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'मित्र का शोक आत्मा और हृदय को जला देता है', विधानसभा सत्र में अजित पवार को याद कर भावुक हुए सीएम फडणवीस

महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी (सोमवार) को आरंभ हुआ। इस महत्वपूर्ण सत्र में, दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार को बजट पेश करना था, जिनकी 28 फरवरी को प्‍लेन क्रैश दुर्घटना में असामयिक मृत्यु के कारण अब यह संभव नहीं हो सका।

बता दें अजित पवार को इस वर्ष अपना 12वां बजट प्रस्तुत करना था। इसके बाद वे अगले साल 13वां बजट पेश कर बैरिस्टर शेषराव वानखेड़े के कीर्तिमान की बराबरी कर लेते। संभवतः वे सर्वाधिक बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री बन जाते।

CM Devendra Fadnavis

विधानसभा सत्र की शुरूआत में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में अजित पवार के निधन पर शोक व्यक्त किया। इस दौरान सीएम फडणवीस ने भावुक हो गए। महाराष्ट्र विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान सीएम बोले- "कहां से शुरू करूं कुछ समय नहीं आ रहा, राजनीतिक क्षेत्र में स्थापित हो चुके और भविष्य में बड़ी पारी खेलने की उम्मीद वाले दादा की असामयिक मृत्यु ने जो रिक्तता पैदा की है, वह स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है।"

"मित्र का शोक हृदय और आत्मा को भी जला देता है"

सीएम फडणवीस ने महाकवि भास के नाटक 'स्वप्नवासवदत्तम्' से एक सुभाषित सुनाई: 'लकड़ी जलती है तो आग केवल शरीर को जलाती है, लेकिन मित्र का शोक हृदय और आत्मा को भी जला देता है।' उन्होंने बताया कि अजित पवार के निधन से आज उनके सामने भी ठीक ऐसी ही भावनात्मक स्थिति है।

अजितदादा जैसे सच्चे मित्र और सहयात्री को खोना महज एक राजनीतिक क्षति नहीं है, बल्कि यह हम सभी के हृदय को पीड़ा देने वाली व्यक्तिगत हानि है। वक्ता ने माना कि कुछ घावों पर समय मरहम होता है, लेकिन अजितदादा के जाने का यह गहरा दुख कभी कम नहीं होगा। सीएम ने कहा, सदन में मेरे बगल की सीट पर 'दादा' हमेशा मौजूद रहते थे, जो सुबह से देर रात तक कार्यवाही चलने पर भी अपनी जगह पर अडिग रहते थे लेकिन आज दादा हमारे बीच नहीं है।

फडणवीस भावुक होकर बोले- पहली बार अजित दादा समय से चूके

फडणवीस ने बताया कि 'अजित दादा' किसी भी निर्णय से असहमत होने पर अपनी बात स्पष्ट रूप से रखते थे और मंत्रिमंडल के हर विषय का गहराई से अध्ययन करते थे।फडणवीस ने भावुक होते हुए कहा, "राज्य ने अजित दादा के रूप में एक ऐसे मुख्यमंत्री को खो दिया, जो मुझे अब कभी मिल नहीं पाएगा।" उन्होंने यह भी कहा, अजित दादा अपने जीवन में पहली बार "समय से चूके" हैं।

समय-पाबंदी के लिए भी जाने जाते थे अजित पवार

मुख्यमंत्री ने एक वाकया सुनाते हुए बताया कि जब वह विपक्ष के नेता थे, तब अजित दादा उन्हें 'मुख्यमंत्री' कहकर संबोधित करते थे।पवार अपनी जबरदस्त समय-पाबंदी के लिए भी जाने जाते थे; यदि कार्यक्रम 12 बजे का होता, तो वे 11:59 पर पहुँच जाते थे। सीएम ने इस बात पर जोर दिया कि अजित पवार में मुख्यमंत्री पद संभालने की पूरी क्षमता थी।

"अजित दादा में नेतृत्‍व की अविश्वसनीय क्षमता थी"

उन्होंने कहा, "मैं विश्वास करता हूं कि अंततः नियति उनका यह सपना अवश्य पूरा करती, क्योंकि उनमें नेतृत्व की अविश्वसनीय क्षमता थी।" फडणवीस ने यह भी माना कि राजनीति में अक्सर समीकरण बदलते रहते हैं, लेकिन जहां तक क्षमता का सवाल है, अजित पवार इस पद के लिए सर्वथा योग्य थे।

अजित दादा को सदा महाराष्‍ट्र याद करेगा

फडणवीस ने आगे कहा कि भले ही राजनीति में कई बड़े नेता और 'दादा' हों जिन्होंने कई अहम कार्य किया है, लेकिन महाराष्ट्र के इतिहास में 'वसंत दादा' और 'अजित दादा' वे दो नाम हैं, जिन्हें राज्य हमेशा उनके असाधारण कार्यों के लिए 'दादा' के सम्मानजनक संबोधन के साथ स्मरण करेगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार के व्यक्तित्व के शुरुआती दिनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "जब दादा ने सुधाकर नाइक के मंत्रिमंडल में काम शुरू किया, तो मंत्री बनने के शुरुआती दौर में उनका स्वभाव थोड़ा शांत था। ऐसा लगता था कि वे बस तयशुदा काम ही करना चाहते हैं। शुरुआत में लोग उन्हें एक बड़े परिवार का व्यक्ति समझते थे जो अब मंत्री बन गया है।"

बारामती के एक 'अपराजित नेता' अजित पवार

फडणवीस ने अपनी बात जारी रखते हुए बताया, "लेकिन जब दादा ने वास्तव में काम करना शुरू किया, तो सुधाकरराव (नाइक) अपने हर वाक्य में अजित दादा का नाम लेने लगे। इसी से अजित दादा की पहचान एक 'काम करने वाले मंत्री' के तौर पर बनी। हम उन्हें बारामती के एक 'अपराजित नेता' के रूप में देखते हैं, और उन्हें जनता से जो असीम प्रेम मिला, वह किसी भी नेता के लिए सबसे बड़ी संपत्ति है, इससे बड़ा कोई खजाना नहीं हो सकता।"

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