंशन बढ़ गई है। एकनाथ शिंदे गुट को डर है कि जिन विधायकों को मंत्री पद नहीं दिया गया है, कहीं वो वापस उद्धव ठाकरे गुट में ना लौट जाएं।
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'...तो मंडरा सकता है दलबदल कानून का खतरा'
आपको बता दें कि उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट में से असली शिवसेना कौन सी है, इस मामले पर अभी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है। ऐसे में एकनाथ शिंदे की एक बड़ी चिंता यह भी है कि मंत्री पद पाने से चूके विधायक अगर उद्धव ठाकरे गुट में वापस लौटते हैं तो उनके ऊपर दलबदल कानून का खतरा मंडरा सकता है।

'चार विधायक भी वापस लौटे तो बढ़ेंगी मुश्किल'
एकनाथ शिंदे गुट की पहली चिंता यह है कि दलबदल कानून के तहत अयोग्य ठहराए जाने से बचने के लिए उन्हें शिवसेना के कुल 54 विधायकों में से 37 विधायकों का साथ चाहिए। अभी एकनाथ शिंदे गुट में शिवसेना के कुल 40 विधायक हैं, लेकिन अगर चार विधायक भी वापस उद्धव ठाकरे गुट में लौटे तो उनकी मुश्किल बढ़नी तय है। एकनाथ शिंदे गुट के एक नेता ने बताया, 'असली शिवसेना कौन है, फिलहाल यह विवाद सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग में है। लेकिन, अगर मंत्रिमंडल का विस्तार होता है और जिन विधायकों को मंत्री पद नहीं मिला, वो उद्धव ठाकरे गुट में वापस चले गए तो फिर शिवसेना पर दावे की बहस ही खत्म हो जाएगी।'

भाजपा को दिए जाएंगे ज्यादा मंत्री पद?
आपको बता दें कि एकनाथ शिंदे गुट के 40 विधायकों में से अभी केवल 9 को मंत्री बनाया गया है। यानी, 30 विधायक अभी भी मंत्री पद के इंतजार में हैं और महाराष्ट्र कैबिनेट में अब ज्यादा से ज्यादा 23 विधायकों को ही मंत्री बनाया जा सकता है। शिंदे गुटे की दूसरी टेंशन यह है कि सरकार में सहयोगी भारतीय जनता पार्टी के हिस्से में भी मंत्री पद जाएंगे। महाराष्ट्र कैबिनेट के पहले विस्तार में भाजपा से 9 मंत्री बनाए गए थे। माना जा रहा है कि कैबिनेट के दूसरे विस्तार में भाजपा को ज्यादा मंत्री पद दिए जा सकते हैं, क्योंकि गठबंधन सरकार में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है।

छोटे दल भी कर रहे हैं मंत्री पद की मांग
एकनाथ शिंदे के सामने तीसरी मुश्किल यह है कि उनकी सरकार का समर्थन करने वाले छोटे दल भी मंत्री पद की मांग कर रहे हैं। इनमें से एक प्रहार जनशक्ति पार्टी के बच्चू कडू ने सीएम शिंदे को अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी भी दी है। गौरतलब है कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था कि कैबिनेट का दूसरा विस्तार विधानसभा के मानसून सत्र के बाद होगा। हालांकि सत्र समाप्त हुए एक हफ्ते से ज्यादा का समय बीत गया है, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।












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